बिकरू कांड के अपराधी विकास दुबे बेशकीमती विवादित भूमि को औने-पौने दाम में खरीद लिया करता था, घटना के तीन माह बाद ऐसी विवादित संपत्तियों का मिलना आज भी जारी है। नया मामला तहसील क्षेत्र के सकरवां राजस्व गांव का है। जहां विकास दुबे ने अपने गैंग के दम पर एक विवादित कृषि योग्य भूमि सर्किल रेट से भी कम दामों पर खरीद ली थी।
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गैंगस्टर जय बाजपेई और विकास दुबे
- फोटो : amar ujala
मिलजुमला जमीन होने के कारण उसका मामला आज भी कई अदालतों में विचाराधीन है। वहीं विकास दुबे के अंत के बाद मुकदमा लड़ रहे लोगों ने उक्त जमीन पर अपना फिर से कब्जा कर लिया है जिसकी शिकायत पर राजस्व अधिकारियों ने कोर्ट के निर्णय आने तक भूमि को परती रखने की बात कही है।
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विकास दुबे कांड
- फोटो : amar ujala
तहसीलदार अवनीश कुमार ने बताया कि कुछ वर्ष पहले बिकरू निवासी विकास दुबे ने सकरवां राजस्व गांव में एक मिलजुमला भूमि में विवाद के बाद एक काश्तकार शशिकांत उर्फ पिंटू दुबे जो वर्तमान में उन्नाव जिले के ब्रम्हनगर मोहल्ला के निवासी हैं से खरीदी थी, भूमि का हिस्सा फाट न होने के कारण इसके अन्य काश्तकार न्यायालय की शरण में चले गए थे, जिसका वाद अब भी विचाराधीन है।
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विकास दुबे
- फोटो : अमर उजाला
कुछ अभिलेखों में यह भूमि विकास दुबे के नाम भी दर्ज हो गई है। लेकिन विकास दुबे काउंटर में मार दिए जाने के बाद उक्त भूमि के सहखातेदार और अन्य लोगों द्वारा कब्जा कर उसमें फसल बोए जाने की शिकायत की गई है। राजस्व निरीक्षक रामलखन और लेखपाल को स्थलीय निरीक्षण के आदेश दिए गए हैं।
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न्यायिक आयोग की टीम कर रही है जांच
- फोटो : अमर उजाला
क्योंकि अभी मामला कोर्ट में विचाराधीन है इसलिए उक्त भूमि के सभी अभिलेख एकत्र किए जा रहे हैं। भूमि पर यथास्थिति बनाए रखने के लिए कहा गया है। इससे पूर्व इसी भूमि की कई बार खरीद बिक्री हुई, जिसमें कब्जा के लिए सभी पक्ष अपना-अपना वाद प्रस्तुत कर रहे हैं।
सखरेज राजस्व क्षेत्र के कानून गो रामलखन ने बताया कि बिकरू, भीटी गांव निवासी गफ्फूर, बल्लू, रहीश, मुस्तकीम और अजीमुल ने एसआईटी टीम के सामने विकास दुबे और उसके गैंग सदस्यों द्वारा पट्टा हुई कृषि योग्य भूमि पर कब्जा की शिकायत की थी। आलाधिकारियों से मिले निर्देशों के बाद उक्त सभी शिकायतकर्ताओं को पैैमाइश के बाद उनकी पट्टाशुदा भूमि कब्जा करा दी गई है। उक्त भूमि के समीप ही कई लोग पट्टा भूमि को जोते हुए थे।