गंगा बैराज के पास गंगा जल इतना प्रदूषित हो चुका है कि आचमन लायक भी नहीं है। छत्रपति शाहूजी महाराज विश्वविद्यालय (सीएसजेएमयू) के इंस्टीट्यूट ऑफ बायोसाइंस एंड बायोटेक्नोलॉजी (बीएसबीटी) के विशेषज्ञों की ताजा रिपोर्ट से यह जानकारी सामने आई है।
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गंगा जल इतना प्रदूषित हो चुका है (फाइल फोटो)
बीएसबीटी के निदेशक डॉ. शाश्वत कटियार की अगुवाई में टीम ने 16 अप्रैल को गंगा के नौ घाटों से पानी के नमूने लिए थे। कन्नौज के मेहंदी घाट, नानामऊ, शिवराजपुर, बिठूर, गंगा बैराज, परमट, शुक्लागंज, जाजमऊ और वाजिदपुर से पानी का नमूना भरा। फिर इसकी प्रारंभिक रिपोर्ट और हैवी मेटल की रिपोर्ट तैयार की है।
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गंगा जल इतना प्रदूषित हो चुका है (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
डॉ. कटियार ने बताया कि जाजमऊ और वाजिदपुर में गंगा जल अधिक प्रदूषित हो गया है। गंगा बैराज से थोड़ा आगे निकलने पर गंगा जल में हैवी मेटल्स जैसे क्रोमियम, आर्सेनिक, लेड, कैडमियम की मात्रा मानक से काफी अधिक है जबकि शरीर के लिए जरूरी तत्व जिंक की मात्रा मानक से बहुत कम बची है।
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गंगा जल इतना प्रदूषित हो चुका है (फाइल फोटो)
डॉ. शाश्वत ने बताया कि पीएच के जरिए पानी का खारापन देखा जाता है। डब्ल्यूएचओ के तय मानक के अनुसार इसकी मात्रा पानी में 6.5 से 8.5 होनी चाहिए लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक जाजमऊ में इसकी मात्रा 9.30 और वाजिदपुर में 9.70, परमट में 8.45, गंगा बैराज में 8.75, बिठूर में 9.60 पीएच है। डिजॉल्व ऑक्सीजन (डीओ) की मात्रा डब्ल्यूएचओ के मानक के अनुसार पांच से कम नहीं होनी चाहिए।
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गंगा जल इतना प्रदूषित हो चुका है (फाइल फोटो)
- फोटो : amar ujala
रिपोर्ट के अनुसार बिठूर में इसकी मात्रा 7.85, गंगा बैराज में 7.44, परमट में 7.70, शुक्लागंज में 6.97 और जाजमऊ में 6.83 और वाजिदपुर में सबसे कम 5.98 है। कुंभ के दौरान इसकी मात्रा 11 से 12 हुआ करती थी। टोटल डिजॉल्स सॉलिड यानी टीडीएस की मात्रा में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। जाजमऊ में 171 और वाजिदपुर में 184 पीपीएम है, जबकि सामान्य रूप से यह 100 से कम होना चाहिए।
टीडीएस में बढ़ोतरी यह दर्शाता है कि शहर की गंदगी गंगा में जा रही है। इलेक्ट्रो कंडक्टिविटी यानी ईसी भी तेजी से बढ़ा है। मानक के अनुसार इसकी मात्रा 100 के करीब होनी चाहिए जबकि जाजमऊ में 339 और वाजिदपुर में 356 है। ईसी से पानी में केमिकल की मात्रा का पता चलता है। नाइट्रेट 4 पीपीएम से कम होना चाहिए जबकि जाजमऊ में इसका स्तर 45 के करीब है। अन्य घाटों पर यह 10 पीपीएम के करीब है। नाइट्रेट के बढ़ने से यह स्पष्ट हुआ है कि गंगा में सीवर के पानी की मात्रा बढ़ा दी गई है।