बिंदावती और शमां परवीन
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मरीज और उनके परिजनों से बातचीत
25 मार्च से अस्पताल में भर्ती हूं। पेसमेकर लगना है। सुबह अचानक रबड़ जलने की महक आने लगी। देखते ही देखते धुआं भर गया कुछ नहीं दिखाई पड़ रहा था। कोई मदद के लिए भी नजर नहीं आ रहा था। पति रविंद्र कुमार अपना सहारा देकर बाहर तक लाए हैं।
- बिंदावती, निवासी अहिरवां
दिल में सुराख है, डॉक्टर ने ऑपरेशन को बताया तो 25 मार्च को यहां भर्ती हुई थी। आज सुबह दम घुटने वाला धुआं पूरे अस्पताल में भर गया। कुछ भी नजर नहीं आ रहा था। बेटे अकबर अली ने मुझे और बेटी शबनम परवीन को नीचे उतारा। करीब एक घंटा खुले में बैठे रहे, उसके बाद इलाज मिलना शुरू हुआ है।
- शमां परवीन, निवासी कानपुर देहात