पंजाब के लुधियाना से पश्चिम बंगाल के दानाकुनी तक बन रहे 1856 किमी लंबे ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (ईडीएफसी) के दूसरे चरण के लिए अधिग्रहीत जमीनों के हस्तांतरण में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। सदर और नरवल तहसील के 12 गांवों में सरकारी व किसानों की जमीनों को रेलवे के नाम जारी करने में रकबे में अंतर पाया गया है।
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सजाया गया भाऊपुर स्टेशन
- फोटो : अमर उजाला
इस पर डीएम आलोक तिवारी ने एक सप्ताह में जांच कर दोषियों पर कार्रवाई के आदेश दिए हैं। पहले चरण में कानपुर देहात के न्यू भाऊपुर से बुलंदशहर के खुर्जा के बीच देश के पहले डीएफसी रेलवे ट्रैक के प्रधानमंत्री के हाथों मंगलवार को उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले यह खुलासा होने पर अफसरों में हड़कंप की स्थिति है।
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सजाया गया भाऊपुर स्टेशन
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परियोजना के दूसरे चरण के लिए अधिग्रहीत की गई सरकारी और निजी जमीनों को रेलवे के नाम से जारी करने में रकबे में काफी अंतर दिखाया गया है। कहीं पर रेलवे के हिस्से में जमीन का रकबा ज्यादा तो कहीं कम दिखा दिया गया है। जिलाधिकारी की ओर से जारी जांच के आदेश में बताया गया है कि नरवल तहसील के करबिगवां, साढ़, सरसौल, फुफुआर, महाराजपुर, टिकरिया, हाथीपुर, छतमरा, नगवां और इमलीपुर गांव में जमीन हस्तांतरण में गड़बड़ी हुई है।
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कार्यक्रम स्थल
- फोटो : अमर उजाला
इसी तरह सदर तहसील के सजारी और सनिगवां में भी गलत तरह से जमीनों का हस्तांतरण हुआ है। किसी गांव में दो तो किसी में चार मामले पकड़े गए हैं। इनमें 17 मामले निजी लोगों से जुड़े हैं। जबकि, दो सरकारी जमीनों का है और एक आम रास्ते का। एडीएम-एलए प्रमोद कुमार का दावा है कि यह महज लिपिकीय त्रुटि है। लेकिन, जिलाधिकारी ने सरकार के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट में गड़बड़ी को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू करा दी है।
इस तरह की गलतियां
डीएफसी के लिए रेलवे को हस्तांतरित जमीनों का रकबा कहीं 1800 का 180 दर्ज है तो कहीं 100 का एक हजार। इसी तरह गाटा संख्या 3449 की जगह 3549 का हस्तांतरण कर दिया गया है। जमीन के क्षेत्रफल में भी इसी तरह की गलतियों की भरमार है। दशमलव 0250 हेक्टेयर की जगह 0.2500 हेक्टेयर दर्ज कर दिया गया है।
फ्रेट कॉरिडोर में जमीन नामांतरण के दस्तावेज तलब
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर को लेकर जमीन के नामांतरण में मिली गड़बड़ी के बाद मंगलवार को जिलाधिकारी ने पूरे मामले के दस्तावेज तलब किए हैं। उन्होंने अपर जिलाधिकारी भूमि अध्याप्ति प्रमोद कुमार को निर्देश दिए हैं कि पूरे मामले की पड़ताल करते हुए 31 दिसंबर तक रिपोर्ट बनाकर दें। जिन लेखपालों की गलती सामने आएगी, उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। फ्रेट कॉरिडोर को लेकर जिले के 12 गांवों के 20 स्थानों पर किसानों और सरकारी जमीनों के नामांतरण में जिलाधिकारी स्तर से एक दिन पहले गड़बड़ी पकड़ी गई थी। इस पर उन्होंने जांच के आदेश जारी किए थे।