उड़ने वाली टैक्सी (एयर टैक्सी) बनाने के लिए विटॉल एविएशन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड की तरफ से आईआईटी कानपुर को 15 करोड़ रुपये दिए जाएंगे। इस बाबत बीते शनिवार को कंपनी और आईआईटी कानपुर के बीच अहम समझौता हो गया। करार के तहत पांच साल तक आईआईटी कानपुर के विशेषज्ञ वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (विटॉल) तकनीक पर काम करके एयर टैक्सी तैयार करेंगे।
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निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने इस समझौते को इनोवेशन के क्षेत्र में बेहतरीन कदम बताया। उन्होंने कहा कि नए इनोवेशन के लिए संस्थान को आर्थिक मदद की जरूरत होती है। ऐसे में अगर निजी क्षेत्र की कंपनियां इसी तरह से आगे आएंगी तो अच्छे रिसर्च और इनोवेशन पर विशेषज्ञ अच्छे से काम कर पाएंगे। जिसका सीधा असर आम जनता और देश के विकास पर पड़ेगा।
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100 छात्रों की टीम करेगी काम
प्रो. करंदीकर ने बताया कि इस प्रोजेक्ट पर एयरोस्पेस विभाग के अध्यक्ष प्रो. एके घोष की अगुवाई में 100 छात्रों की टीम काम करेगी। विशेषज्ञ इसका ढांचा तैयार करने में जुट गए हैं। जल्द ही इसका सकारात्मक परिणाम भी देखने को मिलेगा।
क्या है विटॉल
वर्टिकल टेकऑफ एंड लैंडिंग (विटॉल) एक ऐसी तकनीक है जिसके जरिए हेलीकॉप्टर कहीं पर भी लैंडिंग कर सकता है और कहीं से भी उड़ान भर सकता है। इसका डिजाइन जनसमस्याओं को देखते हुए तैयार किया जा सकता है। अभी विटॉल हेलीकॉप्टर का प्रयोग सेना करती है। इसमें फ्यूल के साथ-साथ बैट्री का भी प्रयोग किया जा सकता है।