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सपा सरकार में गायत्री प्रजापति और सपा नेत्री के इशारों पर चलता था प्रदेश में खनन का काला कारोबार

Sat, 13 Jul 2019 08:52 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
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फतेहपुर में धड़ल्ले से नदी की धारा को मोड़ कर होता अवैध खनन - फोटो : अमर उजाला
सपा शासनकाल में फतेहपुर में मौरंग का मनचाहे तरीके से रसूखदारों ने खनन कराया। एक कारोबारी ने 2012 से 2016 के बीच मौरंग खनन से अकूत संपत्ति बनाई। इस दौरान कई बड़े चेहरे मौरंग खनन के कारोबार में कूदे। पहले उनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं था। इसी में एक विधायक का गनर भी रहा जो खनन कारोबार में शामिल होकर चंद समय में फर्श से अर्श तक पहुंच गया। 

 
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अवैध खनन का खेल - फोटो : अमर उजाला
बांदा जिले के एक विधायक की जिले की कई मौरंग खदानों में हिस्सेदारी रही है। गाजीपुर थाना क्षेत्र का एक युवक 13 साल पहले कुछ लोगों के साथ कस्बे में दबंगई करता था। उसे यमुना किनारे क्षेत्र में संचालित खदानों से किसी ने मोटी कमाई होने की जानकारी दी। युवक की खदान में हिस्सेदारी के लिए बांदा के विधायक से सीधे तनातनी हो गई थी। गोलियां भी चली थी।

 
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नदी की धारा में होता खनन - फोटो : अमर उजाला
किसी तरह से समझौता हुआ। दोबारा 2011 में पट्टे हुए। उसने फिर से विधायक के काम में रोक लगाई। विधायक ने दांव चला और काम की देखरेख में उसे हिस्सेदार बनाया। इतना ही नहीं विधायक ने उसे अपना गनर तक बना लिया। युवक के परिवार में केवल 12 बीघे खेत थे। वह विधायक का जिले में फैला मौरंग का नेटवर्क संभालने लगा। 2012 में सपा सरकार आई।

 

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अवैध खनन - फोटो : अमर उजाला
तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रजापति से सीधे कनेक्शन में जुड़ी सपा नेत्री के संपर्क में आया। उसने सपा नेत्री के सहारे मंत्री के इशारे पर जिले और बांदा की मौरंग खदानों में हिस्सेदारी पा ली। सूत्रों के अनुसार मंत्री का जिले और बांदा से मौरंग खदानों से होने वाली वसूली को पहुंचाने का भी काम किया। मौरंग खंड की अकूत संपत्ति इकट्ठा की।

 
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अवैध खनन - फोटो : अमर उजाला
खुद का एक नाम से बड़ा ग्रुप बनाया है। जिले में वर्तमान समय में संचालित होने वाली खदानों में भी उसकी हिस्सेदारी है। गांव से शहर में पांच साल पहले बंगला, लग्जरी कार खड़ी हो गई। अप्रत्यक्ष रूप से उसे मौरंग माफिया के रूप में जाना जाता है। डेढ़ साल पहले सीबीआई की पूछताछ में भी पहुंचा था। हालांकि सीबीआई ने प्रमाणिकता वाले साक्ष्य नहीं पाए।
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