फर्रुखाबाद जिले के मोहम्मदाबाद में पांच लाख रुपये के लालच में पड़ोसी ने ही दो दिन पहले बालिका का अपहरण कर हत्या कर दी। शव को घर में बने शौचालय के टैंक में बोरी में भरकर फेंक दिया। पुलिस ने पड़ोसी युवक, उसके सेवानिवृत्त शिक्षक पिता व पत्नी को पुलिस ने गिरफ्तार लिया है।
पुलिस ने टैंक से किशोरी का शव बरामद पोस्टमार्टम को भेज दिया। कोतवाली क्षेत्र के गांव खिमसेपुर निवासी किसान समरजीत प्रजापति की दस वर्षीय पुुत्री आकांक्षा मंगलवार शाम दरवाजे पर खेल रही थी। इसके बाद वह लापता हो गई। तलाशने पर भी उसका पता नहीं चला।
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अपहरण कर बालिका की हत्या का मामला
- फोटो : अमर उजाला
पुलिस ने पिता की तहरीर पर गुमशुदगी दर्ज कर उसे अपहरण के मुकदमे में तरमीम कर लिया। बुधवार को अपहरण करने वाले ने आकांक्षा के भाई रामू के मोबाइल पर फोन करके छह लाख रुपये की फिरौती मांगी। रामू के पास जिस मोबाइल नंबर से काल आई, वह उसके पिता समरजीत का ही था।
वह मोबाइल फोन भी आकांक्षा के लापता होने पर घर से गायब हो गया था। रामू ने काल करने वाले को बातों में उलझाए रखा और कुछ रुपये कम करने की बात कही। इस पर काल करने वाले ने पांच लाख रुपये देने पर आकांक्षा को सुरक्षित देने की बात कही। रामू ने इसकी जानकारी पिता समरजीत को दी।
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उन्होंने कोतवाल राकेश कुमार व एसओजी प्रभारी जेपी शर्मा को फिरौती के लिए कॉल के बारे में बताया। सर्विलांस के जरिए छानबीन शुरू की गई तो मोबाइल नंबर की लोकेशन गांव में ही मिली। पुलिस ने गांव के ही चंद्रशेखर को दबोच लिया।
पूछताछ के बाद चंद्रशेखर ने मोबाइल से फोन करके फिरौती मांगने की बात स्वीकार कर ली। उसने पुलिस को बताया कि आकांक्षा की मंगलवार को ही हत्या कर दी थी। गुरुवार को शव को बोरे में भरकर शौचालय के टैंक में फेंक दिया था।
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इस काम में रिटायर्ड शिक्षक पिता सुरेश चंद्र व पत्नी गीता ने सहयोग किया। पुलिस ने चंद्रशेखर की निशानदेही पर उसके घर में बने शौचालय के टैंक से बोरी में भरा बालिका का शव बरामद कर लिया। पुलिस ने चंद्रशेखर के पिता व पत्नी को भी गिरफ्तार कर लिया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।
पिकअप चालक की सक्रियता से खुल गई पोल
मंगलवार को ही चंद्रशेखर ने आकांक्षा की हत्या कर दी थी। उसी रात चंद्रशेखर ने गांव के ही पिकअप चालक से एक बोरी को काली नदी तक फेंकने की बात कही थी लेकिन चालक राजी नहीं हुआ। बुधवार को चंद्रशेखर ने फिर से पिकअप चालक को फोन करके दस हजार रुपये देने का लालच भी दिया।
अपहरण कर बालिका की हत्या का मामला़
- फोटो : अमर उजाला
इस पर चालक को शक हो गया और उसने प्रधान महेंद्र को पूरी घटना की जानकारी दी। प्रधान ने कोतवाल राकेश कुमार को चंद्रशेखर के बारे में पूरी बात बताई। पुलिस तभी से चंद्रशेखर के घर की निगरानी करने लगी।
आखिर क्यों बांधे थे किशोरी के हाथ-मुंह व पैर
किशोरी आकांक्षा अक्सर खेलते हुए आरोपी चंद्रशेखर के घर आ जाती थी। मंगलवार को चंद्रशेखर आकांक्षा को बहला घर ले गया था। उसने हत्या करने से पहले टेप से उसका मुंह व हाथ पैर कस कर बांध दिए थे। जब उसका शव बरामद हुआ तो हाथ-पैर व मुंह टेप से कसा मिला। चंद्रशेखर को डर था कि कहीं वह शोर न मचा दे।