आग कार्डियोलॉजी के आईसीयू में बने स्टोर रूम में लगी थी। कुछ ही देर में पूरा आईसीयू चपेट में आ गया। डीजी फायर आरके विश्वकर्मा ने इस पर सवाल खड़े किए हैं। उनका कहना है कि आईसीयू में इस तरह का स्टोर रूम बनाया जाना बिल्कुल गलत है। यहां गंभीर मरीज भर्ती होते हैं। स्टोर रूम को बनाना और आग से बचने का उपाय न होना बेहद गंभीर है।
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कानपुर: कार्डियोलॉजी के आईसीयू में लगी आग
- फोटो : अमर उजाला
शुरुआती जांच में तमाम खामियां और लापरवाही सामने आई हैं। जांच पूरी होने के बाद इसमें बडे़ स्तर पर कार्रवाई होना तय है। सुबह करीब सात और साढ़े सात बजे के बीच स्टोर रूम में आग लगी। एक कर्मचारी व डॉक्टर ने स्टोर रूम से धुआं निकलता देख अन्य अधिकारियों व डॉक्टरों को बुलाया।
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कानपुर: कार्डियोलॉजी के आईसीयू में लगी आग
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डॉक्टर और कर्मचारी खुद की जान बचाकर वहां से भाग निकले। मरीजों को हटाना तीमारदारों के लिए मुश्किल हो गया। इसलिए वो सभी भीतर फंस गए। बाद में दमकलकर्मियों व पुलिसकर्मियों ने उनको बाहर निकाला। डीजी फायर भी कुछ देर बाद वहां पहुंचे। जब घटनास्थल का मुआयना किया तो देखा कि जिस स्टोर रूम में आग लगी थी, वह आईसीयू के भीतर था। उन्होंने कार्डियोलॉजी प्रशासन से पूछा कि आखिर स्टोर रूम यहां क्यों बनाया गया। इसका कोई जवाब नहीं दे सका।
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कानपुर: कार्डियोलॉजी के आईसीयू में लगी आग
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हादसा और साजिश के बिंदु पर जांच
मुख्यमंत्री के आदेश पर गठित कमेटी अग्निकांड की जांच कर रही है। जांच दो बिंदुओं पर चल रही है। आईसीयू में आग लगना हादसा है या साजिश? इसके तथ्य खंगाले जा रहे हैं। हालांकि सूत्रों का कहना है कि स्टोर रूम में शॉर्ट सर्किट से आग लगी।
कानपुर: कार्डियोलॉजी के आईसीयू में लगी आग
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केजीएमयू में भी इसी तरह हुआ था अग्निकांड
कुछ समय पहले लखनऊ के केजीएमयू में भी आग लगी थी और मरीज फंस गए थे। वहां भी इसी तरह एक रूम बनाया गया था, जहां सबसे पहले आग लगी और फिर वहीं से पूरी बिल्डिंग चपेट में आ गई। दमकल अफसरों का कहना है कि संवेदनशील जगहों पर हर एक एहतियात बरतने की जरूरत होती है। ट्रेंड कर्मचारियों की जरूरत होती और फायर फाइटिंग सिस्टम अपडेट होना चाहिए।