आईआईटी कानपुर का नाम उत्कृष्ट संस्थानों की सूची में शामिल न होने पर शुरू हुआ ‘सोशलवॉर’
Tue, 11 Dec 2018 03:27 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
सार
- आईआईटी के प्रोफेसरों और पूर्व छात्रों ने एमएचआरडी के खिलाफ खोला मोर्चा
- जुलाई में आई सूची में भी यूजीसी के पैनल ने आईआईटी का नाम नहीं किया था शामिल
- उत्कृष्ट संस्थान को पांच साल के लिए मिलता है एक हजार करोड़ का अनुदान, कई और सुविधाएं भी
‘इंस्टीट्यूट ऑफ इमीनेंस’ (उत्कृष्ट संस्थान) के लिए भेजी जाने वाली संस्थानों की सूची में आईआईटी कानपुर का नाम शामिल न किए जाने पर कई सीनियर प्रोफेसर और पूर्व छात्रों ने नाराजगी जताई है। सोशल मीडिया पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय (एमएचआरडी) के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।
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पूरी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए इन लोगों ने कहा है कि जुलाई में भी संस्थान की अनदेखी की गई थी। उत्कृष्ट संस्थान की सूची मंत्रालय से जारी होती है। इस सूची में आने के बाद संस्थान को अतिरिक्त बजट के साथ ही कई मामलों में स्वायत्तता भी मिल जाती।
इंस्टीट्यूट के कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के सीनियर प्रोफेसर डॉ. धीरज सांघी ने ब्लॉग पर लिखा है कि आईआईटी की गिनती दुनिया के टॉप-500 संस्थानों और देश के टॉप-5 संस्थानों में होती है। इसके बावजूद इसे उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा न देना पूरा प्रक्रिया पर सवाल उठाता है। दूसरी बार संस्थान की अनदेखी करना शर्मनाक है।
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आईआईटी कानपुर
प्रो. सांघी ने बताया कि अगर आईआईटी को यह दर्जा मिल जाता है तो आने वाले 10 सालों में दुनिया के टॉप-100 शिक्षण संस्थानों में यह शामिल हो सकता था। यहां के शिक्षकों और छात्रों में जबरदस्त काबिलियत है।
पूर्व छात्र दीपांकर सरकार ने कहा कि अगर ऐसे ही फैसले होते रहे तो लोगों का सरकार पर से विश्वास उठ जाएगा। ईरान में भारतीय दूतावास में कार्यरत पूर्व छात्र सौरभ कुमार ने आईआईटी प्रशासन को संस्थान में हो रहे बेहतर कामों को दुनिया में प्रचारित करने की सलाह दी है।
छात्र यश कुमार ने कहा कि देश के कई उच्च पदों पर इसी आईआईटी के पूर्व छात्र है। सभी पूर्व छात्र संस्थान की बेहतरी के लिए पहल करें।
आईआईटी कानपुर
यह है पूरा मामला
मोदी सरकार में इसी साल से एमएचआरडी ने ‘इंस्टीट्यूट ऑफ इमीनेंस’ (उत्कृष्ट संस्थान) की चयन प्रक्रिया शुरू की है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) का एक पैनल तय मानकों के आधार पर संस्थानों के नाम मंत्रालय को भेजता है। वहीं से सूची जारी होती है।
पहली सूची जुलाई में जारी हो चुकी है। दूसरी सूची जारी होने वाली है। पैनल ने मंत्रालय को 19 उच्च शिक्षण संस्थानों की सूची सौंपी है। कमेटी ने 12 प्राइवेट और सात सरकारी संस्थानों के नाम प्रस्तावित किए हैं। इस पैनल की अध्यक्षता पूर्व चीफ इलेक्शन कमिश्नर एन गोपालस्वामी ने की है। आईआईटी का नाम न होने से प्रोफेसरों और पूर्व छात्रों में नाराजगी है।
ये बन चुके उत्कृष्ट संस्थान
जुलाई में एमएचआरडी ने आईआईटी दिल्ली, आईआईटी बांबे, आईआईएमसी बेंगलूरू, जियो इंस्टीट्यूट, मणिपाल यूनिवर्सिटी, बिट्स पिलानी को उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा दिया था। आईआईटी मद्रास, आईआईटी खड़गपुर, दिल्ली यूनिवर्सिटी, जादवपुर यूनिवर्सिटी, अन्ना यूनिवर्सिटी का नाम भी भेजा गया था।
उत्कृष्ट संस्थान का दर्जा मिलता तो...
- मंत्रालय की ओर से एक हजार करोड़ रुपये पांच साल के लिए मिलते। इस राशि का इस्तेमाल संस्थान की बेहतरी में होता।
- नया कोर्स शुरू करने के लिए यूजीसी की अनुमति की जरूरत नहीं पड़ती।
- शिक्षक भर्ती, विदेश से फैकल्टी बुलाने समेत कई मामलों में स्वायत्तता मिल जाती। मतलब आईआईटी प्रशासन कई निर्णय खुद ले सकता।