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हवा बनेगी जहर, ये तो सिर्फ एक Trailer है Picture अभी बाकी है

Tue, 14 Nov 2017 09:42 AM IST
हिमांशू मिश्रा, अमर उजाला कानपुर
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प्रदूषण से स्थिति इतनी खराब हो जाएगी ये शायद ही किसी ने सोचा होगा लेकिन आज स्थिति बद से बदतर हो चुकी है और आगे तो विशेषज्ञ स्थिति भी खराब होना की बात कह रहे हैं। महानगर की हवा धीरे-धीरे जहर बन रही है। जिससे लोगों के स्वास्थ्य पर गहरा असर पड़ रहा है।     
  कानपुर फैक्ट्रियों से निकलने वाले धुएं और कूड़ा जलाने से शहर में सर्वाधिक प्रदूषण हो रहा है। यह तथ्य आईआईटी कानपुर की रिसर्च से सामने आया है। रिसर्च से पता चला है कि शहर की हवा में 26 प्रतिशत प्रदूषण उद्योगों से आ रहा है और कूड़ा जलाने से 25 प्रतिशत। 15 प्रतिशत प्रदूषण पुरानी गाड़ियां फैला रही हैं। तीन प्रतिशत डीजल जनरेटर, चार प्रतिशत कंस्ट्रक्शन, 19 प्रतिशत घरेलू प्रदूषण और सड़क किनारे की गंदगी से 8 प्रतिशत प्रदूषण हवाओं में घुल रहा है। 
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आईआईटी कानपुर के शोधार्थी सार्थ के गुटीकुंडा, राहुल गोयल ओर पल्लवी पंत ने मिलकर यह रिसर्च की है। रिसर्च को एल्सएवियर जर्नल ने प्रकाशित किया है। आईआईटी कानपुर के सेंटर फॉर एनवायरमेंटल साइंस एंड इंजीनियरिंग विभाग के विशेषज्ञ प्रो. सच्चिदानंद त्रिपाठी ने बताया कि ऐसी स्थिति में अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो स्थिति और भयावह हो जाएगी। उन्होंने बताया कि इंडस्ट्री में तत्काल प्रभाव से निरीक्षण होना चाहिए और वहां प्रदूषण की स्थिति देखनी चाहिए। इस पर लगाम लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए।
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डेढ़ साल में बंद हो चुकीं 60 इंडस्ट्री 
प्रदूषण पर रोक लगाने के लिए केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड लगातार फैक्ट्री मालिकों को चेतावनी जारी कर रहा है लेकिन इसके बावजूद इसपर रोक नहीं लग पा रही। पिछले डेढ़ साल में बोर्ड ने सख्त रूख अख्तियार करते हुए शहर की 60 फैक्ट्रियों पर ताला लगवा दिया। ढाई सौ से ज्यादा बार जुर्माना लगाया गया व अन्य कार्रवाई भी हो चुकी है। करीब 700 फैक्ट्री और टेनरी को नोटिस जारी हो चुकी हैं पर अधिकतर कार्यवाही कागजी ही होती है इसलिए प्रदूषण पर लगाम नहीं कस पाती।

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हवा के साथ पानी को भी जहरीला कर रहे उद्योग  
शहर में सबसे ज्यादा टेनरी, होजरी और केमिकल इंडस्ट्री हैं। ये इंडस्ट्री हवा के साथ-साथ पानी को भी जहरीला बना रही हैं। आईआईटी शोधार्थियों की रिसर्च के मुताबिक इन इंडस्ट्री से सल्फर डाई ऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, कार्बन डाईऑक्साइड भारी मात्रा में निकल रहे हैं। इसके अलावा इन इंडस्ट्री से निकलने वाले गंदे पानी को गंगा में छोड़ दिया जाता है जिससे गंगा के साथ-साथ भूगर्भ जलभी प्रदूषित हो रहा है।
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नगर निगम का दावा खूब उठाते हैं कूड़ा 
नगर निगम प्रशासन का दावा है कि शहर से प्रतिदिन 1100 मीट्रिक टन कूड़ा निकलता है। इसमें से 1050 मीट्रिक टन कूड़ा शहर से उठाकर पनकी स्थित कूड़ा निस्तारण प्लांट पर ले जाया जाता है। यहां कूड़े से जैविक खाद बनाने का काम शुरू हुआ है। हालांकि यह काम काफी धीरे हो रहा है और कूड़े के पहाड़ लगे हुए हैं जिससे आबो-हवा जहरीली हो रही है।
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ऐसे की रिसर्च  
आईआईटी के शोधार्थियों ने कानपुर के अलावा पुणे, चेन्नई, दिल्ली, मुंबई और बंगलुरू में भी वायु प्रदूषण की जांच के लिए वहां के वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) पर लगातार एक साल तक नजर रखी। हवाओं में मिलने वाले कणों का अध्ययन कर पता लगाया कि ऐसे कण कहां-कहां मिलते हैं। सभी शहरों के अलग-अलग हिस्सों से एक्यूआई रिपोर्ट ली गई। इससे यह पता करने में आसानी हुई कि इंडिस्ट्रयल एरिया में कितना प्रदूषण है, जहां नागरिक रहते हैं वहां कितना प्रदूषण है और जहां ज्यादा कूड़ा होता है वहां की हालत क्या है। ज्यादातर एक्यूआई रिपोर्ट केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड से ही लिए गए। 
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शहर में चल रहीं इतनी गाड़ियां
वाहन                          संख्या

ऑटो-टेंपो                   12,415
मोटर साइकिल              212,803
बस                           1838
ट्रक                          28807
अन्य वाहन                  883928
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नंबर गेम

1500-शहर में फैक्ट्रियों की संख्या (टेनरी, होजरी सहित)
11 लाख 39 हजार 791- शहर में वाहनों की संख्या :
1100 - मीट्रिक टन कूड़ा (11 लाख किलो) शहर से प्रतिदिन निकलने वाला कूड़ा : 
110-शहर में वार्डों की संख्या 
72-वार्डों से द्वार से कूड़ा उठान 
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