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जानिए किस वजह से ट्रेनों को छोड़ बसों पर बढ़ रहा यात्रियों का भरोसा, ये तथ्य चौंका देंगे

Tue, 04 Sep 2018 03:14 PM IST
सुहैल खान, अमर उजाला, कानपुर

सार

- तीन से चार घंटे की बजाय दो घंटे में लखनऊ पहुंचना बेहतर
- किराया महंगा लेकिन जल्दी पहुंचने को कर रहे बस का सफर
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लखनऊ रूट की ट्रेनों की लेटलतीफी देख लखनऊ से कानपुर के बीच अप डाउन करने वाले डेली पैसेंजरों का भरोसा ट्रेनों पर कम हो रहा है। जबकि रोडवेज बसों पर भरोसा बढ़ा है। पिछले छह महीने से लगातार बसों से लखनऊ जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ी है।

हालांकि इन दिनों रोडवेज बसों की एमएसटी न बन पाने से परेशानी है। इसलिए यात्रियों को रोजाना टिकट लेकर आना जाना पड़ रहा है। वहीं जनरथ एसी बसों को भी अच्छे यात्री मिल रहे हैं।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- जगह-जगह ब्लॉक से ट्रेन का सफर हुआ खराब...
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लखनऊ से कानपुर के बीच का सफर हर ट्रेन इन दिनों साढ़े तीन से चार घंटे में कर रही है। आम तौर पर ट्रेनें दोनों शहरों के बीच की दूरी अमूमन डेढ़ घंटे में पूरा कर लेती थीं। अब काम को लेकर जगह-जगह ब्लॉक, जर्जर ट्रैक होने से कॉशन स्पीड और ट्रेनों की संख्या बढ़ने से आउटर पर ट्रेनों का देर तक फंसे रहना ट्रेनों की लेटलतीफी का बड़ा कारण है।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- रास्ता सुगम होने से बस का सफर आसान...
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सीओडी पुल के शुरू हो जाने से क्रॉसिंग पर ट्रेनों के आने जाने से घंटों तक जाम की स्थिति का सामना अब बसों को नहीं करना पड़ता है। आसानी से रामादेवी होते हुए बसें जाजमऊ होकर लखनऊ आती जाती हैं। इसलिए बसें दो घंटे में लखनऊ से कानपुर पहुंच जाती हैं। इसके अलावा परिवहन निगम ने यात्रियों को लुभाने के लिए सस्ते दर पर 137 रुपये में लखनऊ जाने के लिए जनरथ बसें चला दीं। इलेक्ट्रिक बस, वाल्वो और स्कैनिया एसी बसों के चलने से भी वीआईपी यात्रियों ने बसों का सफर करना शुरू कर दिया।
 
आगे की स्लाइड में पढ़ें- रेल एमएसटी 355 रुपये की तो बस की 3500 की...

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रेलवे की एमएसटी की कीमत बस से लखनऊ आने जाने वाले महीने के किराये से दस गुना कम है। रेलवे की एमएसटी 355 रुपये की है तो एक महीने के लिए बस की लखनऊ-कानपुर की एमएसटी 3500 रुपये है। जनरल बस का किराया 105 रुपये है। जबकि ट्रेन से लखनऊ तक का एक तरफ का किराया मेल का 36 रुपये और सुपरफास्ट का 66 रुपये है। कलेक्ट्रेट, बैंक, नगर निगम और केडीए समेत अन्य विभागों में काम करने वाले कर्मचारी पिछले छह महीने से ट्रेनों से कानपुर आते हैं लेकिन समय से ऑफिस नहीं पहुंच पाते हैं। ऐसे में नौकरीपेशा कर्मचारियों ने महंगा ही सही लेकिन बस का सफर करना शुरू कर दिया है।

आगे की स्लाइड में पढ़ें- लखनऊ रूट की स्थिति...  
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छह महीने पहले ट्रेन के डेली पैसेंजर- करीब 4500
अब ट्रेन से डेली यात्रा करने वाले- करीब 3800 
छह महीने पहले बस के डेली पैसेंजर- करीब 700
अब बसों से रोजाना सफर करने वाले- करीब 1100
रोजाना लखनऊ रूट की बसों की संख्या- 250

लखनऊ जाने वालों की संख्या बढ़ी है। सुबह 10 बजे के पहले शहर आने वाले और यहां से सुबह 7 बजे तक लखनऊ जाने वाले यात्री बढ़े हैं। इसमें नौकरीपेशा लोग ज्यादा हैं।
- राजीव कटियार, एआरएम, झकरकटी बस अड्डा
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