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महिला दिवस: बच्चे रहते पालना गृह में, महिलाएं करती हैं ये काम, इनके योगदान से अपराजित है देश की शान

Thu, 07 Mar 2019 06:56 PM IST
प्रभापुंज मिश्रा अमित अवस्थी, अमर उजाला, कानपुर
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नारी शक्ति का डंका रक्षा क्षेत्र में भी बज रहा है। कानपुर में 1941 से कैंट में स्थापित आयुध पैराशूट निर्माणी (ओपीएफ) में वर्तमान में 59 महिलाएं कार्यरत हैं। कभी सेना के जवानों के लिए वर्दी सिलने वाली ये महिलाएं अब मिग-21 जैसे लड़ाकू विमानों के लिए पैराशूट बना रही हैं। महिलाओं को तनावमुक्त माहौल देने के लिए पिछले साल ही यहां पालना गृह शुरू किया गया है। करीब 25 महिलाएं अपने बच्चों को यहां रखकर बेफिक्र होकर काम करती हैं।
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रक्षा क्षेत्र की निर्माणियों मेें शहर की ओपीएफ इकलौती ऐसी इकाई है, जहां महिलाओं के लिए अलग से सेक्शन है। सी-तीन नाम के इस लेडीज सेक्शन में ये महिलाएं काम करती हैं। करीब तीन साल पहले तक सभी महिलाएं सेना के जवानों के लिए शर्ट और ट्राउजर सिलती थीं। इसी बीच सरकार ने इन उत्पादों को नॉनकोर आइटम (वो उत्पाद जो सेना के जवान खुले बाजार या किसी प्राइवेट कंपनी से भी खरीद सकते हैं) घोषित कर दिया।
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इसके बाद निर्माणी प्रबंधन के सहयोग से महिलाओं ने मिग-21 जैसे लड़ाकू विमानों के लिए ब्रेक पैराशूट बनाने की तकनीक सीखी। निर्माणी की डीजीएम प्रतीक्षा सैनी और जूनियर वर्क्स मैनेजर किरन राजपाल ने बताया कि बेहतर ट्रेनिंग और ऊंचे मनोबल के कारण ही महिलाएं उच्च क्षमता युक्त अलग-अलग पैराशूटों का निर्माण कर रही हैं। कभी सिंगल निडल (पिन) की सहायता से उत्पादों को बनाती थी। अब जिग-जैग और सेमी हैवी मशीनों को चला रही हैं। उन्होंने बताया कि पिछले साल ही शुरू किए पालना गृह में एक साथ 29 बच्चों की देखभाल की व्यवस्था है। दो केयरटेकर हैं। 

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महिलाएं ये पैराशूट बनाती हैं
मिग-21 लड़ाकू विमान के  ब्रेक पैराशूट (विमान को रोकने वाला), ड्राप पैराशूट (विमान से कूदने वाला), इल्युमिनेशन पैराशूट (प्रकाश पैदा करने वाला) तैयार करती हैं। इसके अलावा विमान के थिंबल कवर भी तैयार करती हैं। 
 
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सात महीने पहले ही चेन्नई स्थित आयुध निर्माणी से ओपीएफ में ट्रांसफर होकर आए हैं। एक साल का बेटा है जो दिनभर पालना गृह में रहता है। बच्चे की सुरक्षा और देखभाल होने से काम करने में कोई दिक्कत नहीं होती है।
- सदफ जहां 

2014 से निर्माणी में कार्यरत हूं। नौकरी के कारण बच्चे को समय नहीं दे पाती थी। पालना गृह होने से अपने ढाई साल के बच्चे को समय भी दे पाते हैं और मन लगाकर काम भी करते हैं।
- अंजू साहू
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पति भी नौकरी करते हैं। घर में बच्चे की देखभाल करने वाला कोई नहीं है। दो साल का बेटा है। उसकी निर्माणी में बने पालना गृह में देखभाल हो जाती है। किसी भी प्रकार की टेंशन न होने के कारण बेहतर तरीके से काम कर पाते हैं।
- मीरा कुमारी

दो साल से निर्माणी में कार्यरत हैं। पांच साल का उनका बच्चा है। कभी-कभी जब घर में कोई नहीं होता है तो बच्चे को पालना गृह में छोड़कर काम करते हैं। इससे काफी सहूलियत मिलती है।
- दीप्ति यादव
 
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निर्माणी के उच्च पदों पर भी महिलाएं
निर्माणी में प्रशासन से लेकर प्लानिंग करने वाली महिला अफसर ही हैं। प्रतीक्षा सैनी डीजीएम प्लानिंग हैं। जो निर्माणी को मिलने वाले आर्डर, आयुध निर्माणी बोर्ड से समन्वय रखने का काम देखती हैं। डॉ. ज्योति त्रिवेदी सीनियर मेडिकल आफीसर हैं। इसी तरह आइशा खान प्रशासनिक अधिकारी हैं। पूजा भट्ट निर्माणी में वित्त और ऑडिटर जैसा महत्वपूर्ण विभाग संभाल रही हैं।
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