यूपी में खनन नीति बदलने के बावजूद खनन माफिया का दखल प्रशासन में अकड़ के साथ दिखा। यही वजह रही कि नियमों को दरकिनार कर जिले में भी खनन के पांच पट्टे फिर कर दिए गए। शासन के पट्टा नवीनीकरण पर रोक और ई-टेंडर से आवंटन का बना नियम धरा का धरा रह गया था।
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अवैध मौरंग खनन
सपा शासनकाल में हुए इन्हीं मामलों की जांच हाईकोर्ट के निर्देश पर सीबीआई कर रही है। जिले में जिलाधिकारी के रूप में अभय सिंह का कार्यकाल 30 सितंबर 2013 से आठ जून 2014 तक रहा। हालांकि उनकी तैनाती से पूर्व ही प्रदेश शासन ने 31 मई 2012 के बाद किसी भी पट्टेधारक का आवंटन नवीनीकृत न करने और अगली निविदा ई-टेंडर के जरिए करने का आदेश दिया था।
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रेत खनन (सांकेतिक तस्वीर)
- फोटो : फाइल फोटो
जिले में इसका अनुपालन नहीं किया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो इसके पीछे जिला प्रशासन व विभाग का तर्क यह रहा कि शासन का आदेश भले ही 2012 में हुआ लेकिन यहां यह आदेश 2014 में पहुंचा। तब तक पुराने नियम के ही आधार पर पट्टे नवीनीकरण के कार्य हो चुके थे।
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बालू खनन
- फोटो : amar ujala
इन्हें दिए गए पट्टे
जिले में यहां सुखराज निषाद को गुरुवल तीन नंबर और कोर्राकनक दो नंबर का पट्टा किया गया। कोर्राकनक पांच नंबर शिव सिंह फर्म, ओती तीन नंबर शिव चरन सिंह, ओती चार नंबर अनिल कुमार गुप्ता को आवंटित किया गया। विभागीय सूत्रों की मानें तो बीते 27 जून को सीबीआई की टीम इन्हीं पट्टों की मूल पत्रावलियां अपने साथ ले गई है।
अवैध खनन में प्रयोग किए जाने वाला पुल भी तोड़ा गया था
सीबीआई टीम ने आवास-विकास कालोनी और असोथर में मारा छापा
सीबीआई टीम ने असोथर और शहर के हरिहरगंज और आवास-विकास कालोनी में भी पट्टाधारकों के आवासों में छापा मारा। जांच एजेंसी इन पट्टाधारकों के घरों से उस समय के ट्रेजरी के कागजात, रवन्नों की प्रति और चालान के कागज अपने साथ ले गई है। सीबीआई की शहर में मौजूदगी से पूरे जिले में सनसनी मची रही। मौरंग के कारोबार से जुड़े कई लोगों ने अपने फोन बंद कर लिए तो कई अपने गुर्गों के जरिए सीबीआई टीम की लोकेशन पता करने में लगे रहे।