सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर देश में हो रहे हंगामों और हिंसा पर कांग्रेस ने कहा है कि यह सब मौजूदा सरकार की दलित विरोधी नीतियों का नतीजा है। दलितों और कमजोर तबकों के लिए 1989 में कांग्रेस के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने एससी/एसटी एक्ट पारित किया था।
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डेमाे पिक
बांदा में बुधवार को कांग्रेस नेताओं के जत्थे ने प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजा। इसमें कहा है कि जिस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अपना निर्णय दिया है, उसमें महाराष्ट्र और केंद्र की भाजपा सरकारें पक्षकार थीं। कोर्ट में दलित वर्ग के हितों का मजबूती से पक्ष नहीं रखा गया। सिर्फ खानापूर्ति की गई।
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न्यायालय में महाधिवक्ता और सॉलिसिटर जनरल को न भेजकर अतिरिक्त सॉलिसिटर से पैरवी कराई गई। ज्ञापन मेें कहा कि कांग्रेस ने इस मुद्दे पर 20 मार्च को सही आवाज उठाई थी लेकिन भाजपा सरकारों ने कोई तवज्जो नहीं दी। नतीजे में देशभर में दलित आंदोलन फैल गया।
आंदोलनकारियों पर लाठी और गोली चलाई गई। एक दर्जन से ज्यादा लोगों की जानें गईं। ज्ञापन में यह भी कहा कि डा. अंबेडकर और महापुरुषों की मूर्तियां तोड़ने की घटनाएं बढ़ रही हैं। केंद्र सरकार राज्यों को इन पर रोक लगाने और दलित बाहुल्य इलाकों में पुख्ता सुरक्षा व्यवस्था किए जाने के निर्देश जारी करे। संसद में कानून बनाया जाए।