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ग्राउंड रिपोर्ट: साहब दो दिन से नहीं जले चूल्हे, राशन-पैसे की किल्लत, खाना नहीं खाया तो भूख से मरेंगे

Sun, 29 Mar 2020 08:24 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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लॉकडाउन के बीच हजारों की संख्या में लोग दो दिन से भूखे - फोटो : amar ujala
कोरोना वायरस के संक्रमण से बचाव के लिए पूरे देश में 21 दिनों का लॉकडाउन किया है। ऐसे में चौथे दिन ही कई इलाकों में ऐसे घर भी हैं जहां पिछले दो दिनों से चूल्हा नहीं जला है। राशन खत्म हो गया है। जब पूरी तरह खाली है और भूख अपने चरम पर है। 'अमर उजाला' ने कानपुर के पनकी क्षेत्र में स्थित जब इस इलाके में जांच पड़ताल की तो सच सामने आया।
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दो दिन नहीं जला चूल्हा - फोटो : amar ujala
हजारों की संख्या में मौजूद हर शख्स की जुबां पर सिर्फ एक ही बात, साहब घर में राशन खत्म हो गया है। सुबह से कुछ नहीं खाया, दो दिन हो गए घर का चूल्हा भी नहीं चला है। ऐसा ही चलता रहा तो कोरोना से नहीं हम भूखे मर जाएंगे। यह कहना है पनकी शताब्दी नगर स्थित काशीराम कॉलोनी के निवासियों का उन्होंने बताया एक हफ्ता हो गया, काम पर नहीं गए हैं ।

 
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घरों के बाहर खड़े लोग - फोटो : amar ujala
जेब में पैसा भी खत्म हो गया। आसपास की सभी दुकानें बंद हैं। चाह कर भी राशन नहीं खरीद सकते हैं। घर में छोटे-छोटे बच्चे हैं। कुछ तो दूध के सहारे ही जीते हैं । घर में सब भूखे हैं, जो थोड़ा बहुत था बच्चों को खिला दिया। देश में लाकडाउन घोषित होने के बाद शहर के पनकी शताब्दी नगर स्थित काशीराम कालोनी के निवासियों की स्थिति काफी दयनीय है। कॉलोनी में लगभग 3000 से ज्यादा लोग रहते हैं।

 

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काशीराम कॉलौनी में हजारों की संख्या में दिहाड़ी पर काम करने वाला मजदूर रहता है - फोटो : amar ujala
सभी रोजमर्रा के मामूली काम करके कमाने वाले हैं। लॉकडाउन की वजह से पिछले 7 दिनों से कोई अपने घर से नहीं निकल पा रहा है। जिससे कमाई ठप हो गई है। शनिवार को अमर उजाला ने मौके पर जाकर स्थिति को देखा तो हालात बेहद चिंताजनक मिले। लोगों की आंखों से आंसू निकल रहे थे। उन्होंने सिर्फ इतना ही कहा साहब दो दिन से भूखे हैं कुछ खिला दीजिए।

 
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दो दिन से भूखे हैं शताब्दी नगर के लोग - फोटो : amar ujala
घरों के भीतर जाकर स्थिति देखी तो राशन के नाम पर आटा और चावल खत्म हो गया था। चूल्हे ठंडे पड़े थे। कहीं छोटा बच्चा रो रहा था, तो कहीं पानी और शरबत पीकर लोग अपनी भूख मिटाने की कोशिश कर रहे थे। सबकी आंखों में आंसू चेहरे पर सरकार के प्रति गुस्सा था। काशीराम कॉलोनी के निवासियों का कहना था सरकार ने लाॅक डाउन तो कर दिया, लेकिन हमारे खाने की कोई व्यवस्था कर दी होती तो ज्यादा बेहतर होता।

 
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शताब्दी नगर स्थित काशीराम कॉलौनी - फोटो : amar ujala
शहर को बंद हुए लगभग 6 दिन से ज्यादा का समय बीत गया है लेकिन हमारे पास अभी तक ना कोई प्रशासन का आदमी आया और ना ही कोई हमारी सुध लेने। टीवी पर सरकार कह रही है घर-घर राशन पहुंचाया जाएगा लेकिन यहां तो लगता है हम लावारिस हैं। कॉलोनी में रहने वाली दिव्यांग बबली ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा लाॅकडाउन कर दिया हम मरे या जिएं सरकार को क्या फर्क पड़ेगा। घर में तीन बच्चे और पति हैं। दो दिन से सब भूखे हैं मर भी जाएंगे तो किसी को क्या फर्क पड़ता है। 
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