आसमान में घने कोहरे की तनी चादर के चलते पिछले तीन दिनों से कानपुर वासियों को धूप के दर्शन दुर्लभ हो गए हैं। पूरे दिन में महज दो से चार घंटे ही हल्की-फुल्की धूप निकल पाती है। कल दोपहर में भी घना कोहरा छाया रहा। पूरे सेंट्रल यूपी के एक समान हालात हैं।
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विजिबिलिटी हुई शून्य
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- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
शुक्रवार सुबह और रात को विजिबिलिटी (दृश्यता) शून्य हो गई। शुक्रवार को पूर्वी की जगह उत्तर-पश्चिम की हवाएं चलीं। इससे सर्दी बढ़ गई। सुबह की नमी 100 फीसदी रिकार्ड की गई। दोपहर की नमी 80 फीसदी के आसपास रही। नमी बढ़ने से ही कोहरा बढ़ता है।
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सड़कों पर रेंगने को मजबूर गाड़ियां
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- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
कोहरे के चलते रात में सड़कों पर गाड़ियां रेंगती हुई नजर आई। इसके चलते जगह-जगह जाम भी लग गया। ट्रेनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है। 17 ट्रेनें रद्द किए जाने की जानकारी मिली थी। पूरा सेंट्रल यूपी में कोहरे के चलते आमजनजीवन को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
आर्द्र हवा के साथ गिर रही हैं नन्ही बूंदे
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- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
अगले कुछ दिनों तक कोहरा रहने की संभावना है। फिलहाल, पानी की नन्ही बूंदे आर्द्र हवा के साथ गिर रही हैं। इससे धुंध छाई हुई है। वाहनों के शीशों पर सफेद परत जम रही है। तो वहीं सुबह के समय पेड़-पौधों पर भी सफेद पाला की परत नजर आ रही है।
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मौसम में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में काफी अंतर
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मौसम में न्यूनतम और अधिकतम तापमान में काफी अंतर रहने की वजह से नमी ज्यादा बन रही है। यही नमी कोहरा बना रही है। मौसम विभाग का कहना है कि मौसम में ये बदलाव पहाड़ी इलाकों में हो रही बर्फबारी की वजह से हो रहा है।
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सड़कों पर रात काटने वालों के लिए बड़ी मुसीबत बना कोहरा
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शीत लहर से पाला पड़ने का खतरा है, जो फसलों के लिए भी नुकसानादायी है। पाला आलू की फसल को चौपट कर सकता है। अरहर, मटर और चना की फसलों को भी नुकसान संभव है। इसी का नतीजा है कि कृषि विज्ञानियों ने किसानों को संभलकर खेती करने की सलाह दी है। विज्ञानियों ने कहा है कि सिंचाई के जरिये खेतों में हल्की नमी बनाए रखें। आलू के साथ ही सब्जी वाले फसलों में भी पाला असर करता है।
साथ ही उन गरीब लोगों के लिए मुसीबतें बढ़ती जा रही है जो सड़कों पर रात काटते हैं। इनमें कई मेहनत मजदूरी करने वाले भी शामिल हैं जो रिक्शा चलाते हैं।
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सर्दी से बचने का जुगाड़ करते दिखे दिखे लोग
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सर्दी से बचने के लिए लोग घरों के बाहर अाग जलाकर हाथ तापते दिखाए दिए। आते-जाते राहगीर और दुपहियां वाहन चालक जहां-कहीं रास्ते में आग जली देखते वहीं गाड़ी रोक कर थोड़ी देर रुककर हाथ तापते दिखे। दुपहियां वाहन चालकों के लिए कोहरे और ठंड से बचने का यही जुगाड़ है।
स्कूली बच्चों को भी सुबह कोहरे से दो-चार होना पड़ता है
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स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को भी कोहरे से दो-चार होना पड़ रहा है। इन्हें लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ती जा रही है। इस पर से मौसम विज्ञानियों के अनुमान उनकी चिंताओं को बढ़ा रहे हैं। दिसंबर के आखिर तक कड़ाके की ठंड पड़ने के आसार हैं।