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केंद्रीय वाणिज्य मंत्री सुरेश प्रभु ने यहां बताया 'भविष्य का एजेंडा'

Tue, 03 Jul 2018 10:45 PM IST
यूपी डेस्क, अमर उजाला, कानपुर

सार

- नई औद्योगिक नीति बनाकर निखारेंगे उद्यमिता-प्रभु
-निर्यात बढ़ाने को दुनिया भर में कराया मार्केट रिसर्च, कई देशों के साथ शुरू होगा कारोबार
-चमड़ा उद्योग के लिए 2600 करोड़ के पैकेज की लांचिंग अवसर पर बोले प्रभु
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सुरेश प्रभु
केंद्रीय वाणिज्य, उद्योग एवं नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने मंगलवार को चमड़ा उद्योग के लिए 2600 करोड़ रुपये के विशेष पैकेज की लांचिंग करते हुए उद्यमियों को बताया कि केंद्र सरकार जल्द ही नई औद्योगिक नीति बनाने जा रही है। यह अब तक की सबसे बेहतरीन औद्योगिक नीति होगी। यह दो तरीके से काम करेगी, एक तो परम्परागत तरीके से चल रहे उद्योगों को निखारने के लिए विशेष पैकेज दिए जाएंगे। दूसरा, उन उद्योगों को स्थापित कराया जाएगा जिनकी अब तक देश में शुरुआत ही नहीं हुई है।
 
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नई औद्योगिक नीति बनाकर निखारेंगे उद्यमिता-प्रभु
कानपुर में उन्होंने निर्यातकों को भरोसा दिया कि बीते आठ साल से निर्यात में जारी गिरावट को थामने के लिए सरकार ने कमर कस ली है। सरकार का यह प्रयास ऐसे दौर में सामने आया है जब दुनिया भर में निर्यात पर संकट छाया हुआ है। बड़े देशों के बीच ट्रेड वार छिड़ गया है। लेेकिन हम चाहते हैं कि वार नहीं, सबके साथ व्यापार करें। इसके लिए अमेरिका से व्यापारिक रिश्तों पर बातचीत चल रही है। चीन की कट्टरता भुलाकर व्यापारिक रिश्तों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। इसके अलावा आसियान देशों के साथ निर्यात बढ़ाने पर बातचीत चल रही है। 
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निर्यात बढ़ाने को दुनिया भर में कराया मार्केट रिसर्च, कई देशों के साथ शुरू होगा कारोबार
यह सब दुनिया भर में व्यापक मार्केट रिसर्च के बाद किया गया है। जल्द ही इसके परिणाम सामने आएंगे। उन्होंने खुशी जताई कि निर्यात में लगातार गिरावट के छह साल बाद वर्ष 2018 में 18 फीसदी निर्यात बढ़ा है। आधिकारिक आंकड़ों की घोषणा जल्द करेंगे।
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चमड़ा उद्योग के लिए 2600 करोड़ के पैकेज की लांचिंग अवसर पर बोले प्रभु
चमड़ा उद्यमियों के साथ भेदभाव नहीं
केंद्रीय मंत्री प्रभु ने शहर के चमड़ा उद्यमियों को आश्वस्त किया कि उनके साथ किसी तरह का भेदभाव न तो हो रहा है और न ही भविष्य में कभी होगा। चमड़ा उद्योग को प्रदूषण की मार से बचाने के लिए ही सरकार ने पहली बार पैकेज में 790 करोड़ रुपये की व्यवस्था की है। ये धनराशि चमड़ा उद्योग से पर्यावरण को बचाने के लिए खर्च की जाएगी। 2600 करोड़ रुपये सिर्फ तीन साल के लिए दिया है। जरूरत के हिसाब से और भी देंगे। चमड़ा उद्योग के विकास में किसी तरह की कोर कसर नहीं छोड़ेंगे।
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