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विलुप्त हो रहा देश का बेहद खूबसूरत पक्षी, खोज में निकला भारतीय वन्य जीव संस्थान

Wed, 25 Apr 2018 11:10 AM IST
टीम डिजिटल, अमर उजाला, कानपुर
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'तुझमें क्या सुर्खाब के पर लगे हैं'। इस कहावत से हर कोई वाकिफ भी होगा। इसकी वजह यह है कि सुर्खाब देश का सुंदरतम पक्षी माना जाता है। भारतीय वन्य जीव संस्थान देहरादून की टीम गंगा किनारे रहने वाले इसी तरह के पक्षियों की खोज करने निकली है। एक सप्ताह बाद यह कानपुर भी पहुंचेगी। सोमवार को वन्य जीव संस्थान की एक दूसरी टीम यहां गंगा के जल का परीक्षण कर चुकी है।  पिछली बार यहां आई टीम को काफी निराश होना पड़ा था। टीम की रिपोर्ट में बताया गया था कि सुर्खाब जैसे पक्षियों और गंगा में पाए जाने वाले जलीय जंतुओं का कानपुर में गंगा से दूर-दूर तक का रिश्ता नहीं है। प्रदूषण को इसकी प्रमुख वजह मना गया था। 
 
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बिजनौर से पश्चिम बंगाल के हल्दिया के समीप स्थित नूरपुर तक गंगा किनारे रहने वाले पक्षियों और गंगा में रहने वालेे वन्य जीवों का अध्ययन किया जा रहा है। साथ ही टीम इस बात का भी अध्ययन करेगी कि जिन जगहों पर पक्षी और जलीय जंतु अधिक मिलते हैं तो इसकी वजह क्या है। अगर इनका अभाव है तो उसका कारण क्या है। गंगाजल की गुणवत्ता कहां किस तरह की है। गंगा में जलीय जंतुओं और उसके किनारे रहने वाले पक्षियों के स्वास्थ्य पर उसका किस तरह का असर पड़ रहा है। इसका भी अध्ययन किया जाएगा। बताते चलें कि पिछली बार जब विशेषज्ञों की टीम कानपुर आई थी तो उन्हें मुंह पर रुमाल रखकर गंगा के पानी का परीक्षण करना पड़ा था। टीम के वही सदस्य फिर आ रहे हैं। 
 
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इन वन्य जीवों पर हो रहा सर्वे

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गंगेटिक डाल्फिन, घड़ियाल, कछुआ। पक्षियों में सुर्खाब, इंडियन स्टीमर, रेडिस एल्डक के अलावा कई अन्य प्रजातियां जो गंगा में पाई जाती हैं।
 
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गंगा के इन स्थानों से गुजरेगी टीम

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बिजनौर, मेरठ, बरेली, अलीगढ़, कानपुर, इलाहाबाद, बनारस, पटना, हल्दिया


भारतीय वन्य जीव संस्थान की तरफ से गंगा के अंदर और उसके किनारे रहने वाले जीव जंतुओं की संख्या और वहां के रहन सहन का पता लगाया जा रहा है। जगह-जगह गंगा में और उसके किनारे के क्षेत्रों में प्रदूषण की क्या स्थिति है, इसकी भी जांच की जा रही है।
-आफताब ए उस्मानी, टीम लीडर
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