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‘मौत का पुल’: औंधे पड़े घड़ों में अब प्यास नहीं, मशीनें जमींदोज और बेबस मजदूर, चेहरे पर था बेतवा हादसे का दर्द

Sun, 31 May 2026 06:49 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

Hamirpur Betwa Bridge Tragedy: कुरारा में बेतवा नदी पुल हादसे के बाद घटनास्थल पर मातम पसरा है। मलबे के बीच बिखरे हेलमेट, जूते और औंधे पड़े घड़े उस भयावह रात की गवाही दे रहे हैं। हादसे में बचे मजदूरों के चेहरों पर अपने साथियों को खोने का दर्द साफ दिख रहा है, जबकि निर्माण कंपनी की लापरवाही के विरुद्ध ग्रामीणों और मजदूरों का गुस्सा चरम पर है।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
हमीरपुर हादसे के अगले दिन कुरारा में घटनास्थल पर वीरानगी छायी रही। काम पूरी तरह बंद रहा। वहीं, पुल निर्माण में लगी मशीनें जमींदोज रहीं। कुछ मछुआरे बेतवा नदी में जरूर दिखे। सुबह मशीन चालक, कर्मचारी और अन्य स्टाफ आया, तो साथियों की नामौजूदगी का दर्द उनके चेहरे पर चस्पा रहा।

औंधे पड़े घड़े, हेलमेट, जूते, कपड़े, रस्सियां, सिलिंडर तबाही बयां करती दिखीं। पुल के टूटे हिस्से का मलबा जस का तस पड़ा दिखा। मुड़ी हुईं सरिया खौफनाक हादसे की गवाही दे रही थीं। फिलहाल पुल के आसपास आम लोगों की आवाजाही रोक दी गई है। नदी के बीच बने पुल के दोनों ओर गड्ढे खोद दिए गए हैं।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
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आंधी में रोक देना था काम: मजदूर

मौके पर मौजूद मजदूर रफीक ने कहा कि वह छुट्टी पर था। अगर ड्यूटी पर होता तो शायद वह भी नहीं बचता। उसने बताया कि आंधी में ठेकेदार को काम बंद करा देना चाहिए था। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ और लाशें बिछ गईं। निष्पक्ष जांच जरूरी है तभी सच सामने आएगा।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
सुरक्षा गार्ड ने लगाया आरोप, मजदूरों से कराया जाता था जबरन काम
घटना के समय मौजूद रहे सुरक्षा गार्ड अवध पाल ने आरोप लगाया कि कि मजदूरों से जबरन काम कराया जाता था। चेतावनी के बाद भी जिम्मेदारों ने काम बंद नहीं कराया। ड्रेस के बारे में कहा कि यहां सुरक्षा गार्ड के लिए ड्रेस नहीं जरूरी है। वह कुर्ता-पायजामा पहनकर ही ड्यूटी करते हैँ।

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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
आरोप: गुणवत्ता जांच की जानकारी नहीं दी जाती थी
हादसे में बचे गार्ड अवधपाल ने निर्माण कार्य को लेकर कई गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि वह लंबे समय से साइट पर तैनात थे और उनके सामने ही काम चलता रहा। उन्होंने दावा किया कि बेतवा नदी से निकाली गई रेत का इस्तेमाल निर्माण में किया जा रहा था। अवधपाल के अनुसार मजदूरों को निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच की कोई जानकारी नहीं दी जाती थी। उन्होंने मांग की कि रेत, सीमेंट और अन्य सामग्री की स्वतंत्र तकनीकी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई
गार्ड ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण कार्य में तेजी के दबाव में काम कराया जा रहा था। उनके अनुसार इंजीनियर राजू और पवन समय से पहले काम पूरा कराने में लगे थे और खराब मौसम के बावजूद निर्माण जारी रहा। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है और यह जांच का विषय है।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
जांच में स्थिति होगी स्पष्ट
स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप थी तो जांच से स्थिति स्पष्ट हो जाएगी अन्यथा खामियां भी सामने आएंगी। ग्रामीणों का कहना है कि हादसे की जांच केवल मौसम पर नहीं, बल्कि निर्माण गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर भी केंद्रित होनी चाहिए। फिलहाल बेतवा किनारे पड़ा मलबा, टूटे पिलर, बाहर निकली सरिया, खराब हालत में मिली सीमेंट की बोरियां और प्रत्यक्षदर्शियों के आरोप कई ऐसे सवाल छोड़ रहे हैं जिनके जवाब तकनीकी जांच, पुलिस पड़ताल और विभागीय रिपोर्ट से ही सामने आ सकेंगे।
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चेतावनी के बावजूद मजदूरों को नहीं भेजा सुरक्षित स्थान
मृतक पुष्पेंद्र सिंह चौहान के भाई राघवेंद्र सिंह ने आरोप लगाया है कि मौसम को लेकर पहले से चेतावनी जारी थी। इसके बावजूद मजदूरों को सुरक्षित स्थान पर नहीं भेजा गया। उनका कहना है कि हादसे के बाद भी कंपनी के जिम्मेदार लोग मौके पर नहीं पहुंचे। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।

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ग्रामीणों ने लगाए गंभीर आरोप
ग्रामीण सचिन सेंगर ने हादसे को सिस्टम की विफलता बताया है। उनका कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और मानकों के अनुरूप हुआ होता तो इतनी बड़ी जनहानि नहीं होती। उन्होंने कहा कि केवल आंधी-तूफान को कारण मान लेना पर्याप्त नहीं है बल्कि निर्माण सामग्री, तकनीकी गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था की भी जांच जरूरी है।

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मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए
हादसे में बचे मजदूर इरफान और शफीक ने भी निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। उनका कहना है कि छह मजदूरों की मौत केवल आंकड़ा नहीं है, बल्कि पूरे मामले की गहराई से जांच होनी चाहिए ताकि वास्तविक कारण सामने आ सकें। साथ ही उन्होंने मृतकों के परिजन को दी जा रही सहायता को अपर्याप्त बताते हुए दीर्घकालिक मदद की मांग की है।

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श्रम विभाग ने निर्माण कंपनी को जारी किया नोटिस
श्रम विभाग ने निर्माण कंपनी को वर्कमैन कंपनसेशन एक्ट के तहत नोटिस जारी किया है। अधिकारियों के अनुसार मृतकों के आश्रितों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जा रही है और विभिन्न विभागीय टीमें मामले की जांच करेंगी।

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स्टोर यार्ड में खराब मिली सीमेंट
पड़ताल के दौरान निर्माण कंपनी के स्टोर यार्ड में बड़ी संख्या में सीमेंट की बोरियां पाई गईं। कई बोरियां फटी हुई थीं और कुछ में सीमेंट जमकर कठोर हो चुका था। कुछ में नमी भी थी। स्थानीय लोगों का कहना है कि निर्माण सामग्री के नमूनों की जांच की जानी चाहिए।

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400 रुपये पेनाल्टी का भी आरोप
प्रत्यक्षदर्शी गार्ड और कुछ परिजन ने आरोप लगाया है कि ड्यूटी पर न पहुंचने पर मजदूरी काटने के साथ अतिरिक्त पेनाल्टी भी लगाई जाती थी। उनका दावा है कि आर्थिक दबाव के चलते कई मजदूर खराब मौसम में भी ड्यूटी पर पहुंचते थे। जांच में यह पहलू भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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मजदूरों की मांग: केवल मुआवजा नहीं, सच्चाई भी सामने आए
बचे हुए मजदूरों का कहना है कि मृतकों के परिवारों को सहायता मिलना जरूरी है। साथ ही हादसे की वास्तविक वजह भी सामने आनी चाहिए। उनका कहना है कि जांच निष्पक्ष और तकनीकी आधार पर होनी चाहिए।

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सिस्टम फेलियर बता रहे ग्रामीण
ग्रामीण सचिन सेंगर का कहना है कि यदि निर्माण कार्य पूरी गुणवत्ता और निगरानी के साथ हुआ होता तो इतनी बड़ी घटना नहीं होती। उनका कहना है कि जिम्मेदारी तय किए बिना केवल इसे हादसा मान लेना उचित नहीं होगा।
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जांच में इन सवालों के जवाब तलाशे जाएंगे
  • मौसम अलर्ट के दौरान साइट पर क्या स्थिति थी?
  • क्या काम जारी था?
  • निर्माण सामग्री मानकों के अनुरूप थी या नहीं?
  • रेत और सीमेंट की गुणवत्ता की जांच हुई थी या नहीं?
  • पिलर और संरचना के टूटने की वास्तविक तकनीकी वजह क्या थी?
  • सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं?
  • जिम्मेदारी किस स्तर पर तय होगी?
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