छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में शहीद बांदा जिले के लामा गांव के लाल का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। अंतिम संस्कार के समय दृश्य उस समय बेहद मार्मिक हो गया जब शहीद की विधवा नंदनी ने ताबूत में रखे अपने पति का चेहरा देखकर अंतिम दीदार किए। उसके मुख से चीख निकल गई- कैसे जियूंगी तुम्हारे बिना। उसे महिला कांस्टेबिल और परिवार व गांव की महिलाओं ने संभाला।
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पति के पार्थिव शरीर से लिपट कर पत्नी नंदनी की निकली चीख
- फोटो : amar ujala
उधर, बूढ़ी मां कैलशिया ने होनहार जवान बेटे और कमाऊ पूत का चेहरा चूम लिया और बेसुध हो गई। उन्हें भी अन्य महिलाओं ने सहारा दिया। इनके अलावा शहीद के छोटे भाई विनय और प्रकाश तथा दादा दातादीन व डा. गोपाल भूषण ने भी जांबाज जवान के अंतिम दर्शन कर श्रद्धांजलि दी।
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गांव के लाल का आखिरी दीदार
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पत्नी ने एचटी लाइन पकड़कर की जान देने की कोशिश
शादी के मात्र साढे़ 11 माह बाद विधवा हो गई नंदनी पति के वियोग में पूरी तरह विचलित है। अंतिम संस्कार के कुछ पहले उसने घर के दरवाजे पर काफी नीचे लटक रही हाईटेंशन लाइन को पकड़कर जान देने की कोशिश की। घर वालों ने उसे संभाला। पति के पार्थिव शरीर वाले ताबूत पर पुष्पचक्र अर्पित किए। गौरतलब है कि 23 फरवरी (2019) को नंदनी ने विकास कुमार के गले में वरमाला पहनाई थी। शादी की पहली सालगिरह से पहले ही पति के पार्थिव शरीर पर पुष्पचक्र चढ़ाते समय बेहोश हो गई।
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शहीद के अंतिम दर्शन को उमड़ा हुजूम
- फोटो : amar ujala
सीआरपीएफ अफसरों ने दिया सहयोग का भरोसा
शहीद की पत्नी, मां और परिजनों को सीआरपीएफ टीम में आए अफसरों और जवानों ने भरपूर सांत्वना दी। उन्हें भरोसा दिलाया कि केंद्रीय सुरक्षा बल उनके सुख दुख में साथ है। बल को विकास कुमार की शहादत पर गर्व है। आरएएफ के असिस्टेंट कमांडर विक्रम प्रताप सिंह ने शहीद के भाइयों को अपना मोबाइल नंबर भी दिया। कहा कि किसी भी जरूरत पर उन्हें कॉल करें।
मुखाग्नि दे रहे ताऊ की बिगड़ी तबियत
जवान बेटे की चिता को मुखाग्नि देने से पहले ही बूढे़ ताऊ दातादीन के पैर डगमगा गए। हिम्मत जवाब दे गई। तबियत बिगड़ गई। लोगों ने तत्काल उन्हें संभाला और अलग ले जाकर बैठाया। बाद में शहीद के छोटे भाई विनय ने मुखाग्नि दी।