चित्रकूट में भगवान श्रीराम वनवास काल समाप्त हो जाने की खुशी में वनस्थली के रामघाट सहित प्रमुख मंदिरों में श्रद्धालुओं ने एक साथ 51 हजार दीये एक साथ जलाए। वाराणसी के भक्तों की टोली के साथ अन्य जिलों के लाखों भक्तों ने मंगलवार की रात रामघाट पर 51 हजार दीये एक साथ जलाए तो एकबारगी यह भी लगा कि झिलमिलाती मंदाकिनी मेें चांद तारे उतर आए हों।
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दियों से रोशन हुुआ रामघाट
- फोटो : अमर उजाला
इसके साथ ही मंदाकिनी नदी में नाव में ही भजन कीर्तन कार्यक्रम का आयोजन किया। इस दृश्य से मंदाकिनी नदी हिलोरे मारने लगी। वाराणासी की संस्थान मंगल करन श्रीर्तन मंडल संस्थान ने भगवान श्रीराम की वनस्थली में लगातार 66 वें वर्ष में भी रामघाट सहित प्रमुख मंदिरों में एक साथ 51 हजार दीप जलाया। जिससे मंदाकिनी नदी जगमग जगमग करने लगी।
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चित्रकूट मंदाकिनी नदी
- फोटो : अमर उजाला
इसके साथ ही मंदाकिनी नदी में स्थित एक दर्जन नावों में एक साथ बैठकर बाजे गाजे साथ भजन कीर्तन कार्यक्रम किया। इस दृश्य को देखने के लिए हर साल सुदूर क्षेत्र के ग्रामीण भी आते है। वाराणासी के संस्थान मंगल करन श्रीर्तन मंडल टीम के महंत मोहनी शरण महारा, व्यवस्थापक रामकुमार, मिठाई लाल, संतोष पांडेय, रामनारायण, नुपूर, चैतन्य, मायाशंकर रमाशंकर, कौशल, प्रदीप चौपबे, विजय, रामचंदर, ओमप्रकाश, छप्पनजी, मनोज, अभय, नन्हे कुमार, श्रीनाथ त्रिलोकी, अतुल, भीम, ओमप्रकाश आदि टीम के सदस्य मौजूद रहे।
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चित्रकूट के रामघाट पर हुआ दीपोत्सव
- फोटो : अमर उजाला
रामराज्य का वह दृश्य लंका फतह के बाद जब भगवान श्रीराम का पुष्पक विमान धर्मनगरी में उतरा तो मंदाकिनी किनारे लाखों टिमटिमाते दीयों से रामघाट जगमग हो चुका था। भगवान ने माता सीता व भ्राता लक्ष्मण के साथ यहां दीपदान किया तो चारों ओर बस सियापति रामचंद्र की जयजयकार ही सुनाई पड़ी...।
दिवाली के भैयादूज के दिन कुछ ऐसा ही वह परिकल्पना का दृश्य मानों साक्षात सामने आ गया। प्रभु श्रीराम की तपोस्थली चित्रकूट के रामघाट पर मंगलवार की रात को वाराणसी के मंगल करन कीर्तन मंडल की टीम ने रामघाट, दशरथ घाट, राघव घाट व भरतघाट की सीढ़्यिों पर आकर्षक रंगोली सजाकर समृद्धि व जगकल्याण की भावना से दीये जलाए।