नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में देश में सबसे ज्यादा हिंसा कानपुर में हुई। उपद्रवियों ने लगातार दो दिन तक गोलीबारी, आगजनी और तोड़फोड़ करके कानून व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। इसकी वजह से प्रदूषण के बाद अब कानपुर पूरे देश में हिंसा और उपद्रव के लिए भी बदनाम हो गया।
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कानपुर में हिंसा
- फोटो : अमर उजाला
सोमवार को डीएम विजय विश्वास पंत ने अमन के लिए शहरकाजी समेत अन्य लोगों के साथ हुई बैठक में हिंसा पर चिंता जाहिर करते हुए यह बातें कहीं। हालात से क्षुब्ध डीएम बोल पड़े कि हिंसा और उपद्रव से कानपुर का देशभर में बदनाम होना अच्छी बात नहीं है।
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रूपम गेस्ट हाउस के पास स्थित गरीब नवाज गेस्ट हाउस में हुई बैठक में डीएम ने कहा कि कानून बनते रहते हैं, लेकिन इसकी वजह से अपनों के बीच दिलों में इतनी नफरत नहीं पैदा होनी चाहिए कि खुद के शहर में आग लगा दें। हाथ में पत्थर लेकर उपद्रव करने वाले नकाब के पीछे कौन चेहरे हैं यह हम सबको अच्छी तरह पता है। लोगों को उकसाकर उनके हाथ में पत्थर पकड़ाने वाले तो अपना मकसद पूरा करके चले जाएंगे। लेकिन उनके बहकावे में आने वालों को सोचना है कि आग तो खुद केशहर में लगा रहे हैं। हम नकाबपोश पत्थरबाजों को पकड़कर बेनकाब करेंगे।
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जाने कितने घरों के चूल्हे नहीं जले
डीएम ने कहा कि उपद्रव करने वालों को शायद अंदाजा भी न हो कि दो दिन में शहर में कितने गरीबों, मजदूरों के घरों में चूल्हे नहीं जले। उनके बच्चे भूख से बिलखकर सो गए, लेकिन खौफजदा मां-बाप रोटी के जुगाड़ में बाहर नहीं निकले। उपद्रव में शहर का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ। बैठक में शामिल लोगों ने डीएम का समर्थन करते हुए प्रदर्शन और उपद्रव करने वालों को रोकने के लिए घर-घर जाकर अपील करने का वादा किया।
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बच नहीं पाएंगे उपद्रव में शामिल आरोपी
एसएसपी अंनत देव ने बैठक में कहा कि उपद्रवियों ने शहर की कानून व्यवस्था को ध्वस्त कर दिया। हमारे सिपाही को गोली लगी। कई जवान और अफसर घायल हो गए। हिंसा करने वालों में शामिल चेहरों को पहचानते हुए भी लोग उनका नाम बताने में डर रहे हैं। पुलिस खुद उनका पता लगाकर पकड़ने का प्रयास कर रही है तो दबिश न देने का दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि उप्रदव में शामिल कोई आरोपी बच नहीं पाएगा। इसपर शहर काजी सहित बैठक में शामिल लोगों ने पुलिस का सहयोग करने का भरोसा दिलाया।
अपने ही लोग कहते हैं पुलिस का मुखबिर
डीएम, एसएसपी के साथ अमन की बैठक में शामिल शहर काजी आलम रजा नूरी ने कहा कि हमारे ही बच्चे हमारी बात नहीं मान रहे। हिंसा रोकने के लिए मैंने उन्हें समझाने का प्रयास किया तो मुझे पुलिस का मुखबिर कहने लगे। फिर भी मैं लगातार अपील कर रहा हूं। विवाद से मसले हल नहीं होते। उनकी बात पर डीएम ने कहा कि संवैधानिक तरीके से विरोध होना चाहिए। मदरसा अहसनुल मदरिस (कादीम) के प्रबंधक मुमताज सिद्दकी ने कहा कि नकाबपोश पत्थरबाजों को पहचानते हुए भी हम उनका नाम नहीं ले सकते हैं। लेकिन उन्हें खुद समझना चाहिए कि किसी बहकावे में आकर अपने शहर के अमन को आग न लगाएं।