अक्सर हमेंं ऐसा लगता है कि दरवाजे पर कोई है लेकिन ऐसा होता नहीं। ये वहम है या कुछ और। विज्ञान और धर्म में हमेशा इन चीजों को लेकर बहस चलती रहती है। आज विज्ञान और धर्म के नजरिये से इस विषय हमें जानकारी दे रहे हैं पंडित विजय पांडेय और मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. उन्नती कुमार।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- क्या कहना है पंडित विजय पांडे का...
विज्ञापन
2 of 8
पंडित विजय पांडेय
पंडित विजय पांडेय ने बताया कि- अगर किसी इंसान को इस तरह की आवाजें काफी समय से सुनाई दे रही हैं तो इसका मतलब है कि उनके आस-पास कोई नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव है। कई लोग जो दिमागी तौर पर मजबूत होते हैं वो ऐसी चीजों पर ध्यान नहीं देते हैं और उन पर इस तरह की किसी भी चीज का प्रभाव नहीं पड़ता है। वहीं दूसरी ओर जो लोग जो इन चीजों से भयभीत हो जाते हैं उन पर इन चीजों का ज्यादा प्रभाव पड़ता है।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- आखिर क्यों होती है ऐसी चीजें...
विज्ञापन
3 of 8
डेमो पिक
इस तरह की नकारात्मक ऊर्जा ज्यादातर उन लोगों पर अपना प्रभाव डालती हैं जिनकी कुंडली में किसी तरह का दोष होता है। जब गृहों की चाल बदलती है, तब उस व्यक्ति के आस-पास मौजूद बुरी शक्तियां इंसान पर अपना प्रभाव डालना शुरू कर देती हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- क्या हैं बचने के उपाय...
4 of 8
डेमो पिक
इन चीजों से बचने के लिए इंसान को हमेशा पूजा-पाठ करना चाहिए। भगवान हनुमान की पूजा करने से ऐसी चीजें आपके आस-पास भी नहीं भटकेंगी। ऐसे में व्यकित को मांसाहारी भोजन छोड़ कर शाकाहारी भोजन करना चाहिए क्योंकि मास और शराब आदि चीजों की तरफ बुरी शक्तियां आकर्षित होती हैं।
अगली स्लाइड में मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. उन्नती कुमार बताएंगे कि इस पर क्या है विज्ञान का नजरिया...
विज्ञापन
5 of 8
डॉ. उन्नति कुमार
मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. उन्नती कुमार ने बताया - अगर विज्ञान के नजरिये से देखा जाए तो इस तरह की चीजों को ऑडिटरी हेलोसिनेशन कहा जाता है। यह एक तरह की बीमारी है होती है जिसका नाम स्किजोफ्रेनिया है। यह एक ऐसा रोग है जिसमें रोगी की सोच भावना और उसके व्यवहार मे गंभीर रुप से विक्रितकयां पैदा हो जाती है इस मर्ज का मरीज वास्तविकता और कल्पनाओं के बीच में अन्तर करने की क्षमता खो देता है आंकडों के अनुसार देश में एक करोड़ से अधिक पुरुष व महिलाएं इस रोग की चपेट में है।
आगे की स्लाइड मे पढ़ें- क्या हैं इस रोग के लक्षण...
विज्ञापन
6 of 8
डेमो पिक
इस मर्ज के रोगी काफी समय तक एक ही जगह पर बैठे रहते हैं और मन ही मन बुदबुदाया करते हैं। रोगी को बार-बार ऐसा लगता है कि जैसे कोई उसे बुला रहा हैऔर मारने की धमकी दे रहा है। इस मर्ज से ग्रस्त मरीज अक्सर बगैर किसी बात के हंसने और रोने लग जाते हैं। मरीज बिना किसी कारण के दूसरों पर शक करने लग जाते हैं, उसे ऐसा लगता है कि किसी नें उस पर जादू टोना कर दिया है। कभी-कभी रोगी अपना घर छोड़ कर चला जाता है और कई महीनों तक घर नहीं लौटता है।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- रोग से जुड़ी भ्रांतियां...
विज्ञापन
7 of 8
डेमो पिक
स्किजोफ्रेनिया के रोग और इलाज के साथ कई भ्रांतियां जुड़ी हुई हैं। इन भ्रांतियों के चलते आधे से अधिक रोगी इलाज से वंचित रह जाते हैं। परिजन ऐसे रोगियों को जादु-टोना कराने के लिए तांत्रिक या ओझा के पास ले जाते हैं लेकिन वास्तविकता यह है कि रोग किसी भी बुरी नजर या ग्रह दशा खराब होनें के कारण नहीं होता। मधुमेह की बीमारी की तरह ही यह मर्ज है जो हमारे मस्तिष्क में व्याप्त रसायनों की कमी के चलते होता है। कभी-कभी परिजन काम वासना की गर्मी को इस रोग का कारण मानते हैं और मरीज की शादी करवा देते हैं। इससे रोग में कोई राहत नहीं मिलती है, उल्टा समस्याएं और बढ़ जाती हैं।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- क्या हैं इस रोग के इलाज...
स्किजोफ्रेनिया के इलाज के लिए अनेक दवाइयां उपलब्ध हैं जिसके नियमित सेवन से रोगी सामान्य जीवन जी सकता है। पूर्णरुप से ठीक होने बाद दवाइयां एक निश्चित समय तक दी जाती हैं। इन दवाओं के सेवन से मरीज को कोई लत नहीं लगती है।