मध्यप्रदेश के ग्वालियर में ऑडिटर के पद पर तैनात परास गांव निवासी कोरोना संक्रमित राहुल तिवारी की इलाज न मिलने से मौत हो गई। 20 दिन पहले ग्वालियर में उनके कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई थी। वहां किसी अस्पताल में बेड न मिलने पर परिजन घर ले आए थे। यहां वह होम आइसोलेशन में थे। इस बीच, परिजन अस्पतालों में बेड की तलाश में लगातार भटकते रहे।
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कोरोना से मचा कोहराम
- फोटो : amar ujala
आला अफसरों से भी सिफारिश की, पर सुनवाई नहीं हुई। श्रीओम तिवारी के 28 वर्षीय पुत्र राहुल ग्वालियर में कैग (नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक) कार्यालय में ऑडिटर थे। तबीयत खराब होने पर जांच कराई तो रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। मौसेरे भाई रामेंद्र तिवारी ने बताया कि ग्वालियर में किसी अस्पताल ने भर्ती नहीं किया, तो वह गांव लौट आए।
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यहां परिजन इलाज के लिए उन्हें सरकारी और निजी अस्पतालों में लेकर भटकते रहे। अंतत: होम आइसोलेशन में रखने पर मजबूर हुए। इस बीच, उनकी सेहत में कुछ सुधार भी था, लेकिन बुधवार को राहुल को सांस लेने में दिक्कत होने लगी। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कोविड कमांड सेंटर के नंबरों पर फोन किया, पर मदद नहीं मिली। इसके बाद मंडलायुक्त कार्यालय में तैनात एक रिश्तेदार की सिफारिश पर कल्याणपुर निजी कोविड अस्पताल में बेड खाली होने की जानकारी मिली।
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इस बीच राहुल की हालत बिगड़ती चली गई। परिजन उन्हें देर रात एंबुलेंस से अस्पताल के लिए लेकर निकले। लेकिन, अस्पताल पहुंचने से पहले गुरुवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे रास्ते में ही दम तोड़ दिया। परिजनों का कहना है कि 20 दिन के भीतर राहुल को अस्पताल में भर्ती कराने के लिए लखनऊ तक के अफसरों से गुहार लगाते रहे, पर कोई मदद को आगे नहीं आया।
आरटीपीसीआर जांच रिपोर्ट का करते रह गए इंतजार
रामेंद्र तिवारी ने बताया कि दो दिन पहले वह राहुल की कोरोना जांच कराने कानपुर भी गए थे, ताकि निगेटिव रिपोर्ट मिलने पर नॉन कोविड अस्पताल में भर्ती करा सकें। उनकी आरटीपीसीआर रिपोर्ट अब तक नहीं आई।