यूपी पुलिस की लापरवाही का एक और नमूना पेश है... एक संगीन अपराधिक मामला में यूपी पुलिस की कारगुजारी से बेहद हल्का पड़ गया। दरअसल एक 70 लाख की कीमत वाली मर्सडीज बेंज कार पर हिस्ट्रीशीटरों ने फायरिंग की। गोली से कार को खासा नुकसान पहुंचा।
कार का शीशा पूरी तरह से चटक गया। हैरत की बात तो यह है कि नवाबगंज पुलिस ने मामले को बेहद हल्के में लिया और रिपोर्ट में महज 50 रुपए नुकसान की बात लिखी। डीआईजी आवास के पास हुई इतनी बड़ी घटना को पुलिस ने बेहद हल्के में लिया। शहर में धारा 144 लागू होने के बाद भी समारोह मेें हिस्ट्रीशीटर असलहे लेकर पहुंचे। इतना ही नहीं कार्यक्रम की कोई अनुमति भी नहीं ली गई थी।
सीएसए स्थित चर्म निर्यात परिषद के गेस्ट हाउस में रविवार को चित्रगुप्त पूजन सेवा समिति के चुनाव में पहुंचे हिस्ट्रीशीटरों ने वारदात को अंजाम दिया है। गोली समिति के पदाधिकारी की 70 लाख की कीमत वाली मर्सडीज बेंज कार में लगी।
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15 से 20 हजार की कीमत का शीशा, रिपोर्ट में महज 50 रुपए के नुकसान का जिक्र
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चित्रगुप्त पूजन सेवा समिति के चुनाव में पहुंचे हिस्ट्रीशीटरों ने की फायरिंग
- फोटो : राहुल शुक्ला, अमर उजाला कानपुर
बता दें मामले में नुकसान की धारा 427 लगाई गई है। जबकि शीशे की कीमत ही 15 से 20 हजार के आसपास की बताई जा रही है, यदि कार में कोई होता तो उसकी जान पर भी बन सकती थी। पुलिस का कहना है कि मौके पर कोई खोखा नहीं मिला, जिसकी वजह से फायरिंग की बात स्पष्ट नहीं हो सकी।
समिति के अध्यक्ष पंकज श्रीवास्तव ने बताया कि मयंक श्रीवास्तव को वरिष्ठ उपाध्यक्ष बनाए जाने पर बर्रा निवासी समिति के पूर्व अध्यक्ष लल्लन श्रीवास्तव, हिस्ट्रीशीटर पवन सक्सेना, उसके भाई प्रशांत सक्सेना ने आपत्ति जताई। पंकज के मुताबिक वरिष्ठ उपाध्यक्ष ही आगामी वर्ष का अध्यक्ष मनोनीत किया जाता है। समारोह के दौरान जब आपत्ति करने वालों की एक न चली, तो वे बाहर निकल गए।
आरोप है कि गेट पर खड़ी मयंक की गाड़ी पर आरोपियों ने फायरिंग कर दी। हालांकि उस समय कार में कोई नहीं था। पवन और प्रशांत हाल ही में जेल से छूटे हैं। आरोप है कि करीब एक घंटे बाद इंस्पेक्टर मौके पर पहुंचे और पदाधिकारियों को ही हड़काने लगे। देर रात पुलिस ने 506, 504 और 427 में मामला दर्ज किया।
फायरिंग के बाद घटनास्थल पर पूछताछ में जुटी पुलिस
- फोटो : राहुल शुक्ला, अमर उजाला कानपुर
सपा विधायक की पैरवी पर हल्का हुआ मामला
सूत्रों की माने तो मामले में एक सपा विधायक के फोन करने के बाद न सिर्फ कुछ लोगों के नाम ही हटाए गए बल्कि पूरा मामला हल्की धाराओं में दर्ज किया गया।