विजयदशमी के मौके पर कार्य सिद्धि का पूजन विजय काल में फलदायी रहेगा। शुक्रवार को विजय काल दोपहर 1:58 से 2:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान प्रार्थना कर शमी वृक्ष की कुछ पत्तियां तोड़े और उन्हें घर के पूजाघर में रख दें। लाल कपड़े में कुछ अक्षत, एक सुपाड़ी के साथ इन पत्तियों को बांध लें। इसके बाद इस पोटली को गुरु या बुजुर्ग से प्राप्त करें और प्रभु राम की परिक्रमा करें।
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परिक्रमा करते समय जो समस्या है उसे याद करतें रहें। इसके बाद इस पोटली को अपने पास रख लें। कानपुर में पद्मेश इंस्टीट्यूट ऑफ वैदिक साइंसेस के संस्थापक केए दुबे पद्मेश ने बताया कि विजयदशमी के दिन नीलकंठ के दर्शन शुभ होते हैं।
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दशहरे पर अशमंतक अर्थात कचनार का वृक्ष लगाने का विशेष महत्व है। इसकी नियमित पूजा से परिवार में सुख-शांति आती है। अपराजिता के पूजन का भी महत्व है।
आत्मविश्वास की कमी होने पर अपराजिता की पत्तियों को हल्दी से रंगे, दूर्वा और सरसों को मिलाकर एक डोरा बना लें और उस डोरे को दाहिने हाथ में बांध लें। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है। ऐसा उल्लेख ग्रंथों में है।