कन्नौज में जेल की चहारदीवारी के अंदर बड़े-बड़े खेल हो रहे हैं। बंदियों और कैदियों की परिजनों की मुलाकात के बाद धन उगाही होती है। बंदियों की हैसियत देखकर मशक्कत काटने के नाम पर 50 हजार रुपये तक की मांग होती है।
कहते हैं कि जेल की चहारदीवारी के अंदर कैदियों और बंदियों को सुधारने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। तभी तो इसे बंदी सुधार गृह भी कहा जाता है। लेकिव वास्तव में इस चारदीवारी के अंदर बड़े-बड़े खेल चलते हैं, जिसका अंदाजा शायद ही किसी को होगा। जो बंदी जमानत पर छूटकर जेल से बाहर आए हैं, वह जेल कर्मियों की करतूत खोलने के लिए काफी है। जैसे की किसी बंदी के परिजन मुलाकात करके वापस जाते हैं तो उसका दोहन शुरूहो जाता है। शादी ब्याह में नेग की तरह सबको भेंट चढ़ानी पड़ती है। न देने पर प्रताड़ित किया जाता है।
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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच करती पुलिस
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
रविवार की रात जिला जेल से दो कैदियों, अंकित और डिंपी, के फरार होने की घटना ने जेल प्रशासन की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगा दिए हैं। जेल प्रशासन द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, रात 9 बजकर 35 मिनट पर बिजली जाने के बाद, कैदियों ने महिला बैरक के पीछे लकड़ियों और कंबलों के सहारे सरिया का कुंडा बनाकर 22 फुट ऊंची दीवार फांदी और खेतों में उतरकर फरार हो गए। हालांकि, जिस तरह से यह घटना बताई जा रही है, वह कई लोगों के गले नहीं उतर रही है।
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को बंदियों के जेल से भागने के बाद जांच के लिए आते अफसर
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
सुबह जब बंदियों की गिनती हुई, तब अंकित और डिंपी के फरार होने का पता चला। सवाल यह उठता है कि यदि कैदी रात में ही भागे थे, तो सुबह गिनती तक किसी भी बंदी रक्षक, सर्किल वार्डन या ड्यूटी पर तैनात गार्ड की नजर उन पर क्यों नहीं पड़ी?
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जेल से भागा अंकित
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
जेल प्रशासन के अनुसार, कैदी पहले अपने बैरक से निकले, फिर बैरक हाता गेट, उसके बाद दो सीओ गेट पार करके महिला बैरक तक पहुंचे और वहां से दीवार फांदकर भागे हैं। इतनी लंबी दूरी तय करने और कई सुरक्षा घेरों को पार करने के दौरान किसी भी सुरक्षाकर्मी का सतर्क न होना, जेल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर संदेह उत्पन्न करता है।
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जेल से भागा शिवा ऊर्फ डिंपी
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
बाहरी मदद या अंदरूनी साठगांठ का अंदेशा
घटना वाले दिन सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक होमगार्ड जवान की आखिरी दीवार पर ड्यूटी थी। घटना के समय तक, उस क्षेत्र में बंदियों के भागने के कोई निशान नहीं थे। इसके बाद, दो पक्का कैदियों के साथ तीन-चार सिपाही आए और उन्होंने लकड़ी से जमीन पर निशान बनाए। फिर, कारागार सिपाही के साथ जेल अधीक्षक भीमसेन मुकंद पहुंचे।
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जेल से भागा अंकित
- फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी
निरीक्षण के बाद, बाउंड्री के पीछे खेत की तरफ सीढ़ी लगाकर और कंबल की रस्सी बनाकर, बाउंड्री के पीछे निकली सरिया में उसका हुक फंसाकर, दीवार फांदकर भागने की एक सुनियोजित योजना अंजाम दी गई। यह सब अधिकारियों को गुमराह करने के लिए किया गया, ताकि यह लगे कि कैदी खुद ही दीवार फांदकर भागे हैं।
अफसरों की मस्ती में सुरक्षा की अनदेखी
सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि नववर्ष पार्टी के दौरान बंदियों का आना-जाना लगा रहा और शायद इसी मस्ती में सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी की गई। सूत्रों का कहना है कि जेल में बंदी किस समय भागे, यह किसी को ठीक से मालूम नहीं है। किसी ने रात में नववर्ष पार्टी के दौरान भागने की बात कही, तो किसी ने सुबह दीवार फांदकर।
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Kannauj jail break
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
सुबह गिनती के दौरान बंदी कम होने की जानकारी मिलने पर तलाश शुरू हुई। इस बीच, जेल प्रशासन ने गहन मंथन के बाद घटना का समय रात 9 बजकर 30 मिनट बताया, जब बिजली गुल थी और तीन घंटे तक बिजली की आपूर्ति बाधित रही। इस दौरान सभी कैमरे बंद थे। यदि 10 बजे के बाद का समय बताया जाता, तो कई चेहेते बंदी रक्षक फंस सकते थे, इसलिए 9:30 से 10 बजे तक का समय तय किया गया।
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जिला कारागार का निरीक्षण करते डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री व एसपी विनोद कुमार
- फोटो : amar ujala
वायरल वीडियो और पार्टी, जेल अधीक्षक की भूमिका पर उठे सवाल
नई साल 2026 के चार दिन बाद रविवार रात जेल गेट के पास नववर्ष पार्टी का एक वीडियो वायरल हुआ है। शुरुआत में इसे डीएम आवास का बताया जा रहा था, लेकिन वीडियो के अंत में जेल गेट के सामने टेंट लगाकर किए गए आयोजन और जेल गेट के पास पड़ी टिन शेड से आ रहे गाने और नाचते हुए जेल के सिपाही स्पष्ट दिख रहे हैं।
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जिला कारागार में कंबलों की रस्सी देखते गुरसहायगंज कोतवाल अजय अवस्थी
- फोटो : amar ujala
सूत्रों के अनुसार, यह नववर्ष पार्टी जेल में तैनात कनिष्ठ बाबू पंकज कुमार ने आयोजित की थी, जिसका जिम्मा जेल में ठेकेदारी कर रहे आकाश यादव को दिया गया था। आकाश यादव ने अन्नू टेंट हाउस पछायेपुरवा से टेंट बुक किया था। टेंट हाउस मालिक मुकेश कुशवाहा ने भी आकाश यादव द्वारा जेल में टेंट लगवाने और नववर्ष पार्टी की पुष्टि की है। पार्टी में डीजे की धुन पर जमकर नाच-गाना हुआ, जिसमें पीछे से शराब लाने की आवाजें भी सुनाईं दे रहीं हैं। टेंट मालिक का कहना है कि जेल से उनके पास फोन आया था कि अभी पैसे लेने मत आना। दो बंदी भाग गए हैं।
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जेल की चहारदीवारी के किनारे खाली वॉच टॉवर
- फोटो : amar ujala
पंकज बाबू की पकड़ और धड़ल्ले से धन उगाही का खेल
जेल में तैनात कनिष्ठ बाबू पंकज कुमार का प्रशासनिक आधार पर करीब 14 जून 2025 को आगरा जिला जेल में स्थानांतरण हो गया था, लेकिन जेल अधीक्षक भीमसेन मुकंद ने उन्हें रिलीव नहीं किया है। अधीक्षक का कहना है कि पंकज बाबू की जगह दूसरा रिलीवर न मिलने के कारण ऐसा हुआ है। वहीं, जेल सूत्रों के अनुसार, काफी समय से जेल में जमे होने के कारण पंकज बाबू की जेल पर अच्छी पकड़ है और उनके इशारे पर बंदियों से जमकर धन उगाही की जाती है।
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फरार बंदी अंकित और शिवा उर्फ डिंपी
- फोटो : amar ujala
सूत्रों का यहां तक कहना है कि जेल में आने वाले बंदियों की हैसियत पता कर, हैसियत के हिसाब से 25 हजार से 50 हजार रुपये वसूले जाते हैं, जिन्हें अधीक्षक और बाबू आपस में बांट लेते हैं। इसके अलावा, मलाईदार पोस्ट पर उन्हीं बंदी रक्षकों को ड्यूटी पर लगाया जाता है जो उनके करीबी होते हैं। मिलाई के लिए आने वाले कैदियों से भी पैसे लेकर आपस में बांट लिए जाते हैं। यह सब जानकारी अधीक्षक को होने के बावजूद कोई कार्रवाई न हुई, उनकी मिलीभगत की ओर इशारा करता है। लिपिक पंकज का कहना है कि उनके ऊपर अनर्गल आरोप लगाए जा रहे हैं, जबकि उनका इस प्रकरण से कोई लेना देना नहीं है।
