पश्चिम बंगाल से डॉक्टरों में धधकी आग ने अब प्रचंड रूप ले लिया है। पूरे देश में डॉक्टर सीएम ममता बनर्जी का विरोध कर रहे हैं। ऐसे में डॉक्टरों की हड़ताल के कारण सोमवार को हैलट में इलाज न मिलने के कारण चार रोगियों की मौत हो गई। दो की मौत इमरजेंसी में हुई और दो अन्य मरीजों ने हैलट से लौटते वक्त दम तोड़ दिया।
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हैलट अस्पताल के गेट पर इंतजार करती मरीज
- फोटो : अमर उजाला
जीएसवीएम मेडिकल कालेज के रेजीडेंट डॉक्टरों ने हैलट की ओपीडी और इमरजेंसी भी बंद करा दी और मरीजों को धक्के मारकर बाहर निकाल दिया। इस पर गुस्साए तीमारदारों ने हैलट के सामने मुख्य मार्ग पर जाम लगा दिया। हंगामे के दौरान हैलट इमरजेंसी में भी काम ठप हो गया। मरीजों के आपरेशन टालने पड़े।
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हड़ताल के दौरान डॉक्टर
- फोटो : अमर उजाला
कार्डियोलोजी, कैंसर इंस्टीट्यूट, जच्चा-बच्चा और बालरोग अस्पताल में भी काम प्रभावित हुआ। जिला अस्पताल उर्सला, डफरिन और दूसरे सरकारी अस्पतालों में मरीज देखे जाते रहे। कोलकाता एनआरएस मेडिकल कालेज में डॉक्टर के साथ मारपीट की घटना के विरोध में इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर डॉक्टर हड़ताल पर रहे। निजी अस्पतालों की ओपीडी भी बंद रही।
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हैलट अस्पताल में मरीज
- फोटो : अमर उजाला
तय हुआ था कि हैलट और मेडिकल कालेज के दूसरे संबद्ध अस्पतालों में रेजीडेंट हड़ताल पर रहेंगे लेकिन इमरजेंसी सेवाएं बहाल रहेंगी। आपरेशन होंगे। सीनियर कंसल्टेंट मरीज देखेंगे। लेकिन सोमवार को सारा दृश्य उलट गया। रेजीडेंट डाक्टरों ने ओपीडी बंद करा दी। परचा काउंटर भी बंद करा दिए गए और मरीजों को बाहर निकालकर ओपीडी के चैनल पर ताला लगा दिया।
मरीजों के तीमारदारों से धक्कामुक्की हुई। ओपीडी बंद कराने की सूचना हैलट के प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. आरके मौर्या को नहीं दी गई। ओपीडी बंद होने के बाद हैलट का माहौल बिगड़ गया और हंगामा शुरू हो गया। इस दौरान इमरजेंसी में काम कर रहे रेजीडेंट भी बाहर निकल आए। ओपीडी से निकाले जाने से गुस्साए तीमारदारों ने सामने सड़क पर जाम लगाकर हंगामा किया।