उत्तर प्रदेश में एक तरफ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने संकल्प और शपथ पर अडिग होकर साधना में विलीन हैं, तो वहीं दूसरी तरफ उनके विरोधी इसे भंग करने की भरपूर कोशिश में लगे हैं। इसका खामियाजा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ रहा है।
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यहां सीएम योगी के संकल्प की साधना भंग
कानपुर में सीएम योगी आदित्यनाथ के संकल्प की साधना भंग करने की कोशिश की गई है। प्रदेश में कुछ धांधलेबाजों ने मिलकर योगी सरकार के खिलाफ मोर्चाबंदी कर दी है। इसी क्रम में उन्होंने यहां के शिक्षण संस्थानों में गड़बड़ी करना शुरू कर दिया है।
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इसका खुलासा उस वक्त हुआ जब लोकायुक्त टीम ने कानपुर की राजकीय पॉलिटेक्निक में छापेमारी की। बुधवार को लोकायुक्त चार सदस्यीय टीम के साथ संस्थान पहुंचे। छह घंटे तक वर्कशॉप, कंप्यूटर सेंटर व कार्यालयों में जांच-पड़ताल की गई।
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योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
जमीनी हकीकत ने बयां कर दी सारी कहानी
सूत्रों के मुताबिक टीम को संस्थान में कई खामियां मिलीं। मशीनें कागज पर कुछ और दिख रही थीं और हकीकत में कुछ और। यही हालत कंप्यूटर सेंटर की थी। कई कंप्यूटर बंद पड़े थे। कुछ के माउस- कीबोर्ड नहीं थे।
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संस्थान की खस्ता हालत देख टीम ने कुछ सालों पूर्व खरीदी गई लाखों की मशीनों व कंप्यूटर से जुड़ी सभी फाइलें जब्त कर लीं। प्रिंसिपल आरके सिंह ने छापेमारी की पुष्टि की। बताया कि टीम ने वर्कशॉप की मशीनों का परीक्षण किया। अनियमितताएं मिलने की बात से उन्होंने इंकार कर दिया।
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छात्रों ने की थी शिकायत
पिछले साल छात्रों ने संस्थान के कंप्यूटर व वर्कशॉप की मशीनों को लेकर लोकायुक्त से शिकायत की थी। लोकायुक्त ने उस दौरान जांच के लिए टीम गठित कर दी थी, लेकिन जांच नहीं हो सकी थी। सरकार बदलते ही अब जांच टीम हरकत में दिखी।
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योगी आदित्यनाथ (फाइल फोटो)
नप सकते हैं कई अधिकारी
राजकीय पॉलिटेक्निक की मशीनें व अन्य उपकरण की खरीददारी प्रिंसिपल या फिर डायरेक्टर प्राविधिक शिक्षा के निगरानी में होती है। ऐसे में अगर जांच में धांधली की बात सामने आती है तो इसकी आंच प्रिंसिपल के साथ डायरेक्टर प्राविधिक शिक्षा तक पहुंच सकती है।
गौरतलब हो पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने प्रदेश में विकास तो कुछ हद तक कराया लेकिन कानून व्यवस्था और शिक्षा व्यवस्था ज्यों की त्यों रही। मिडडे मील में आये दिन कीड़े निकलते रहते हैं इसके अलावा इस योजना में चल रही धांधलेबाजी भी बन्द नहीं हो पाई।