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एचआईवी को लेकर सुर्खियों में आए दाे गांव अब इलाज के लिए 'तड़प' रहे हैं

Sun, 11 Feb 2018 07:33 PM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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उन्नाव के दाे गांव एचआईवी को लेकर सुर्खियों में हैं। कुछ द‌िनाे पहले तक गांव की अाबाेहवा कुछ अाैर थी पर अब पूरी तरह बदल चुकी है। गांव में आने वालों पर निगाह रखी जा रही है। हर कोई इस बीमारी से बचने का उपाय जानना चाहता है। तमाम लोगों ने कैंप में जांच करा ली है तो कुछ गुपचुप तरीके से जांच कराने में लगे हैं। इसके बाद भी स्वास्थ्य विभाग ने चुप्पी साध रखी है।





 
  
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एचआईवी को लेकर सुर्खियों में आए प्रेमगंज, किरमिदियापुर और चक मीरापुर की आबोहवा बदली हुई है। यहां जांच शिविर न लगाने से लोगों में गुस्सा भी है। इनका कहना है कि स्वास्थ्य विभाग जांच शिविर लगाए। इससे नए पीड़ित मिल सकते हैं, इनका समय से इलाज भी हो जाएगा। बांगरमऊ कस्बे से करीब एक किलोमीटर दूर रेलवे लाइन के किनारे बसी ग्राम पंचायत किरमिदियापुर सुविधा संपन्न है।
 
 
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यहां के रहवासियों के पक्के मकान हैं। पक्की सड़क से लेकर पेयजल की माकूल व्यवस्था है। शत प्रतिशत दलित आबादी वाली इस ग्राम पंचायत में 15 से ज्यादा सरकारी अध्यापक हैं। इस ग्राम पंचायत ने क्लर्क से लेकर डाक्टर तक दिए हैं। तमाम नौजवान बीए, बीएससी कर रहे हैं। चंद गरीब परिवार हैं। इन परिवारों के सदस्यों में ही एचआईवी पीड़ित पाए गए हैं।
 
 

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ग्रामीण इसकी वजह साफतौर पर 10 रुपये के इंजेक्शन से बीमारी मिलने की बात कहते हैं। संभव है कि यह काफी हद तक सच भी हो, लेकिन दो साल पहले इस बीमारी से जान गंवाने वाले दंपति लुधियाना में रहते थे। उनकी बेटी भी पीड़ित है। इस गांव में दो बुजुर्गों में भी एचआईवी पाया गया है। ये करीब 20 साल से 10 रुपये में इंजेक्शन देने वाले झोलाछाप से इलाज करा रहे थे।
 
 
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बातचीत के दौरान दोनों बुजुर्ग गमगीन नजर आए। बोले, पूरा जीवन यहीं काट दिया। पराए से संबंध के बारे में कभी सोचा भी नहीं। फिर भी बीमारी हो गई। वे बार-बार यही सवाल करते हैं कि उनके बच्चों को इस बीमारी से कैसे बचाया जाए। दोनों बुजुर्गों की तरह गांव के दूसरे लोगों का भी यही सवाल है कि इस बीमारी से कैसे बचा जाए? उप प्रधान दिनेश भी यही कहते हैं कि अब बात बीमारी नहीं, बल्कि इससे बचाव पर होनी चाहिए।
 
 
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स्वास्थ्य विभाग गांव में शिविर लगाए। जो लोग जांच नहीं करा पाए हैं, उनकी जांच हो। जो एचआईवी पीड़ित हैं, उनके इलाज की व्यवस्था होनी चाहिए। बीएसए की पढ़ाई कर रहे संजय भी कुछ ऐसी ही मांग करते हैं। चुन्नीलाल ने खुद की जांच करा ली है। परिवार के कुछ लोग रह रहे हैं। वह चाहते हैं कि गांव में शिविर लगे ताकि परिवार के अन्य लोगों की जांच हो सके। 
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