फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुलवामा आतंकी हमलाः घर पहुंची शहादत की खबर से जिले में मचा कोहराम, जाते समय पत्नी से कही थी ये बात

Fri, 15 Feb 2019 10:57 AM IST
प्रभापुंज मिश्रा यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
विज्ञापन
1 of 6
डेमो पिक
जम्मू कश्मीर के पुलवामा में हुए फिदायीन हमले में इटावा के रहने वाले सीआरपीएफ के हेड कॉन्स्टेबल रामवकील माथुर शहीद हो गए।शहादत की खबर सुनकर घर में कोहराम मच गया। हेड कॉन्स्टेबल रामवकील माथुर के शहीद होने की खबर जब घर पहुंची तो पूरे जिला गम में डूब गया। 
 

 
विज्ञापन

2 of 6
डेमो पिक
इटावा के अशोक नगर इलाके में अपने मायके में रह रहीं गीता और उसके तीन बेटे और गीता के मां बाप को जब यह पता चला कि उनके दामाद रामवकील माथुर की पुलवामा जम्मू कश्मीर में एक आतंकी हमले में शहीद हो गये। लोगों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। बड़े बेटे राहुल की उम्र 12 वर्ष है।जो केंद्रीय विद्यालय में कक्षा 8 का छात्र है और उससे 2 साल छोटा साहुल जो कक्षा 7 में पढ़ता है।

 
विज्ञापन

3 of 6
डेमो पिक
दोनों अपने पापा को याद करते हुए अपने नाना ओर नानी की गोद से हटने का नाम नहीं ले रहे है। सबसे छोटा बेटा अंश भी अपनी माँ की गोद मे रोते हुए जानने की कोशिश कर रहा है कि आखिर हुआ क्या घर मे चीख पुकार क्यों मची है 4 साल का अंश नहीं जानता कि उसके पापा अब कभी घर वापिस नहीं आएंगे, वही गीता रोते हुए बता रही है कि पिछले रविवार को ही तो उनके पति यह कहकर घर से गये थे कि अगले महीने घर वापिस आ कर मकान बनवाएंगे।

 

4 of 6
डेमो पिक
मैनपुरी ज़िले के दन्नाहार थाने के विनायपुरा गाँव के रहने वाले रामवकील 2001 में सिपाही के पद से सीआरपीएफ में भर्ती हुए थे, 2003 में उनकीं शादी इटावा के अशोक नगर निवासी दिवारी लाल की पुत्री गीता के साथ हुई थी, जम्मू में तैनाती से पहले रामवकील अलीगढ़ में तैनात थे, पिछले दो साल बच्चो की बेहतर शिक्षा के लिए शहीद ने अपने दोनों बड़े बेटे राहुल और साहुल का दाखिला केंद्रीय विद्यालय इटावा में करवा दिया था जिस कारण गीता अपने तीनों बच्चों को लेकर मायके में रह रही थीं।

 
विज्ञापन

5 of 6
डेमो पिक
गीता के पिता उत्तर प्रदेश पुलिस में सिपाही के पद पर कानपुर में तैनात है, गीता के ससुराल मैनपुरी में उनके ससुर पहले ही खत्म हो गये थे घर में अकेले उनके पति ओर उनकी मां थी। शहीद रामवकील की पत्नी बताती है कि छुट्टी से वापिस जाते समय उनके पति कहकर गये थे कि अगले महीने मार्च में आकर लॉन निकाल कर अपना खुद का मकान बनवाएंगे। अब उन्हें मायके में रहते हुए अच्छा नहीं लगता।इसलिए इटावा में ही एक उनका प्लॉट पड़ा है।

 
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
डेमो पिक
जिसको शहीद लॉन लेकर बनवाने वाले थे, शहीद का बड़ा बेटा राहुल जो कक्षा 8 में पड़ता है और फुटबॉल का शौकीन है अभी वह अपने पिता के साथ आगरा छात्रावास की ट्रायल देने गया था, वही शहीद की पत्नी की सरकार से नाराजगी भी दिखी सरकार कुछ करना नहीं चाहती है तभी यह सब हो रहा है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें