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कानपुर का दक्षिणी चक्रव्यूह भेदना कांग्रेस के लिए बना चुनौती, जीत का मंत्र तलाशने में जुटी पार्टी

Wed, 24 Apr 2019 11:56 AM IST
शिखा पांडेय आदर्श त्रिपाठी, अमर उजाला, कानपुर
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फाइल फोटो
कानपुर शहर में लोकसभा चुनाव में जीत का परचम लहराने की राह में कांग्रेसियों के लिए दक्षिणी चक्रव्यूह भेदना बड़ी चुनौती है। 2014 के लोकसभा के बाद से अब तक हुए तीन चुनाव में कांग्रेस दक्षिण क्षेत्र की किदवई नगर और गोविंद नगर विधानसभा सीट पर लगातार हार का सामना कर रही है।

भाजपा का गढ़ माने जाने वाली इन दोनों विधानसभा के लिए कांग्रेसी थिंक टैंक जीत का मंत्र तलाश रहा है। कांग्रेस प्रत्याशी रोजाना इन दोनों विधानसभाओं में उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं तो पार्टी की ओर से जुझारु कार्यकर्ताओं की टीम प्रचार के लिए लगाई गई है।
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लोकसभा चुनाव - फोटो : अमर उजाला
2014 में दो लाख वोटों का था अंतर
2012 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के अजय कपूर ने किदवई नगर सीट जीती थी। इसके दो साल बाद 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के डॉ. मुरली मनोहर जोशी ने कांग्रेस के श्रीप्रकाश जायसवाल को 2 लाख 22 हजार 946 वोटों के बड़े अंतर से हराया था। इस जीत में किदवई नगर और गोविंद नगर विधानसभा की बड़ी भूमिका थी। 2014 में भाजपा प्रत्याशी को गोविंद नगर से 1,24,474 तो कांग्रेस को महज 36,382 वोट मिले थे। किदवई नगर विधानसभा में भाजपा को 1,38, 625 तो कांग्रेस को महज 35, 965 वोट मिले। यानी करीब दो लाख वोटों का अंतर इन्हीं दोनों विधानसभा से मिला था।
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फाइल फोटो
विधानसभा चुनाव में भी लगा झटका
2017 में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को इन दोनों ही सीटों पर जोर का झटका धीरे से लगा था। कांग्रेसियों को किदवई नगर सीट पर अजय कपूर की हार से सबसे बड़ा सदमा लगा था। गोविंद नगर में कांग्रेस प्रत्याशी शैलेंद्र दीक्षित दूसरे नंबर पर रहे थे। 2017 में कांग्रेस का सपा से गठबंधन होने के कारण कांग्रेसी किदवई नगर के साथ ही गोविंद नगर सीट को भी अपना मानकर चल रहे थे। लेकिन हुआ इसका उलटा था।

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फाइल फोटो
कांग्रेस किदवई नगर की परंपरागत सीट बचा नहीं पाई, गोविंद नगर में हार अंतर भी बढ़ गया। 2012 में गोविंद नगर सीट पर भाजपा के सत्यदेव पचौरी ने कांग्रेस के शैलेंद्र दीक्षित को 12,377 मतों से हराया था। सपा केअशोक अंशवानी को 16,424 वोट मिले थे। 2017 में पचौरी ने कांग्रेस प्रत्याशी अंबुज शुक्ला को 71,509 वोटों से हरा दिया था। यानी सपा के वोट मिलने के बावजूद कांग्रेस की हार का अंतर बढ़ गया।
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फाइल फोटो
मेयर के चुनाव में भी मिली चुनौती
2017 में ही हुए निकाय चुनाव में कांग्रेस की मेयर प्रत्याशी बंदना मिश्रा को भी किदवई नगर और गोविंद नगर से ही कड़ी चुनौती मिली। किदवई नगर से भाजपा की प्रमिला पांडेय को 71,808 तो बंदना को 37,808 वोट मिले। गोविंद नगर में भाजपा को 74,711 और कांग्रेस को 43,446 वोट मिले थे। बाकी तीनों विधानसभा आर्य नगर, छावनी और सीसामऊ में कांग्रेस ने भाजपा को पछाड़ दिया था।
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