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इस बार होली सुकर्मा योग में, पांच राशि वाले इन बातों का रखें ध्यान  

Wed, 28 Feb 2018 11:55 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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होली
इस बार होलिका दहन 1 मार्च को सुकर्मा योग में मघा/पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र में होगा। भद्रा पूरी होने के बाद किया गया होलिका दहन लाभप्रद होगा। आचार्य आदित्य पांडेय और पंडित पवन तिवारी ने बताया कि भद्रा एक मार्च को रात 7:37 बजे पूरी होगी। 7:38 बजे के बाद से 8 बजे तक होलिका दहन लाभप्रद होगा। 
 
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होली
होलिका दहन एक हवन है 
होलिका दहन वास्तविक में एक हवन है। इसके माध्यम से हम अपनी नकारात्मक ऊर्जा और रोग का दहन करते हैं। इसलिए अक्सर होलिका दहन में उपाय भी किए जाते हैं। ऐसी मान्यता है कि इन उपायों का प्रयोग करने से 108 गुना लाभ मिलता है। साथ ही पाप ग्रहों से शांति भी मिलती है। होलिका दहन का लाभ लेने के लिए अलग-अलग राशियों के उपाय निम्न हैं।
 
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होली
मेष-खैर की लकड़ी व लाल धागा अपने घर की देहरी की लंबाई के बराबर नापकर होलिका में अर्पित करें
वृष-गूलर के पत्ते तथा फिटकरी को होलिका में अर्पित करें
मिथुन-हरा धागा और लट जीरा के पत्ते को होलिका में डालें
कर्क-सफेद तिल और पलाश के पत्ते डालें

 

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होली
सिंह-मदार का सूखा फूल अथवा मदार की लकड़ी होलिका में अर्पित करें
कन्या-पांच जायफल व अपनी लंबाई का 5 गुना धागा नापकर डालें
तुला-गूलर के सूखे फूल अथवा गूलर की लकड़ी अर्पित करें
वृश्चिक-खैर की लकड़ी एवं सूखे लाल पुष्प होलिका में डालें
 
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होली
धनु-पीपल की लकड़ी व 30 हल्दी की गांठ डालें
मकर-शमी की लकड़ी एवं 8 अंजुली काला तिल डालें
कुंभ-शमी की सूखी पत्ती एवं लंबाई का 8 गुना काला धागा डालें
मीन-गूलर के सूखे फल एवं टेसू के सूखे पुष्प होलिका में अर्पित करें
 
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होली
नए धान का पूजन अवश्य करें 
होलिका दहन में पुरुष होलिका दहन करते समय नए धान का पूजन अवश्य करें। ऐसी मान्यता धर्म ग्रंथों में है। महिलाओं को घर में होलिका का पूजन करते समय नए धान का पूजन करना चाहिए।
 
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होली
उपलों का महत्व  
ज्योतिष निरबंध के अनुसार सदैव प्रदोष व्यापिनी होली ही मनानी चाहिए। हेमाद्रि और मदन रत्न में भविष्य पुराण का कहना है कि इस पूर्णिमा को गोबर से लीपे हुए आंगन में यदि होलिका का हवन किया जाए तो उससे सभी प्रकार के अनिष्ट समाप्त होते हैं। वर्तमान परिपेक्ष्य में गोबर के उपले या कंडे इसीलिए होलिका दहन में अर्पित करते हैं।
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