दोस्तों गरमी मा आपन कानपूर मा जो होत है ऊ बिलकुल अजब आय.. अजब मतलब गजब आय.. अभीन एक हफ्ता पहिले हम आपन यशोदा नगर वाली मौसी के हिंया गे रहन.. बताओ अईस भद्दर गरमी मा कहती हैं राजू जूता उतारि के आराम से बईठो हम तुमका गरम गरम चाय पियाई .. हम कहा इत्ती गरमी मा गरम चाय.. भईया अईस गरमी मा गरम गरम चाय अउर गरम गरम सोमोसा सिरिफ कानपूर वाले ही खवावत हैं.. लेकिन एक बात यहू आय कि लोहा लोहे को काटत है..
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राजू श्रीवास्तव
बताओ अईस भयंकर गरमी पड़ि रही कि चैन की सांस भी लेव तो नाक के बाल जल जाय रहे हैं.. अइसे मा अगर पांच मिनट खातिर कहूं ट्रैफिक मा फंसि जाव तो पिछले जनम तलक के पाप याद आय जात हैं.. अभीन परसों पी रोड पे गोपाल टाकीज के पास हम पैदल जात रहन अउर जाम मा फंसी गे रहन.. अईस हुई रहा कानपूर मा.. अउर भईया अईस गरमी मा हमरा आप सबै से एक ठो निवेदन आय कि ई बार गरमी केर छुट्टी मा जो लोगे कहूं बाहर या ठंडी जगह घूमे जाय रहे हैं.. उनसे विनती आय कि चुपचाप घूमें जांय..
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राजू श्रीवास्तव
आपन फोटू फेसबुक या कहूं अउर जगह पे अपलोड ना करें.. दूसर लोगन का चिढावें ना.. उनके घरन केर सांति भंग न करें.. ई सब देखि के बाकी सबके घरन मा चिल्लपों मचि रही.. सबकी मेहेरिया रिसियाय रहीं आय कि हमहूं का कहूं बाहर घुमाय लई चलौ.. अरे सबके पास इत्ता पईसा नाही आय.. तुम लोगे शिमला मनाली घूमे जात हौ.. यही खातिर हुंवा पहाणन पे जाम लगि गा.. अरे कौनो दाईं आपन ननिहाल अउर ददिहाल केर गांव हुई लेव.. आपन बच्चन का गांव लई जाव.. हुंवा आम अउर जामुन केर बाग दिखाव..
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राजू श्रीवास्तव
अरे आम से याद आवा कि अभीन हफ्ता भर पहिले हम डाइटिंग नामक घोर तपस्या चालु करि दिए रहैं.. कि तबहीं हमरे घर मा ‘आम’ नामक मेनका आय के हमार तपस्या भंग करि दिहिस.. एकदम पके भये चुवान वाले आम.. ई देख हमरी राल टपके लागि.. हम कहा भाड़ मा गयी डाइटिंग वाइटिंग.. हम लिया बाल्टी मा पानी.. अउर ओमा लबालब आम भरि के अईस हपक के सुताई किया है कि का बताई.. वइसे भईया आजकाल भारत मा कत्ल-ए-‘आम’ चलि रहा आय.. अउर इस कत्ल ए ‘आम’ मा लंगड़ों को भी नाही बक्शा जाय रहा..
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Raju Srivastav
एक बात हम देखा है कि शहर वाले लोगे आम केर खवाई नाही जानत हैं.. उई लोगे आम काट के खावत हैं.. अरे चेंपी निकाल के डायरेक्ट चूसो.. अउर कोऊ कुछ कहे तो हमका बताव.. अब बात बताई महिमानी की.. कल हमरे घरे मस्वानपुर वाले लल्लू आय रहें.. हम कहा यार महिमान आंय.. हम उनसे पूछे कि ठंडा लेहौ या गरम.. अब लल्लू एक नंबर के महीन.. कहिन ठंडा गरम दुइनो लई आओ .. अब हम ठहिरे उनसे भी परम.. हम उनका चाय मा बरफ डारि के दई दिहा.. हम कहा लेव ठंडा गरम..
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राजू श्रीवास्तव
वइसे एक बात समझ मा नाही आत है कि अईस भद्दर गरमी मा केहू के हिंया कौनो महिमान आवत है तो लोगे कहत हैं चाय बनाओ.. ई बात समझ मा नाही आत है.. अरे गरमी मा पना पियाव लस्सी पियाव.. लेकिन भईया इससे आपका महिमानी का स्टैंडर्ड भी पता चलत है.. कि आप उई लोगन खातिर कित्ते सम्माननीय हौ.. काहे से पना अउर लस्सी मा टाइम भी लगत है अउर पईसा भी जादा खरचा होत है.. तो केहू के हिंया गयेव अउर हुंवा खाली चाय पियाई गयी मतलब?.. बाकी आप खुदै समझदार हौ.. अउर भईया आजकाल गरमी केर छुट्टी चालि रही आय..
कोऊ रिश्तेदार के हिंया महिमानी मा इत्ते दिन भी ना टिक जायेव कि उई टिंडे करेले अउर लौकी परोसना सुरु करि दे.. वइसे भी अब पहिले जइसा मेलभाव नाहि रहि गवा.. पहिले कौनो के घर रिश्तेदार आय वाले होत रहे तो उई लोगे इंतिजार करत रहे.. कि रुको नाते रिश्तेदार आय जाय देव फिर साथै बईठ के खाना खावा जाई.. अउर अब जमाना अईस आ गा कि नाते रिश्तेदार बइठे हैं अउर ई आपन मेहेरिया से कहत हैं कि रुको.. अभीन ई लोगे जाय वाले हैं.. जब ई सबै चले जहियें तब आराम से खईबै.. लास्ट मा एक्कै बात कहे चाहित है.. कि हमरी बात ध्यान से सुना करौ..काहे से हमरे घर में हमरी कोई सुनत नहीं है।