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कानपुर: जिस आंगन में गूंजती थीं बेटियों की किलकारियां, वहां पसरा मातम; पिता और तीन बेटियों के शव पहुंचे गांव

Mon, 07 Sep 2026 07:59 AM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,कानपुर

सार

Kanpur News: जिस आंगन में कभी बेटियों की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब मातम और सन्नाटा पसरा है। साढ़ थाना क्षेत्र के हिरनी गांव में रविवार को दो मंजिला कच्चा मकान ढहने से जान गंवाने वाले पिता और उनकी तीन बेटियों के शव पोस्टमार्टम के बाद रात करीब दो बजे गांव पहुंचे।
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हिरनी गांव हादसा - फोटो : amar ujala

चारों शव एक साथ घर पहुंचे तो परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया। रात से ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर मौजूद हैं। रविवार सुबह करीब साढ़े दस बजे मकान अचानक भरभराकर ढह गया था। मलबे में गृहस्वामी मुकेश सिंह और उनकी चार बेटियां दब गई थीं। ग्रामीणों ने अपने स्तर पर राहत और बचाव कार्य शुरू किया। मलबे से मुकेश सिंह और उनकी बेटियां माया, पल्लवी व नीतू को बाहर निकाला गया था। पतारा अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने चारों को मृत घोषित कर दिया था।

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हिरनी गांव हादसा - फोटो : amar ujala

आधी रात के बाद गांव पहुंचा चारों का शव

पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद रात करीब दो बजे मुकेश सिंह और उनकी तीनों बेटियों के शव हिरनी गांव पहुंचे। एक साथ चार शव घर पहुंचने के बाद परिवार में कोहराम मच गया। आसपास के ग्रामीण भी बड़ी संख्या में मौके पर जुटे रहे। हर किसी की आंखें नम थीं।

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हिरनी गांव हादसा - फोटो : amar ujala

जिस घर में थी चहल-पहल, वहां पसरा सन्नाटा

हादसे से पहले इसी घर में बेटियों की किलकारियां और परिवार की चहल-पहल सुनाई देती थी। रविवार को दो मंजिला कच्चा मकान भरभराकर गिरा तो कुछ ही पलों में पूरा घर मलबे के ढेर में बदल गया। अब जिस आंगन में बेटियों की आवाजें गूंजती थीं, वहां चार अपनों की मौत के बाद मातम पसरा है। मकान का मलबा परिवार की खुशियों के उजड़ने की कहानी बयां कर रहा है।

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मृतक माया - फोटो : amar ujala

मलबे से निकली थी चौथी बेटी काजल

मकान गिरने के बाद मलबे में मुकेश सिंह और उनकी चार बेटियां दब गई थीं। राहत-बचाव में जुटे ग्रामीणों ने कड़ी मशक्कत के बाद काजल को मलबे से बाहर निकाला। हादसे में गंभीर रूप से घायल काजल को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, जहां उनका उपचार चल रहा है। काजल की हालत स्थिर बताई जा रही है।

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मृतक नीतू - फोटो : amar ujala
हिरनी गांव में हादसे की टाइम लाइन

