यूपी के हमीरपुर जिले में अवैध खनन को लेकर दो साल से चल रही सीबीआई जांच शनिवार को फिर तेज हो गई। सीबीआई टीम ने शहर में मौरंग खनन का सिंडीकेट चलाने वाले सपा एमएलसी रमेश मिश्रा, बसपा से पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष रहे संजय दीक्षित और बबलू मिश्रा के आवासों पर एक साथ छापेमारी की। करीब नौ घंटे तक चली कार्रवाई के दौरान टीम ने तीनों आवासों में सघन तलाशी ली। चाभी न मिलने पर अधिकारियों ने बाहर से मिस्त्री बुलाकर लॉकर और अलमारी तुड़वाई। इसके बाद टीम ने महत्वपूर्ण दस्तावेजों को अपने कब्जे में ले लिया। कार्रवाई से मौरंग व्यवसायियों में हड़कंप मचा रहा।
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- फोटो : अमर उजाला
सीबीआई की 16 सदस्यीय टीम शनिवार सुबह करीब सात बजे तीन वाहनों से मुख्यालय पहुंची। जहां दो वाहनों में सवार टीम के करीब 12 अधिकारी विवेक नगर स्थित पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष बसपा नेता संजय दीक्षित पुत्र सत्यदेव दीक्षित के आवास पहुंचे। यहां टीम ने तीन मंजिला भवन में तलाशी अभियान चलाया। पहले खंड की तलाशी पूरी होने के बाद टीम दूसरे व तीसरे खंड पर पहुंची।
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यहां लॉकर और अलमारी की चाभियां मांगने पर गृहस्वामी ने कहा बहू बाहर गई है। चाभी उसी के पास है। जिस पर टीम ने लॉकर व अलमारी को खोलने के लिए बाहर से मिस्त्री को बुलाया। मगर वह नहीं खोल सका। तब कुछ देर बाद लोहार को बुलाया गया। जिसने छेनी हथौड़ा से लॉकर तोड़ा। टीम ने दस्तावेजों को अपने कब्जे में लिए। यहां करीब सवा पांच घंटे तक चली कार्रवाई के बाद दोपहर सवा बारह बजे सीबीआई अधिकारी आवास से बाहर निकले।
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मीडिया कर्मियों ने उनसे बात करने का प्रयास किया, मगर उन्होंने किसी बात का जवाब नहीं दिया। इसके बाद टीम के अधिकारियों ने एआरटीओ कार्यालय के पास स्थित सपा एमएलसी रमेश मिश्रा और बबलू मिश्रा के आवासों पर छापेमारी की। यहां भी दोनों आवासों पर करीब चार घंटे तक कार्रवाई चली। शाम करीब चार बजे टीम के अधिकारियों ने एमएलसी के आवास परिसर में बैठकर भोजन किया और वापस चले गए।
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हमीरपुर जिले में अवैध मौरंग खनन का कारोबार 10 सालों में जमकर हुआ है। इस बीच बसपा और सपा सरकार से जुड़े ज्यादातर नेताओं का नाम कहीं न कहीं मौरंग के धंधे से जुड़ा सामने आया है। अधिकारियों की शह पर खनन का काम बेहिसाब चला। सबसे ज्यादा नुकसान निर्धारित रायल्टी से दोगुनी मौरंग ट्रकों पर लोड कर मुनाफा कमाया गया। बसपा सरकार से शुरू हुआ यह खेल सपा सरकार तक जारी रहा है। इस धंधे में शामिल मौरंग माफिया अरबपति बन बैठे।
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सीबीआई बेतवा नदी पर हुए अवैध खनन के साथ किए गए मौरंग भंडारन की जांच भी 2017 में कर चुकी है। साथ ही मोराकांदर की खदानों की पड़ताल कर वीडियोग्राफी भी करवाई थी। जिले में मौरंग का खनन बेतवा, केन व धसान नदियों किया गया है। इन नदियों पर मौरंग खनन होने से नदियों का अस्तित्व खतरे में पड़ गया है।
31 मई 2012 के बाद 49 खनन पट्टों की स्वीकृति मनमानी तरीके से दी गई। तब तत्कालीन डीएम बी चंद्रकला ने दो जुलाई 2012 को जिले का चार्ज लिया और करीब ढाई साल तक रहीं। उसी दौरान उन्होंने सर्वाधिक पट्टे जारी किए। हालांकि कुछ अन्य जिलाधिकारियों ने नियम विरुद्ध खनन पट्टे किए। तब सपा एमएलसी रमेशचंद्र मिश्रा के परिवार के नाम सर्वाधिक पट्टे हुए। अवैधानिक तरीके से किए गए खनन पट्टों को लेकर तत्कालीन जिलाधिकारी बी चंद्रकला जांच के घेरे में हैं। सीबीआई द्वारा गहराई से जांच शुरू करने से मौरंग माफियाओं में हड़कंप मचा है।