सुप्रीम कोर्ट के एससी/एसटी अत्याचार निरोधक कानून के तहत तत्काल एफआईआर और गिरफ्तारी पर रोक के बाद घमासान मचा है। फैसले के पक्ष और विपक्ष में कई तरह के तर्क दिए जा रहे हैं। ‘अमर उजाला’ ने कानपुर में दलित उत्पीड़न के मामलों की पड़ताल की। दलित उत्पीड़न के मामले सुनने के लिए कानपुर शहर में विशेष न्यायाधीश एससी, एसटी एक्ट कोर्ट है। इस कोर्ट ने एक साल में 21 मुकदमों में फैसला सुनाया। इसमें आठ मुकदमों में अभियुक्त दोषमुक्त साबित हुए। 13 मुकदमों में सजा सुनाई गई। इसके अलावा एक साल में छह मुकदमे पुलिस विवेचना में झूठे पाए गए। इसलिए पुलिस ने निचली कोर्ट में ही फाइनल रिपोर्ट लगा दी। प्रदेश सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में दलित उत्पीड़न के शिकार 273 पीड़ितों को तीन करोड़ 59 लाख 34 हजार रुपये मुआवजा बांटा। मुआवजा लेने वालों में पिछले सालों के पीड़ित भी शामिल रहे।
विज्ञापन
दो मामलों में दलित के खिलाफ ही दलित उत्पीड़न
डेमो पिक
पुलिस ने विवेचना में छेड़खानी, मारपीट, दलित उत्पीड़न का सचेंडी थाने में दर्ज कराया बीना कनौजिया का मुकदमा झूठा पाया। मारपीट, गाली-गलौज, दलित उत्पीड़न का कोतवाली से दर्ज नीलू और कल्याणपुर से दर्ज ओम प्रकाश का मुकदमा झूठा पाया। कुल आठ मुकदमों में पुलिस ने विवेचना कर फाइनल रिपोर्ट लगाई। इनमें से दो मुकदमों की विवेचना में खुलासा हुआ कि दलित ने दलित के ही खिलाफ मुकदमे दर्ज करा दिए थे।
कोर्ट में गवाहों के मुकरने से छूट जाते मुकदमे
डेमो पिक
अभियोजन अधिकारी राजेश शुक्ला ने बताया कि दलित उत्पीड़न के औसतन 40 फीसदी मुकदमे छूट रहे हैं। 60 फीसदी मुकदमों में सजा हो रही है। एक साल में कोर्ट ने 21 मुकदमों में फैसला सुनाया। इसमें आठ मुकदमे पीड़ितों और अन्य गवाहों के मुकरने के कारण छूट गए। रिपोर्ट दर्ज कराने वाले ही जब कोर्ट में मुकरते हैं तो मुकदमा कमजोर हो जाता है। हाल ही में राजरानी द्वारा दर्ज कराया गया मारपीट, गाली-गलौज, दलित उत्पीड़न का मुकदमा छूट गया। कोहना थाने से दर्ज सरकार बनाम राजेश पाठक और अन्य को गैंग रेप में उम्र कैद की सजा सुनाई गई। इसमें पीड़िता के साथ ही अन्य गवाह अदालत में मजबूती से खड़े रहे।
273 पीड़ितों को 3.59 करोड़ मुआवजा
डेमो पिक
भाजपा सरकार ने दलित उत्पीड़न पर मुआवजा राशि बांटने को खजाने की झोली खोल दी। अपने एक साल के कार्यकाल में योगी सरकार ने मार्च 2017 से मार्च 2018 तक प्रदेश में 273 पीड़ितों को तीन करोड़ 59 लाख 34 हजार रुपये मुआवजा बांटा। पहले दलित परिवार के कमाऊ व्यक्ति की हत्या पर पांच लाख रुपये मुआवजा मिलता था। 14 अप्रैल 2016 को केंद्र सरकार ने दलित उत्पीड़न पर मुआवजा बढ़ा दिया। कमाऊ व्यक्ति की हत्या पर आठ लाख 25 हजार रुपये मुआवजा कर दिया। अन्य उत्पीड़न पर भी मुआवजा राशि बढ़ाई। पिछले वित्तीय वर्ष में 273 दलितों को उत्पीड़न पर मुआवजा बांटा गया। इसमें हत्या पर 17, रेप पर 25 और अन्य प्रकार के अत्याचार के मामलों में 231 दलितों को मुआवजा राशि बांटी गई। समाज कल्याण अधिकारी अमरजीत सिंह का कहना है कि पिछले वित्तीय वर्ष में बांटी गई मुआवजा राशि उससे पहले के साल के पीड़ित व्यक्ति भी शामिल रहे।
इस तरह मिलता मुआवजा
डेमो पिक
हत्या-दलित परिवार के कमाऊ व्यक्ति की हत्या पर आठ लाख 25 हजार रुपये मिलते हैं। गैर कमाऊ या नाबालिग की हत्या पर चार लाख 12 हजार 500 रुपये मुआवजा मिलता है। आधी मुआवजा राशि रिपोर्ट दर्ज होने पर और आधी राशि चार्जशीट दाखिल होने पर मिलती है।
गैंगरेप-पीड़िता को गैंगरेप पर चार लाख रुपये मुआवजा मिलता है। रेप पर दो लाख रुपये मुआवजा दिया जाता है। आधी राशि रिपोर्ट दर्ज कराने पर और आधी राशि चार्जशीट दाखिल होने पर दी जाती है।
मारपीट और गाली-गलौज-मारपीट और गाली गलौज पर एक लाख रुपये मुआवजा है। रिपोर्ट लिखाने पर 10 फीसदी राशि, चार्जशीट दाखिल होने पर 25 फीसदी और शेष राशि मुकदमे में फैसला आने पर मिलता है।
पेंच-रिपोर्ट लिखाने के बाद कोर्ट में मुकदमा आने पर समझौता होने या मुकदमा हारने पर पीड़ित को दी गई मुआवजा राशि वापस नहीं होती है।
डेमो पिक
कानपुर जिला शासकीय अधिवक्ता (फौजदारी) संतोष यादव ने बताया कि दलित उत्पीड़न के मामलों में सजा का ग्राफ हर साल 50 से 60 फीसदी ही रहता है। ज्यादातर मामलों में पीड़ित समझौता कर लेते हैं या फिर मुकदमे के ट्रायल में रुचि नहीं लेते हैं। इससे सजा का ग्राफ नहीं बढ़ पाता है।
2007-08 में प्रदेश में बसपा की सरकार आई थी। उसके पहले साल के कार्यकाल में 207 लाभार्थियों को 41 लाख रुपये मुआवजा राशि बांटी गई थी। वित्तीय वर्ष 2011-12 में प्रदेश में सपा की सरकार आई। उस समय सपा को वित्तीय वर्ष के दो माह ही मिले थे। तब पूरे वित्तीय वर्ष में 284 लाभार्थियों को 37.50 लाख रुपये मुआवजा राशि बांटी गई थी। इसके बाद 2012-13 में सपा सरकार में 230 लाभार्थियों को 59.97 लाख रुपये मुआवजा बांटा गया था। इन सभी वर्षो में बालिग की हत्या पर दो लाख रुपये और नाबालिग की हत्या पर एक लाख रुपये मिलते थे। रेप पर पीड़िता को 50 हजार रुपये मुआवजा था। मारपीट और गाली पर 25 हजार रुपये मुआवजा मिलता था।