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Chitrakoot: मत्तगजेंद्र नाथ मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब; बारिश के बीच भक्तों ने किया जलाभिषेक

Mon, 17 Aug 2026 11:58 AM IST
प्रसून शुक्ला न्यूज डेस्क, अमर उजाला,चित्रकूट

सार

Chitrakoot News: सावन मास के तीसरे सोमवार और नाग पंचमी पर धर्मनगरी चित्रकूट में आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। बारिश के बीच बड़ी संख्या में शिवभक्त महाराजाधिराज मत्तगजेंद्रनाथ सरकार के मंदिर पहुंचे। श्रद्धालुओं ने बाबा का जलाभिषेक कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना की।
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मत्तगजेंद्रनाथ सरकार - फोटो : amar ujala
पवित्र सावन मास के तीसरे सोमवार और नागपंचमी के दुर्लभ संयोग पर धर्मनगरी चित्रकूट में आस्था का विराट सैलाब उमड़ पड़ा। झमाझम बारिश के बीच भी शिवभक्तों का उत्साह कम नहीं हुआ और भारी संख्या में श्रद्धालु महाराजाधिराज मत्तगजेंद्रनाथ सरकार के दरबार में पहुंचे। भक्तों ने कतारबद्ध होकर बाबा का जलाभिषेक किया और विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर आशीर्वाद प्राप्त किया। मंदिर परिसर से लेकर पूरे क्षेत्र तक 'हर-हर महादेव' और 'बोल बम' के गगनभेदी जयघोष गूंजते रहे।
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मत्तगजेंद्रनाथ सरकार - फोटो : amar ujala

बारिश के बावजूद भक्तों में दिखा भारी उत्साह

सावन के तीसरे सोमवार और नागपंचमी जैसे बड़े पर्वों के मद्देनजर स्थानीय पुलिस और प्रशासन द्वारा मंदिर परिसर व आसपास सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। सुबह ब्रह्म मुहूर्त से ही मंदिरों के कपाट खुलते ही भक्तों की लंबी कतारें लगनी शुरू हो गई थीं। मौसम खराब होने और तेज बारिश के बावजूद श्रद्धालुओं की आस्था में कोई कमी नहीं आई और बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए पहुंचे। प्रशासन की मुस्तैदी के चलते श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा और सभी ने सुगमता से दर्शन लाभ प्राप्त किया।

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मत्तगजेंद्रनाथ सरकार - फोटो : वीडिओ ग्रैब

बाबा मत्तगजेंद्रनाथ का पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व?

धार्मिक मान्यताओं और लोककथाओं के अनुसार, बाबा मत्तगजेंद्र नाथ को चित्रकूटधाम का राजा और क्षेत्रपाल माना जाता है। क्षेत्र की ऐसी प्राचीन किंवदंती है कि जब भगवान श्रीराम ने अपने वनवास काल के दौरान चित्रकूट में निवास करने का निर्णय लिया था, तब उन्होंने यहां रहने से पूर्व बाबा मत्तगजेंद्रनाथ से आज्ञा प्राप्त की थी। इसके अलावा, हिंदू धर्म के पवित्र ग्रंथ शिवपुराण में भी इस प्राचीन शिवलिंग के महत्व का विशेष और विस्तृत उल्लेख मिलता है। श्रद्धालुओं का यह दृढ़ विश्वास है कि इस पावन स्थान का धार्मिक इतिहास सतयुग, त्रेता, द्वापर और कलयुग यानी चारों युगों से जुड़ा हुआ है।

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मत्तगजेंद्रनाथ सरकार - फोटो : वीडिओ ग्रैब

एक ही जलहरी पर चार शिवलिंग

मत्तगजेंद्र नाथ मंदिर की देश भर में एक बेहद अनोखी और दुर्लभ विशेषता है, जो इसे अन्य शिवालयों से अलग बनाती है। इस प्राचीन मंदिर में एक ही जलहरी पर चार भव्य शिवलिंग विराजमान हैं। शास्त्रीय मान्यताओं के अनुसार, इन चारों शिवलिंगों को क्रमशः अर्थ, धर्म, काम और मोक्ष  का प्रतीक माना जाता है। यह अनूठी संरचना और अद्भुत वास्तुकला दूर-दूर से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है, जो इस मंदिर के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व को और अधिक बढ़ा देती है।

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