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Doctors day 2018: इनको यूं ही नहीं कहते 'धरती का भगवान', तारीफ करते थकेंगे नहीं आप

Sun, 01 Jul 2018 08:11 AM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर
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डॉक्टर्स डे - फोटो : अमर उजाला
कहते हैं डॉक्टर भगवान का रूप होते हैं और भगवान के इसी अवतार के सम्मान प्रकट करने के लिए धरती पर एक जूलाई को डॉक्टर्स डे मनाया जाता है। इस पर उनकी कार्यशैली जिसमें रात हो या दिन.. ड्यूटी पर रहते हुए ही नहीं, ड्यूटी के बाद भी..। मरीज कौन हैै.., गरीब है.. अमीर हैै, उसका मजहब क्या है। कोई फर्क नहीं पड़ता। उनके कदम बढ़ चलते हैं। एक ही मकसद सिर्फ मरीज के दर्द को दूर करना। तभी तो लोग इनको धरती में भगवान का दूसरा रूप मानते हैं। समाज के लिए वह रोल मॉडल हैं। इस डॉक्टर्स डे पर यूपी में औरैया जिले के कुछ ऐसे ही ही डॉक्टरों पर पेश है एक रिपोर्ट-
 
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डॉक्टर्स डे - फोटो : अमर उजाला
ऐसे बहुत ही कम चिकित्सक होंगे जो मरीज के सिर पर हाथ रखते हो, उसका हाथ अपने हाथों में लेकर हालचाल पूछते हों। बीमारी और आराम के बारे में ऐसे पूछते हों, जैसे वह कोई परिवार का सदस्य हो। ऐसा करते दिखे तो समझ जाइए वह डॉ. गिरिराज नरायन अग्रवाल हैं। सामान्य परिवार में पले बढ़े डॉ. गिरिराज (एमबीबीएस एमडी) हर मरीज को अपने परिवार के सदस्य जैसा मानते हैं। डॉ. गिरिराज ने सोचा भी न था कि चिकित्सक बनने के बाद उन्हें लोग इस तरह चाहेंगे। आज वह कई सामाजिक संगठनों से जुड़कर गरीबों और असहायों को निशुल्क स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन कर उन्हें निशुल्क दवाएं देते हैं। अपने नर्सिंग होम में आने वाले गरीब और जरूरतमंद का इलाज भी निशुल्क करने से पीछे नहीं हटते। शायद इसी वजह से इनके मरीज इनको भगवान से कम नहीं मानते। 
 
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डॉक्टर्स डे - फोटो : अमर उजाला
मूल रूप से जालौन जनपद के गांव रमपुरा निवासी डॉ. जीपी चौधरी जिला संयुक्त चिकित्सालय में बालरोग विशेषज्ञ के पद पर हैं। वह अस्पताल में भीड़ को देखते हुए बच्चों के अलावा अन्य रोगियों का परीक्षण भी करते हैं। बालरोग विशेषज्ञ डॉ. जीपी चौधरी ने बताया कि वह मरीजों के लिए हमेशा से समर्पित हैं। जब वह इंटर में थे, तब गांव के एक व्यक्ति को इलाज न मिल पाने पर उन्होंने डॉक्टर बनने की बात कही। जिस पर गांव के एक व्यक्ति ने उनसे कहा था कि वह डॉक्टर नहीं बन पाएगा। तब से ठान लिया था कि अब डॉक्टर बनना है कि अपना जीवन मरीजों को समर्पित करना है। तब से लेकर आज तक वह रोगियों का इलाज प्रभु सेवा समझ कर करते हैं। 
 

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डॉक्टर्स डे - फोटो : अमर उजाला
जिला अस्पताल में महिला चिकित्सक के पद पर काम करने वालीं डॉ. सीमा अपनी ड्यूटी निभाने के साथ-साथ सामाजिक सरोकार में भी पीछे नहीं हटतीं। महिला चिकित्सक होने के नाते वह गंभीर महिला मरीजों को देखना पड़ता है। उनकी माने तो कई बार उन्होंने ड्यूटी पर न होते हुए भी देर रात मरीजों की दिक्कत को देखते हुए उनका इलाज किया। राहत मिलने के बाद ही मरीज का हाल लेने के बाद ही घर गईं। 
 
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डॉक्टर्स डे - फोटो : अमर उजाला
जीवन बहुत ही महत्वपूर्ण है। ऐसे में कोई भी इलाज न होने पाने की वजह से न मरें। इसके लिए डॉ. प्रार्थना इस पेशे में आईं। उन्होंने अपने पिता  डॉ. गिरिराज नरायन अग्रवाल को गरीबों का इलाज करते और उनकी रही दुआओं से प्रेरित होकर एमबीबीएस की डिग्री प्राप्त की। डॉ. प्रार्थना ने बताया कि रुपया उनके लिए कोई मायने नहीं रखता। उनका मकसद अपने मरीज को बेहतर इलाज उपलब्ध कराना है। जिससे कि उसकी पीड़ा को कम किया जा सके। इसके बदले में मरीज से जो आशीर्वाद मिलता है, सही मायने में वहीं है हमारी सेवा का प्रतिफल है। 
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