देश की तीनों सेनाओं की सूचना तकनीक अब और हाईटेक होगी। इस हाईटेक तकनीक को देश में ही तैयार किया जाएगा। शनिवार को रक्षा मंत्रालय के उत्पाद विभाग ने इसके लिए आईआईटी कानपुर के निदेशक प्रो. अभय करंदीकर की अध्यक्षता में 13 सदस्यीय कमेटी गठित की। अत्याधुनिक तकनीक को देश में ही विकसित किया जाएगा।
यह कमेटी सेना के तीनों विंग के लिए सॉफ्टवेयर डिफाइंड रेडियोस की नीति तैयार करेगी। इस नीति के अंतर्गत सूचना तकनीक का प्रयोग सेना करेगी। विशेषज्ञों के अनुसार अभी प्रयोग में लाई जा रही तकनीक पुरानी हो चुकी है। ऐसे में सुरक्षा की दृष्टि से भी काफी जरूरी है कि नई तकनीक का प्रयोग हो। कमेटी यह निर्धारित करेगी कि कैसी सूचना तकनीक सेना के तीनों विंग के लिए जरूरी है। यह कैसे तैयार हो सकती है? किन-किन देशों की मदद इसमें ली जा सकती है? तकनीक की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन प्रक्रिया आदि को भी नीति में शामिल किया जाएगा।
कमेटी में थलसेना के मेजर जनरल स्तर के अधिकारी, एयरफोर्स के वाइस एयरमार्शल रैंक के अधिकारी और नेवी के रियर एडमिरल रैंक के अधिकारियों समेत आईआईटी दिल्ली के निदेशक प्रो. रंजन बोस, आईआईटी चेन्नई के प्रो. देविड कोईपिल्लई, आईआईटी कानपुर के डॉ. आदर्श बनर्जी, डीआरडीओ, आईडीएस, भेल, एसआईडीएम, डीडीपी के भी सदस्य होंगे। कमेटी के चेयरमैन प्रो. करंदीकर ने बताया कि सूचना तकनीक को मजबूत बनाने के लिए चार सप्ताह में नीति तैयार करनी है। इसमें कई अहम बिंदुओं को शामिल किया गया है। कोशिश होगी कि ऐसी सभी तकनीकों का विकास देश में ही हो, जो सेना के लिए जरूरी है। इसलिए नीति में भी ऐसा ही प्रावधान किया जाएगा।