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बढ़ा खतरा: खेतों तक पहुंचा क्रोमियम युक्त कचरा, आज आएगी जांच रिपोर्ट, अफसर बोले- इसके बाद हटाया जाएगा मलबा

Fri, 24 Jul 2026 08:58 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Kanpur Chromium Waste News: पुरवामीर गांव में अवैध रूप से फेंका गया क्रोमियम युक्त रासायनिक कचरा अब खेतों तक पहुंच गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह जहरीला तत्व खाद्य श्रृंखला के जरिए इंसानों के शरीर में पहुंचकर गंभीर बीमारियां पैदा कर सकता है।
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बारिश के पानी में तेजी से फैल रहा क्रोमियम युक्त हरा कचरा - फोटो : amar ujala
कानपुर के पुरवामीर गांव में अवैध रूप से डाला गया क्रोमियम युक्त कचरा अब खेतों तक पहुंच गया है। वनस्पति विशेषज्ञों का कहना है कि इस जहरीले कचरे से पैदावार को तो नुकसान नहीं पहुंचेगा पर उपजी सब्जियों, फसलों और अनाज से क्रोमियम शरीर में पहुंच जाएगा। यह सेहत को काफी नुकसान पहुंचाएगा। वहीं, अफसर जांच रिपोर्ट आने के बाद ही इस हरे रंग के कचरे को हटाने की बात कह रहे हैं। इससे ग्रामीण आक्रोशित हैं।
महाराजपुर के पुरवामीर गांव में चार दिन पहले रात के अंधेरे में डंपरों से क्रोमियम युक्त रासायनिक कचरा डाला गया था। इसके बाद प्रशासन, पुलिस के साथ ही उत्तर प्रदेश प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (यूपी पीसीबी) की कानपुर नगर और प्रयागराज की टीम ने मौके पर जाकर जांच-पड़ताल की। साक्ष्य जुटाने के साथ ही बोर्ड की दोनों टीमों ने नमूने लेकर जांच के लिए भेजे हैं। टीमों ने कहा था कि यह कचरा सेहत और मिट्टी दोनों के लिए हानिकारक है।
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महाराजपुर में क्रोमियम का कचरा - फोटो : amar ujala
मलबा क्रोमियम सल्फेट का प्रतीत हो रहा
यूपी पीसीबी कानपुर नगर के क्षेत्रीय अधिकारी अजीत सुमन के अनुसार पुरवामीर में फेंका गया मलबा शुरुआती जांच में क्रोमियम सल्फेट का प्रतीत हो रहा है। वहां से लिए गए नमूने जांच के लिए भेजे गए हैं, जिनकी रिपोर्ट 24 जुलाई को आएगी। इससे स्थिति स्पष्ट होगी। आशंका है कि फतेहपुर जिले में क्रोमियम सल्फेट की किसी फैक्टरी से यह घातक रसायन युक्त मलबा कानपुर-प्रयागराज राष्ट्रीय राजमार्ग से सटे इस गांव में फेंका गया।
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महाराजपुर में क्रोमियम का कचरा - फोटो : amar ujala
जमीन के बंजर होने का भी खतरा
यह गांव फतेहपुर जिले की सीमा से मात्र ढाई किलोमीटर दूर है। ग्रामीणों ने बताया कि खुले में पड़े इस मलबे से निकलने वाली बदबू और जहरीली हवा के कारण सांस लेना भी मुश्किल हो रहा है। गांव के लोगों का साफ कहना है कि जांच चलती रहे लेकिन पहले इस मलबे को वहां से हटाकर वैज्ञानिक तरीके से निस्तारित कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि इस कचरे से जमीन के बंजर होने का भी खतरा है।

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जितेंद्र सिंह गौतम, ग्राम प्रधान - फोटो : amar ujala
यह रासायनिक कचरा रात के अंधेरे में चोरी छिपे फेंका गया है। अभी तक इसको हटवाया नहीं गया है। उस जगह रहने वाले कई लोगों ने शिकायत की है। हरा कचरा बेहद बदबू कर रहा है। वहां थोड़ी देर खड़े होने से मेरा सिर चकराने लगा। यदि इसको जल्द हटवाया नहीं गया तो उच्च अधिकारियों से शिकायत करूंगा।  -जितेंद्र सिंह गौतम, ग्राम प्रधान
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दिलीप पाल - फोटो : amar ujala
जिस जगह पर यह कचरा डाला गया है, वहीं मेरा चट्टा है। चट्टे में 50 भैंस हैं। जिस दिन से यह कचरा डाला गया है, उस दिन से मवेशियों को बांधकर रखना पड़ रहा है। उस जगह पानी न पिलाकर अब दूर ले जाना पड़ता है। कचरा नहीं हटवाया गया तो बारिश में और ज्यादा फैलेगा।  -दिलीप पाल
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नीरज तिवारी - फोटो : amar ujala
कचरा डाले कई दिन बीत गए हैं। इससे बहुत बदबू आ रही है। आसपास खड़ा होना तो दूर सांस लेना भी दूभर है। लोगों के बीमार होने का खतरा है।  -नीरज तिवारी
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महाराजपुर में क्रोमियम का कचरा - फोटो : amar ujala
एनजीटी की टीम जांच करके गई है, लेकिन अभी तक कोई रिपोर्ट नहीं आई है। रिपोर्ट आते ही आगे की प्रक्रिया पर काम किया जाएगा।  -सत्यपाल प्रजापति, एसडीएम नर्वल
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महाराजपुर में क्रोमियम का कचरा - फोटो : amar ujala
क्रोमियम अत्यंत हानिकारक तत्व है जो हवा, पानी और मिट्टी तीनों को प्रदूषित करता है। यह मानव शरीर के अंगों को गंभीर नुकसान पहुंचाता है और लिवर, किडनी की बीमारियों से लेकर कैंसर तक का कारण बन सकता है। यदि क्रोमियम हवा से सांस में जाता है तो तुरंत चक्कर आने और बेहोशी जैसी स्थिति बन सकती है। इसलिए जहां भी इस तरह के हानिकारक तत्व निकलते हैं, वहां हवा को साफ करने के लिए प्रभावी फिल्टर का इस्तेमाल होना बेहद जरूरी है। जब ये हानिकारक तत्व मिट्टी में मिलता है तो हो सकता है कि ये पेड़-पौधों को तुरंत या सीधे तौर पर नुकसान न पहुंचाए लेकिन जब इंसान उन पौधों से प्राप्त फल और सब्जियों का सेवन करते हैं तो क्रोमियम खाद्य शृंखला के जरिये शरीर में प्रवेश कर जाता है और बीमारियां दे जाता है।  -डॉ. प्रीति सिंह, विभागाध्यक्ष, वनस्पति विज्ञान, एसएन सेन पीजी कॉलेज
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