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माइक लेकर गाना गाते जेल अधीक्षक भीमसेन मुकुंद
- फोटो : amar ujala
अभी भी वॉच टॉपर सूने, सीसीटीवी कैमरे भी हो जाते बंद
जलाजाबाद जेल से दो बंदियों के भागने के बाद भी जेल प्रशासन सजग नहीं है। जेल के मुख्य गेट पर 24 घंटे पहरा रहता है, इसके बावजूद बुधवार को कोई बंदी रक्षक जेल गेट पर नजर नहीं आया। वहीं, जेल के चारों तरफ बने चार वाच टावर भी खाली पड़े रहे और अभी तक उन पर किसी की ड्यूटी नहीं लगाई गई है। घटना के समय यदि वाच टावरों पर कर्मचारी तैनात होते, तो शायद यह घटना रोकी जा सकती थी। जिला जेल में बिजली जाने के बाद सप्लाई के लिए बड़ा जनरेटर और इनवर्टर की सुविधा उपलब्ध है। इसके बावजूद, सीसीटीवी कैमरों को जनरेटर या इनवर्टर से नहीं जोड़ा गया है। यदि बिजली जाने के बाद जेनरेटर चालू होता, तो सभी कैमरे क्रियाशील रहते और घटना के समय की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा सकता था।
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जिला कारागार में जश्न के दौरान नाच रहा बंदी रक्षक
- फोटो : amar ujala
अधीक्षक पर अदालत की अवमानना का भी आरोप
जिला जेल अधीक्षक भीमसेन मुकंद पर अदालत के आदेश की अवमानना करने का भी मुकदमा चल रहा है। नवाब सिंह यादव के छोटे भाई वीरपाल यादव उर्फ नीलू के जेल स्थानांतरण पर तत्कालीन विशेष न्यायाधीश गैंगस्टर एक्ट अजय कुमार श्रीवास्तव ने रोक लगाई थी। न्यायालय के आदेश को दरकिनार कर जेल स्थानांतरण किए जाने पर 30 मई 2025 को जेल अधीक्षक के विरुद्ध न्यायालय के आदेश की अवमानना के संबंध में फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम में मुकदमा चल रहा है।
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कारागार परिसर में नए साल की पार्टी में शामिल लोग
- फोटो : amar ujala
बंदी से ही कटवाई गई चहारदीवारी की सरिया
दो बंदियों के फरार होने के बाद भी जेल प्रशासन अब भी लापरवाह है। बुधवार को चहारदीवारी के ऊपर निकली पिलर की सरिया को कटवा दिया गया। खास बात है कि इसको काटने के लिए भी एक बंदी को ऊपर चढ़ाया गया था। नीचे दो पुलिस कर्मी डंडा लेकर खड़े थे। यदि सरिया काटने की बजाय वह बंदी दूसरी तरफ कूदकर खेतों के रास्ते भाग जाता तो कौन जिम्मेदार होता। खेत की तरफ किसी पुलिस कर्मी की ड्यूटी नहीं लगाई गई थी। चहारदीवारी पर निकलीं सभी सरिया को कटवा दिया गया है। जेल कर्मियों ने बाहर से मिस्त्री न बुलाकर एक बंदी से ही उसे कटवाना मुनासिब समझा।
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कन्नौज जिला कारागार
- फोटो : amar ujala
जेल में ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड को कमांडेंट ने किया निलंबित
जिला कारागार में बैरक के बाहर ड्यूटी पर तैनात होमगार्ड अलीजान को कमांडेंट मनोज शुक्ला ने बुधवार की शाम को निलंबित कर दिया। उन्होंने बताया कि जेल प्रशासन से एक पत्र आया था, जिसमें बताया गया कि फरार बंदी अंकित व शिवा उर्फ डिंपी जिस बगिया में काम करते थे, वहां होमगार्ड अलीजान की ड्यूटी लगाई थी। उसने अपनी ड्यूटी का सही तरीके से निर्वहन नहीं किया, जिसके चलते दोनों बंदी फरार हो गए। कमांडेंट ने बताया कि लापरवाही के आरोप में होमगार्ड को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। अब उसकी जांच कराई जाएगी।
यह एक संयोग है, लापरवाही भी हुई है। शासन ने जेलर, डिप्टी जेलर व तीन बंदी रक्षकों को निलंबित कर दिया है। अब डीआईजी जेल जांच कर रहे हैं। जेल में सभी व्यवस्थाओं को सुधारने का वह प्रयास कर रहे हैं, फिर भी आरोप लगाए जा रहे हैं। स्टाफ की कमी के कारण बंदियों और कैदियों की सुरक्षा में दिक्कत हो रही है। इसके लिए वह लगातार शासन को पत्राचार कर रहे हैं।-भीमसेन मुकुंद, जेल अधीक्षक