आज से गुप्त नवरात्र शुरू हो रहे हैं। आषाढ़ महीने की प्रतिपदा तिथि पर यह नवरात्र पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी। इस दौरान किया गया पूजन व अनुष्ठान कई गुना फलदायी है।
ज्योतिषाचार्य व पं. नरेंद्र दीक्षित बता रहे हैं गुप्त नवरात्रि की पूजन विधि व इस दौरान वर्जित कार्यों के बारे में...
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हालांकि यह नवरात्र आम जनमानस के लिए नहीं होते हैं।
इस बार गुप्त नवरात्र की शुरुआत पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग में होगी। साथ ही सर्वार्थसिद्धि योग, रवियोग व अमृत सिद्धि योग में नवरात्र का समापन होगा। गुप्त नवरात्रि में भी आम नवरात्र की तरह माता की पूजा की जाती है और पूरे 9 दिनों तक व्रत रखा जाता है। इस नवरात्र को तांत्रिक सिद्धियों की पूजा करने के लिए भी सबसे उत्तम माना जाता है।
अागे की स्लाइड में पढ़ें- इसलिए कहते हैं इसे गुप्त नवरात्रि ...
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इस पूजन में कलश स्थापना की जाती है
गुप्त नवरात्र आषाढ़ और माघ मास के शुक्ल पक्ष में मनाये जाते हैं। गुप्त नवरात्र में मां काली की पूजा की जाती है। गुप्त नवरात्र में माता काली के गुप्त स्वरुप की पूजा करने का विधान है। यह पूजा तंत्र साधना के लिए की जाती है जोकि बहुत ज्यादा कठिन मानी जाती है इसलिए इसे गुप्त नवरात्र कहा जाता है।
आगे की स्लाइड में पढ़ें- भूल कर भी न करें ये कार्य...
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स्थापना का समय सुबह 7:10 बजे से
- इस दौरान 9 दिन तक व्रत रखने वाले साधकों को काले कपड़े नहीं पहनने चाहिए।
- गुप्त नवरात्र में मां का पूजन करने वाले भक्तों को चमड़े की चीजों से दूर रहना चाहिए।
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गुप्त नवरात्र में दस महाविद्या का पूजन होता है
- इस दौरान बाल नहीं कटवाने चाहिए, बच्चों का मुंडन संस्कार भी इस दौरान वर्जित है।
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तंत्र साधना में गुप्त नवरात्र का अधिक महत्व होता है
- गुप्त नवरात्र के दौरान व्रत व अनुष्ठान करने वाले भक्तों को दिन में सोना नहीं चाहिए।
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दूसरे गुप्त नवरात्र माघ शुक्ल की परेवा यानी पांच फरवरी 2019 को पड़ेंगे
- इस दौरान किसी भी व्यक्ति को अपशब्द नहीं बोलना चाहिए।
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डेमो पिक
- देवी की अाराधना के इस पर्व के दौरान नारी का अपमान नहीं करना चाहिए।
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डेमो पिक
- इस दौरान 9 दिन तक व्रत करने वाले साधकों को नमक व अनाज का सेवन नहीं करना चाहिए।