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चुप हो लाल...अब न आएंगी मम्मी, मां के आंचल को तड़पा पांच माह का शिवाय, बड़ी मुश्किल से बोतल को लगाया मुंह

Mon, 14 Sep 2020 07:38 PM IST
शिखा पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, फतेहपुर
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मां के आंचल को तड़पा पांच माह का शिवाय - फोटो : अमर उजाला
पांच माह का शिवाय, जिसने दुनिया में आने के बाद सिर्फ दो लोगों के साथ वक्त बिताया, वह उसकी मां रिंकी और पिता मनीष थे। लेकिन अफसोस वह अब इस दुनिया में नहीं हैं। बुरे वक्त के झोंके ने इन दोनों का साया मासूम शिवाय के सिर से हमेशा के लिए छीन लिया।

शिवाय को पता भी नहीं है कि उसने क्या खो दिया है लेकिन वह इतना जरूर महसूस कर रहा है कि अब उसके पास मां का आंचल, मां की थप्पी और ममता नहीं है। मां की मौत के बाद तो उसे नींद नहीं है। सो न पाने के कारण उसे बुखार भी आ गया। गोपालगंज पीएचसी में इलाज कराया गया।
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मां के आंचल को तड़पा पांच माह का शिवाय - फोटो : अमर उजाला
मां के दूध के लिए तड़प रहे शिवाय को दूध की बोतल रास नहीं आ रही। पेट खाली होने के कारण उसकी आंख से आंसू थम नहीं रहे हैं। सुबह से उसके दादी, दादा, चाचा, चाची गोद में लेकर चुप कराने का प्रयास कराते रहे लेकिन उसकी नजरें तो जैसे मां को ही तलाश रही थीं।

रह-रहकर दादी रो-रोते बोल ही पड़ी कि चुप हो जा मेरे लाल...अब तेरी मां नहीं आएगी। काफी प्रयास के बाद दादी चंदा देवी ने गाय का दूध चम्मच से पिलाकर उसे शांत किया और फिर सुलाया। 27 अगस्त की रात को उरई में महिला सिपाही के पति मनीष की हत्या के बाद बीते शुक्रवार को महिला सिपाही रिंकी ने भी ममिया ससुर के गाजीपुर के लोहटा स्थित घर पर फांसी लगाकर जान दे दी थी।
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बच्चे को दुलराते बाबा विश्वनाथ - फोटो : अमर उजाला
इसी के साथ मनीष और रिंकी की बचपन से चली आ रही प्रेम कहानी का एक दुखत अंत भी हो गया था। रिंकी ने खुदकुशी से पूर्व लिखे सुसाइट नोट में अपने पांच माह के बेटे शिवाय की देखरेख की जिम्मेदारी गौसपुर गांव में रहने वाले देवर मंजीत को सौंपी थी। अब शिवाय का मंजीत, बाबा-दादी ख्याल रख रहे हैं।  

बाबा विश्वनाथ ने बताया कि जन्म के बाद से वह कभी यहां नहीं आया था। अपनी मां और पिता के साथ ही रहा। यही कारण रहा कि उसे उन लोगों ने कभी देखा ही नहीं। इसलिए परिजनों को उसे शांत कराने में बड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस समय दादी चंदा देवी ही पूरी तरह देखभाल में लगी हैं।

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मां के आंचल को तड़पा पांच माह का शिवाय - फोटो : अमर उजाला
मां को थी जिस गांव से नफरत अब बेटे का वहीं होगा लालन पालन
यह बदले वक्त की कड़वी सच्चाई है कि पिता, भाई और मामा द्वारा पति मनीष की हत्या करने के बाद उसे जिस गौसपुर गांव के नाम से नफरत थी अब उसका बेटा शिवाय उसी गांव में पलेगा। पति की हत्या के बाद गौसपुर गांव जाना ही उसने बंद कर दिया।

यही कारण रहा कि पांच सितंबर को उरई से आने के बाद वह सीधे अपने ममिया ससुर के घर लोटहा गाजीपुर पहुंची थी। क्योंकि बच्चे के जन्म के बाद दो महीने तक ममिया ससुर के घर पर ही रहकर बच्चे का पालन पोषण किया था।
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बच्चे को सुलाने की कोशिश करती दादी चंदा देवी - फोटो : अमर उजाला
दुख कम होने पर ही संगम में विसर्जित करेंगे अस्थियां
मनीष के पिता विश्वनाथ सिंह कहते हैं कि परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। बेटे मनीष के जाने का गम तो था ही बहू रिंकी के जाने के बाद परिवार टूट गया है। थोड़ा गम कम हो तो संगम में अस्थियां विसर्जित करेंगे।

भाई की बहू से दूध पिलाने की करेंगे विनती
शिवाय अगर ऊपर का दूध नहीं पीता है तो भाई की बहू के आठ महीने की बेटी है उसी से दूध पिलाने की विनती करेंगे। वैसे कोशिश की है कि देशी गाय के दूध को पीने की आदत शिवाय डाल ले।
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बड़ी मुश्किल से शिवाय ने बोतल को लगाया मुंह - फोटो : अमर उजाला
बहू रिंकी के सपने को हर हाल में हकीकत में बदलेंगे
रिंकी के ससुर विश्वनाथ सिंह कहते हैं कि रिंकी का सपना था कि शिवाय पढ़कर अफसर बने। हम इसके लिए सभी परिवार के लोग पूरी जान लड़ा देंगे, जिससे रिंकी का सपना साकार हो जाए। उसके जीवन में पैसा रोड़ा नहीं बनेगा, यह रिंकी से वादा है।

मायके पक्ष के घर में अभी भी बंद है ताला
रिंकी के मायके के घर में अभी भी ताला बंद है। पड़ोसियों के अनुसार जब से मनीष की हत्या हुई है तब से सभी लोग गायब हैं। रिंकी के पिता प्रेम सिंह, पुत्र अंकित जेल में हैं। मां ज्ञानवती, छोटा पुत्र कंधई का कुछ पता नहीं है।
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बच्चे को चम्मच से दूध पिलाती दादी - फोटो : अमर उजाला
पड़ोसियों की मदद से बना भोजन
रिंकी की आत्महत्या की सूचना के बाद से घर में चूल्हा नहीं जला। सुबह पड़ोसियों की मदद से घर में भोजन बना और सभी ने खाना खाया। घटना के बाद से पड़ोस में सन्नाटा पसरा है। केवल रिश्तेदारों का आना जाना हो रहा।
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