-रविवार सुबह करीब 10:15 बजे मकान धराशाई।

-सुबह 10:20 बजे ग्रामीण रेस्क्यू करने में जुटे।

-10:50 बजे पड़ोसी अंबुज ने पुलिस को दी सूचना।

- 11:02 बजे घटनास्थल पर पीआरवी पुलिस पहुंची।

-11:11 बजे सबसे पहले बेटी माया को निकाला।

-11:16 बजे पिता मुकेश को निकाला गया।

-11:24 बजे बेटी पल्लवी को निकाला।

-11:26 बजे साढ़ पुलिस घटनास्थल पर पहुंची।

-11:28 बजे घायल माया पतारा अस्पताल पहुंची।

-11:36 बजे बेटी नीतू को मलबे से निकाला।

-11:56 बजे बेटी काजल उर्फ लक्ष्मी को निकाला।

-01:15 बजे जाजमऊ व नरवल फायर ब्रिगेड पहुंची।

-01:28 बजे पतारा सीएचसी में एसीपी कृष्णकांत यादव पहुंचे।

-01:35 बजे पतारा अस्पताल में एसडीएम घाटमपुर पहुंचे।

-02:20 बजे मृत घोषित पल्लवी की सांस चलने की बात पर परिजन कानपुर ले गए।

-03:55 बजे एसीएमओ पहुंचे।

-04:30 बजे डीसीपी व एडीसीपी पहुचे।

-05:00 बजे सीएमओ पहुंचे।

-06:00 बजे जिलाधिकारी पहुंचे।

-07.15 बजे सभी शव पोस्टमार्टम हाउस भेजे गए।
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मृतक पल्लवी - फोटो : amar ujala

रविवार न होता तो बच जाती नीतू और पल्लवी की जान

हिरनी गांव में रविवार की सुबह पिता व तीन बेटियों की मौत के मामले में वहां मौजूद ग्रामीण बार-बार यही कह रहे थे कि काश ! आज रविवार न होता तो दोनों बेटियां नीतू और पल्लवी स्कूल में पढ़ाई कर रही होती और उनकी जान बच जाती। पूरा घर मलबे में तब्दील हो चुका है, बस एक अकेली दीवार अब भी खड़ी है। उस दीवार में बनी अलमारी में नीतू और पल्लवी की रखी कॉपी-किताबें दूर से दिखाई पड़ रही हैं। काॅपी किताबों को निहारते हर किसी के मन में बस यही सवाल उठ रहा है अब इन कॉपी-किताबों को कौन खोलेगा।
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मृतक मुकेश सिंह - फोटो : amar ujala

कैबिनेट मंत्री राकेश सचान ने बंधाया ढांढस

पतारा सीएचसी में डीएम के पहुंचने के कुछ देर बाद कैबिनेट मंत्री राकेश सचान भी पहुंचे। उन्होंने परिजनों से घटना को लेकर दुख व्यक्त किया और ढांढस बंधाया। मौके पर उपस्थित संबंधित प्रशासनिक अधिकारियों से वार्ता कर पीड़ित परिवार को शासन की ओर से हरसंभव सहायता शीघ्र उपलब्ध कराने तथा घायल के समुचित एवं बेहतर उपचार की व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए कहा।

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हिरनी गांव हादसा - फोटो : amar ujala

मृत घोषित बच्ची को गोद में लेकर महिला चीखी...सांसें चल रही हैं

पतारा सीएचसी में उस वक्त हड़कंप मच गया, जब शवों के बीच बिलख रही एक महिला रिश्तेदार ने एक बच्ची के जीवित होने का दावा किया। दरअसल महिला रिश्तेदार शवों के पास पहुंची और बारी-बारी से उनके चेहरों से कपड़ा हटाकर देख रही थी। अंत में जब उसने मुकेश की छोटी बेटी पल्लवी का चेहरा खोला, तो उसने दावा किया कि पल्लवी की सांसें अभी भी चल रही हैं, जिसे डॉक्टर ने मृत घोषित कर दिया था।
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हिरनी गांव हादसा - फोटो : amar ujala
बच्ची करीब चार घंटे तक अस्पताल में अन्य शवों के बीच सफेद चादर ओढ़कर पड़ी रही। महिला ने तुरंत बच्ची को गोद में उठाया और अस्पताल के बाहर भाग आई। उसने जोर-जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया कि बच्ची की सांस चल रही है। मौके पर कोई सरकारी एंबुलेंस न मिलने से परिजन निजी गाड़ी से बच्ची को लेकर कानपुर निजी अस्पताल पहुंचे। वहां भी उसे मृत बता दिया गया तो उसे वापस ले आए।
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