प्रतिवर्ष कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी यानी दीपावली से दो दिन पहले धनतेरस का पर्व धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने घर के दरवाजे के पास दीया जलाते हैं। साथ ही नया बर्तन या सोना-चांदी खरीदते हैं।
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मान्यता के अनुसार इस दिन एक खास उपाय भी किया जाता है जिससे न सिर्फ अकाल मृत्यु से छुटकारा मिलता है बल्कि घर धन-धान्य से भर जाता है।
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ज्योतिषाचार्य व पंडित डॉ. नरेंद्र दीक्षित के अनुसार धनतेरस के दिन घर के मुख्य द्वार पर एक दीया जलाने की मान्यता का विशेष महत्व है।
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प्राचीन समय में हेम नाम का एक राजा रहता था। विवाह के कई सालों बाद उसकी एक संतान हुई। जब ज्योतिषियों से राजा ने पूछा तो पता चला की राजकुमार के विवाह के ठीक चार दिन बाद उसकी मृत्यु हो जाएगी।
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यह बात जानकार राजा और रानी बहुत दुखी हो गए। धीरे-धीरे समय बीतता गया और राजकुमार ने गन्धर्व विवाह कर लिया। विवाह के चार दिन बाद यमदूत राजकुमार के प्राण लेकर चले गए लेकिन राजकुमार की पत्नी के शोक विलाप को देखकर उन्होंने यमराज से पूछा की कोई ऐसा उपाय नहीं है जिससे इंसानों की अकाल मृत्यु न हो सके।
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यमराज ने इसका उपाय बताते हुए कहा की कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी की रात को जो मनुष्य दक्षिण दिशा की ओर दीप जलाएगा वो अकाल मृत्यु से बच सकता है। तभी से धनतेरस के दिन दीया जलाने की परम्परा की शुरुआत हुई।
शाम 6.05 बजे से शाम 8.01 बजे तक
अवधि- 1 घंटा 55 मिनट
प्रदोष काल- शाम 5.29 से रात 8.07 बजे तक
वृषभ काल- शाम 6.05 बजे से रात 8.01 बजे तक
त्रयोदशी तिथि आरंभ- 5 नवंबर, सुबह 01.24 बजे से
त्रयोदशी तिथि खत्म- 5 नवंबर, रात्री 11.46 बजे