सामूहिक हत्याकांड में 19 अप्रैल को उच्च न्यायालय से फैसला आने के बाद 25 दिनों तक ऊहापोह की स्थिति बनी रही। सजा के करीब 14 दिन बाद आदेश की सत्यापित प्रति जिला अदालत आई। जिसके बाद कोर्ट दो के न्यायाधीश ने छह मई को सभी आठों सजायाफ्ता के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी किए। गिरफ्तारी वारंट जारी होने के बाद पुलिस सजायाफ्ता के घरों में दबिश देती रही। मगर पुलिस को सफलता नहीं मिली। वारंट के समाप्त होने के अंतिम दिन पांच ने आत्मसमर्पण किया व तीन गिरफ्तार हुए।
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जेल जाने से पूर्व जनता का अभिवादन करते सदर विधायक
- फोटो : अमर उजाला
पूरे शहर में सोमवार को पुलिस का कड़ा पहरा था। इससे लग रहा था एक भी सजायाफ्ता अदालत में हाजिर नहीं हो पाएगा, बल्कि पुलिस गिरफ्तार करेगी। मगर ऐसा नहीं हो सका और पुलिस के मंसूबों पर पानी फिर गिया। सख्त पहरा होने के बावजूद भाजपा विधायक समर्थकों के साथ अदालत में हाजिर हो गए। पुलिस सिर्फ तीन सजायाफ्ता को ही गिरफ्तार कर सकी।
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विधायक का यमुना पुल पर समर्थकों के साथ इंतजार करता पुत्र अभयराज सिंह
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जिला कारागार के जेलर पीके त्रिपाठी ने बताया सदर विधायक अशोक चंदेल, रघुवीर सिंह उनके पुत्र आशुतोष सिंह डब्बू, नसीम खां व भान सिंह का जिला जेल स्थित अस्पताल में तैनात चिकित्सक डा. शिवशास्त्री ने मेडिकल परीक्षण किया। बताया तीन सजायाफ्ता उत्तम सिंह, प्रदीप सिंह व साहब सिंह का जिला अस्पताल में मेडिकल कोतवाली पुलिस ने कराया है। बताया जेल आने वाले सजायाफ्ता को बैरक नंबर नौ में रखा गया है। वहीं सजायाफ्ता वारंट बनने के बाद विधायक व अन्य अभियुक्तों को बंदी वाहन से न ले जाकर पुलिस के चार पहिया वाहन से जेल ले जाया गया। विधायक के जेल जाते समय हजारों समर्थक भी उनके पीछे नारेबाजी करते चले।
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विधायक के समर्थकों को रोकती पुलिस
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सजायाफ्ता भाजपा सदर विधायक चंदेल के सरेंडर वाले दिन सोमवार को सुबह से ही उनके आवास पर सन्नाटा पसरा रहा। आवास पर पुलिस तैनात रही। विधायक के सरेंडर होने के कारण उनके कार्यकर्ता जजी परिसर पहुंच गए। जिसकी वजह से आवास पर कोई कार्यकर्ता भी नजर नहीं आया।
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विधायक के समर्थक
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सामूहिक हत्याकांड के मामले में सोमवार को अदालत में विधायक के आत्मसमर्पण के समय आने वाली भीड़ की संभावना पर पुलिस प्रशासन ने 12 स्थानों पर बैरिकेडिंग लगाई थी। जिसमें जेल रोड, कालपी चौराहा, चौरादेवी, डीएम आवास गेट, तहसील तिराहा, कलक्ट्रेट के मेन गेट, आकिल तिराहा जैसे मार्गों पर बैरियर लगाए गए थे।
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विधायक के समर्थकों को रोकती पुलिस
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भाजपा विधायक अशोक चंदेल के जेल जाने के बाद उनकी विधानसभा की सदस्यता रद्द हो जाएगी। विधायक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है। इसके चलते वह जनप्रतिनिधि के कर्तव्यों के अयोग्य हो जाएंगे। विधायक के जेल जाने के बाद शासन उनकी विधायकी रद्द कर देगा।
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अदालत परिसर में समर्थकों के बीच विधायक अशोक चंदेल व रघुवीर सिंह
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करीब 22 वर्ष पूर्व हत्याकांड में एक ही परिवार के तीन लोग सहित पांच लोगों की गोलियों से भूनकर हत्या की गई थी। जिसमें वादी राजीव शुक्ला के भाई राजेश शुक्ला, राकेश शुक्ला, अंबुज उर्फ गुड्डा, श्रीकांत पांडेय व वेदप्रकाश की गोली मारकर हत्या कर दी थी। हत्याकांड में उच्च न्यायालय प्रयागराज ने 19 अप्रैल को सदर विधायक सहित नौ लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
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विधायक अशोक चंदेल के समर्थक
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26 जनवरी 1997 को मुख्यालय के सुभाष बाजार मोहल्ले में सामूहिक हत्याकांड हुआ था। तब वादी राजीव शुक्ला के भाई राजेश शुक्ला, राकेश शुक्ला, अंबुज उर्फ गुड्डा, श्रीकांत पांडेय व वेदप्रकाश की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। गोलीकांड में घायल राजीव शुक्ला ने सदर विधायक अशोक सिंह चंदेल, रघुवीर सिंह उनके पुत्र आशुतोष सिंह डब्बू, नसीम खां, भानसिंह, साहब सिंह, प्रदीप सिंह, उत्तम सिंह, श्याम सिंह, रूक्कू, झंडू सिंह व सरकारी गनर रामबाबू के खिलाफ हत्या का मुकदमा दर्ज कराया था।
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अदालत के मेन गेट पर वादकारियों के बैगों की तलाशी लेती पुलिस
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पुलिस ने विवेचना में सरकारी गनर का नाम हटाकर 11 लोगों के खिलाफ अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी। सामूहिक हत्याकांड मामले में मुख्य अभियुक्त विधायक चंदेल समेत अन्य को न्यायिक अधिकारी अश्विनी कुमार ने 15 जुलाई 2002 को बरी कर दिया था। तब इसके खिलाफ वादी राजीव शुक्ला ने हाईकोर्ट में शिकायत की थी। जांच के बाद न्यायिक अधिकारी अश्विनी कुमार को हाईकोर्ट की संस्तुति पर तत्कालीन गवर्नर ने बर्खास्त कर दिया था।
मामले में कई आरोपी जेल गए जबकि विधायक व रुक्कू करीब तीन साल तक फरार रहने के बाद कोर्ट में हाजिर हुए। जिस पर तत्कालीन जज आरबी लाल ने उन्हें जमानत दे दी। इस पर हाईकोर्ट व सुप्रीमकोर्ट से जमानत निरस्त करा दी और जमानत देने वाले जज के खिलाफ हाईकोर्ट ने जांच के बाद न्यायिक अधिकारी आरबी लाल को बर्खास्त कर दिया था।