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डाटा को सुरक्षित रखने में कारगर एन्क्रिप्शन तकनीक, विशेषज्ञों ने बताए साइबर हमलों से बचाव के तरीके

Wed, 19 Dec 2018 04:26 PM IST
शिखा पांडेय यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- विशेषज्ञों ने साइबर हमलों से बचाव के तरीके बताए
- आईआईटी में चल रही सिक्योरिटी, प्राइवेसी और क्रिप्टोग्राफी इंजीनियरिंग पर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस
 
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इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस स्पेस-2018
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विस्तार
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आईआईटी कानपुर में सिक्योरिटी, प्राइवेसी, एप्लाइड क्रिप्टोग्राफी और क्रिप्टोग्राफी इंजीनियरिंग पर चल रही तीन दिवसीय इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस स्पेस-2018 के दूसरे दिन मंगलवार को साइबर विशेषज्ञों ने साइबर हमलों से बचाव के तरीके बताए।
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विशेषज्ञों ने बताया कि विभिन्न महत्वपूर्ण विभागों की सूचनाओं को साइबर हमले से बचाने के लिए इस समय एन्क्रिप्शन (सूचना को कोड में भेजना) तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। आधार कार्ड, बैंकिंग, सेना, न्यूक्लियर पॉवर प्लांट आदि के डाटा को सुरक्षित रखने के लिए इसी माध्यम का प्रयोग हो रहा है। कॉन्फ्रेंस में पीएचडी स्कॉलर ने रिसर्च पेपर भी प्रस्तुत किए।

विशेषज्ञों ने बताया कि चूंकि सूचनाओं का माध्यम इंटरनेट, कंप्यूटर और मोबाइल हैं, इसलिए हैकर आसानी से डाटा चोरी कर सकते हैं। इजराइल की यूनिवर्सिटी ऑफ हाइफा के प्रो. शाय गुयेरोन ने बताया कि हम जो भी मैसेज भेजते हैं, वह मूल रूप में न जाकर कंप्यूटर या मोबाइल की भाषा (बाइनरी नंबर) में जाता है। इस सूचना को और भी सुरक्षित बनाने के लिए इसको कोड में बदला जाता है। किसी भी कोड को तोड़ने के लिए कोड की (चाभी) की जरूरत पड़ती है।
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ऐसे में अगर कोड की आसान है तो हैकर उसे तोड़ने में कामयाब हो जाते हैं और साइबर हमलों का खतरा बना रहता है। यही एन्क्रिप्शन तकनीक है। उन्होंने बताया कि कैसे एन्क्रिप्शन तकनीक को फास्ट किया जाए जिससे कंप्यूटर के हार्डवेयर पर भी असर न पड़े और मैसेज को कोड और अनकोड करने में समय न लगे।

उन्होंने बताया कि नामीगिरामी कंपनियों के प्रोसेसर में भी हैकर साइड चैनल ढूंढ सकते हैं। हालांकि अगर प्रोसेसर की कोडिंग बेहतर है तो आप साइबर हमलों से बच सकते हैं। उन्होंने सॉफ्टवेयर के साथ हार्डवेयर के सही ढंग से प्रयोग करने की जानकारी भी दी। बताया कि एल्गोरिदम (प्रोग्राम लिखने का आधार) मजबूत हो तो भी साइबर हमले से बचा जा सकता है।

आईएसआई (इंडियन स्टेटिस्टिकल्स इंस्टीट्यूट) कोलकाता के प्रो. मृदुल नंदी ने बताया कि सॉफ्टवेयर चोरी को पीयूएफ (फिजिकली अनक्लोनेबल फंक्शन) से रोका जा सकता है। कहा कि पीयूएफ के जरिये हर चिप में एक यूनिक आईडेंटिटी (यूआई) होगी जिससे डाटा को साइबर अटैक से बचाया जा सकता है। कार्यशाला के बाद ऑस्ट्रेलिया, इजराइल, कंबोडिया आदि देशों से आए वैज्ञानिक जेके मंदिर, सुधांशु आश्रम बिठूर और गंगा बैराज भी गए।
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