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मौत का ‘कनेक्शन’: जुड़ते सेगमेंट, तो बचती जान, अब 13 पिलरों का होगा लोड टेस्ट, तकनीकी चूक ने लिखी पुल की कहानी

Tue, 02 Jun 2026 05:22 AM IST
Himanshu Awasthi न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हमीरपुर

सार

Hamirpur Betwa Bridge Tragedy: हमीरपुर पुल हादसे की जांच के लिए विशेषज्ञों की टीम ने नमूने लिए और माना कि मौसम विभाग के अलर्ट के बीच काम जारी रखना बड़ी चूक थी। अब दोबारा निर्माण से पहले सभी 13 पिलरों का लोड टेस्ट कराया जाएगा।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
हमीरपुर जिले में बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे के चौथे दिन सोमवार को शासन से नामित तीन सदस्यीय विशेषज्ञ जांच टीम ने करीब साढ़े तीन घंटे तक हादसे के कारणों और निर्माण कार्य की गुणवत्ता की पड़ताल की। टूटे पिलर, स्लैब और मलबे से कोर कटिंग के साथ स्टील के नमूने लिए।

जांच टीम के सदस्य राज्य सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथलेश कुमार ने बताया कि नमूनों को परीक्षण के लिए आईआईटी कानपुर अथवा वाराणसी भेजा जाएगा। यहां की रिपोर्ट से ही हादसे की वजह साफ हो सकेगी। शुरुआती जांच में आंधी-तूफान से ही हादसा प्रतीत हो रहा है।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala





प्री-स्ट्रेसिंग का कार्य पूरा हो जाता, तो शायद हादसा न होता

इसके अलावा स्लैब के सेगमेंट भी पूरी तरह जुड़ नहीं पाए थे। यदि समय रहते प्री-स्ट्रेसिंग का कार्य पूरा हो जाता, तो शायद हादसा न होता। एडीएम नमामि गंगे सुरेश कुमार की मौजूदगी में मिथलेश कुमार, चीफ प्रोजेक्ट मैनेजर (डिजाइन) फरहान बासित और जनरल मैनेजर प्रेम सिंह ने क्षतिग्रस्त पिलर, स्लैब और अन्य संरचनाओं की फोटो व वीडियो रिकॉर्डिंग कराई।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
टूटे पिलर की कोर कटिंग कराकर नमूने लिए
छह नंबर पिलर की माप कराई जिसकी परिधि 8.66 मीटर निकली। निर्माण में प्रयुक्त सरिया, कंक्रीट और कपलर की भी जांच की। मलबे के बड़े टुकड़ों में अंदरूनी संरचना जांची। टूटे पिलर की कोर कटिंग कराकर नमूने लिए। स्लैब और पिलर में इस्तेमाल 25 एमएम और 32 एमएम सरिया को कटवाकर सैंपल सुरक्षित किया। अधिकारियों की मौजूदगी में सभी नमूनों को सील पैक किया गया।

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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
सभी 13 पिलरों का लोड टेस्ट होने के बाद शुरू होगा पुल का काम
बेतवा नदी पर निर्माणाधीन पुल हादसे के बाद अब निर्माण गुणवत्ता और मानकों को लेकर गंभीर सवाल उठाए जा रहे हैं। लोग लापरवाही के साथ-साथ भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं। मृतकों के परिजनों से लेकर साइट पर काम करने वाले कर्मचारियों तक ने दावा किया है कि यदि निर्माण कार्य मानक के अनुरूप हुआ होता, तो पिलर इस तरह टूटकर नहीं गिरता।
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Hamirpur Betwa Bridge Tragedy - फोटो : amar ujala
प्रत्येक पिलर की क्षमता जांची जाएगी
इन आरोपों को प्रशासन और विभाग ने भी गंभीरता से लिया है। जांच में जुटी विशेषज्ञों की टीम ने स्पष्ट किया है कि पुल के सभी 13 पिलरों की लोड टेस्टिंग कराई जाएगी। सामान्य तौर पर यह परीक्षण पुल का निर्माण पूरा होने के बाद किया जाता है, लेकिन हादसे के बाद अब दोबारा निर्माण कार्य शुरू करने से पहले ही प्रत्येक पिलर की क्षमता जांची जाएगी।
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छह परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ गईं
विशेषज्ञों के अनुसार लोड टेस्ट के जरिये यह परखा जाएगा कि पिलर निर्धारित भार सहन करने की स्थिति में हैं या नहीं। जांच में यदि कोई पिलर कमजोर या मानक के विपरीत पाया गया, तो उसे गिराकर दोबारा निर्माण कराया जाएगा। उधर पुल हादसे में छह परिवारों की खुशियां हमेशा के लिए उजड़ गईं।
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निर्माण कार्य जारी रखना बड़ी चूक रही
सोमवार को मौके पर पहुंची सेतु निगम की विशेषज्ञ जांच टीम ने भी माना कि मौसम विभाग के अलर्ट के बावजूद निर्माण कार्य जारी रखना बड़ी चूक रही। जांच के लिए पहुंचे सेतु निगम के संयुक्त प्रबंध निदेशक मिथलेश कुमार ने कहा कि हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और मृतकों के परिजनों के प्रति विभाग की गहरी संवेदनाएं हैं।

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सुरक्षा मानकों का पालन सर्वोच्च प्राथमिकता
उन्होंने स्वीकार किया कि आंधी-तूफान को लेकर पहले से मौसम विभाग का अलर्ट जारी था। ऐसे हालात में निर्माण कार्य बंद करा देना चाहिए था। उन्होंने कहा कि सुरक्षा मानकों का पालन किसी भी प्रोजेक्ट में सर्वोच्च प्राथमिकता होता है। प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि खराब मौसम के बीच भी पुल पर काम जारी रहा।

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श्रमिकों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश
इसे गंभीर लापरवाही माना जा रहा है। इस पर क्या कार्रवाई होगी इस संदर्भ में कुछ नहीं कहा। ग्रामीणों और श्रमिकों में घटना को लेकर गहरा आक्रोश है। लोगों का कहना है कि यदि मौसम विभाग के अलर्ट को गंभीरता से लिया जाता, तो छह लोगों की जान बचाई जा सकती थी।

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निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
हादसे के बाद से निर्माण एजेंसी, सेतु निगम और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। ऐसे में जांच रिपोर्ट अब यह तय करेगी कि हादसा सिर्फ तेज आंधी-तूफान का नतीजा था या फिर निर्माण में तकनीकी खामियां और गुणवत्ता में कमी भी इसकी बड़ी वजह रहीं।
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पुल का निर्माण पूरा होने के बाद होने वाली पिलरों की लोड टेस्टिंग इस बार पहले कराई जाएगी। दोबारा निर्माण कार्य शुरू करने से पहले सभी 13 पिलर की क्षमता जांची जाएगी। मानक के विपरीत होने पर दोबारा निर्माण कराया जाएगा।  -मिथलेश कुमार, संयुक्त प्रबंध निदेशक, सेतु निगम
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