छठ पर्व धूमधाम से मनाया गया। महिलाओं ने 36 घंटे का उपवास रखकर ढलते सूरज को मंगलवार की शाम अर्घ्य दिया। छठ मइया की पूजा की। पूजन कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने छठ पूजा के गीत गाए।
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मंगलवार की शाम को ढलते सूर्य को अर्घ्य देकर छठ पूजा का पर्व मनाया गया। छठ को लेकर कथा है कि अज्ञात वास की सजा काट रहे पांडव दुख में व दाने-दाने के लिए मोहताज थे।
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युधिष्ठिर, भीम, नकुल, सहदेव, अर्जुन द्रोपदी सहित वन में एक कुटिया में रह रहे थे। एक दिन ऋषियों का समूह इनकी कुटिया के पास पहुंचा। इन्होंने खाना खाने की इच्छा जताई।
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द्रोपदी ने व्यथा सुनाई तो ऋषियों ने द्रोपदी को छठ का व्रत करने के लिए कहा। द्रोपदी ने ऋषियों के बताने के अनुसार छठ पूजा की। इससे पांडवों का खोया हुआ राजपाट वापस मिला।
कहते हैं जो सच्चे मन से छठ मइया का व्रत रखने से हर मनोकामना पूरी होती है। कानपुर समेत आसपास के तमाम जिलों में छठ पर्व को लेकर नदी किनारे विशेष सजावट और सुरक्षा के इंतजाम किए गए थे।