महोबा जिले में शनिवार शाम को हुई जोरदार बारिश के चलते एक बार फिर जिला अस्पताल टापू बन गया। इमरजेंसी वार्ड से लेकर जिला अस्पताल की गैलरी, महिला अस्पताल में दो-दो फिंट पानी भर गया।
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जिला अस्पताल बना टापू
- फोटो : अमर उजाला
इमरजेंसी में इलाज कर रहे डॉक्टर और कर्मचारी दो-दो फिट पानी में ही इधर-उधर चलते-फिरते रहे। अस्पताल परिसर में चारों तरफ पानी भर जाने से लोगों का काफी दिक्कतें हुईं।
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पंद्रह दिन पहले हुई तेज बारिश से अस्पताल के कक्षों, इमरजेंसी वार्ड सहित जगह-जगह पानी भरने पर जिलाधिकारी अवधेश कुमार तिवारी ने अस्पताल में पानी की समस्या का निराकरण कराने के अधिशासी अधिकारी नगर पालिका और लोक निर्माण विभाग के अभियंताओं को निर्देश दिए थे।
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जिला अस्पताल बना टापू
- फोटो : अमर उजाला
अभियंता लाख प्रयास के बाद भी अस्पताल में जलभराव की समस्या को नहीं रोक सके। शाम को हुई तेज बारिश के बाद अस्पताल परिसर में तेजी से पानी अंदर आने के कारण महिला अस्पताल के वार्डों में फर्श पर लेटे तीमारदार व गैलरी में बैठे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते इमरजेंसी वार्ड सहित चारों तरफ पानी भर गया। जलभराव से मरीजों का इमरजेंसी तक पहुंचना मुश्किल हो गया था।
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लाखों रुपये के खर्च के बाद भी नहीं बदली अस्पताल की तस्वीर
प्रशासन ने जिला अस्पताल में जलभराव को रोकने के कई प्रयास किए, लेकिन नतीजा कुछ नहीं निकला। नगर पालिका और स्वास्थ्य विभाग ने नाला निर्माण कर, अस्पताल के दरवाजों का उच्चीकरण, अस्पताल परिसर में दो-दो फुट ऊंची बाउंड्री का निर्माण और दस गुणा दस का चैंबर व दो मोटर पंप लगाने में लाखों रुपये खर्च कर दिया, लेकिन अस्पताल में जल भराव की समस्या जस की तस बनी है।
जलभराव के चलते नहीं मिला इलाज
अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में जलभराव के चलते डॉक्टरों के इधर-उधर हो जाने से मरीज इलाज के लिए परेशान रहे। शहर के दिनेश चौरसिया ने बताया कि उनके चार साल के बेटे वेद चौरसिया ने माथे की बिंदी नाक में डाल ली। बिंदी फंस जाने के कारण वह बेटे को लेकर जिला अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड पहुंचे, लेकिन जल भराव के चलते कर्मचारियों ने उन्हें इमरजेंसी वार्ड से भगा दिया।