बेहमई कांड में आज सुनवाई के दौरान एसपी अनुराग वत्स ने मूल केस डायरी न मिलने का जवाब दिया है। उन्होंने बताया है कि मूल केस डायरी न मिलने के मामले की एएसपी जांच कर रहे हैं। इसलिए दो सप्ताह का और समय दिया जाए। इसपर कोर्ट ने दो सप्ताह का समय देते हुए सुनवाई की अगली तारीख 26 फरवरी दी है।
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फूलन देवी एवं मां मूला देवी
- फोटो : अमर उजाला
14 फरवरी 1981 को डकैत फूलन देवी और उसके गिरोह ने बेहमई गांव में धावा बोलकर 20 लोगों की हत्या कर दी थी। जंटर सिंह, वकील सिंह, देव प्रयाग, कृष्ण स्वरूप, गुरुमुख सिंह और रघुवीर सिंह गोली लगने से घायल हुए थे। बेहमई गांव निवासी राजाराम सिंह ने दस्यु सुंदरी फूलन देवी समेत 35-36 डकैतों के खिलाफ थाना सिकंदरा में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
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फूलन देवी
- फोटो : अमर उजाला
वर्ष 2012 में डकैत फूलन, भीखा, पोसा, विश्वनाथ, श्याम बाबू और राम सिंह पर आरोप तय किए गए थे। मामले की सुनवाई सुधीर कुमार विशेष न्यायाधीश दस्यु प्रभावित क्षेत्र (एंटी डकैती) की कोर्ट में चल रही है।
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फूलन देवी
- फोटो : अमर उजाला
18 जनवरी को फैसले की तारीख तय की गई थी। पत्रावली में मूल केस डायरी न होने पर फैसला नहीं सुनाया गया था। गुरुवार को सुनवाई के दौरान एसपी की ओर से केस डायरी ढूंढने के लिए 10 दिन का समय मांगा था। जिस पर जिला शासकीय अधिवक्ता राजू पोरवाल ने बताया कि कोर्ट ने सुनवाई की तिथि 12 फरवरी तय की थी। जिस पर बुधवार को फिर से सुनवाई हुई। इस पर एसपी अनुराग वत्स ने मूल केस डायरी न मिलने का कोर्ट में जवाब दिया । उन्होंने बताया है कि मूल केस डायरी न मिलने के मामले की एएसपी जांच कर रहे हैं। इसलिए दो सप्ताह का और समय दिया जाए। इसपर कोर्ट ने दो सप्ताह का समय देते हुए सुनवाई की अगली तारीख 26 फरवरी दी है।
14 फरवरी 1981 को फूलन ने अपने 35 साथियों के साथ बेहमई के 26 लोगों पर 5 मिनट में सैकड़ों गोलियां बरसाईं थीं। इनमें से 20 की मौत हो गई थी। फूलन ही मुख्य आरोपी थी, लेकिन मौत के बाद उनका नाम हटा दिया गया। इसके बाद 5 आरोपियों श्याम बाबू, भीखा, विश्वनाथ, पोशा और राम सिंह पर केस चलाया गया। इसमें से राम सिंह की 13 फरवरी 2019 को जेल में मौत हो गई। पोशा जेल में है। जबकि तीन आरोपी जमानत पर हैं।